{"_id":"64b2df1ff4687d40cb0bc5a6","slug":"fake-order-of-adm-court-imposed-for-cancellation-of-lease-azamgarh-news-c-258-1-svns1001-982-2023-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: पट्टा निरस्त कराने के लिए लगाया एडीएम कोर्ट का फर्जी आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: पट्टा निरस्त कराने के लिए लगाया एडीएम कोर्ट का फर्जी आदेश
विज्ञापन
मेहनगर तहसील क्षेत्र के इनवल ग्राम सभा में 13 लोगों को हुए कृषि आवंटन के पट्टे को निरस्त करने के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान ने मुकदमा दाखिल किया। सुनवाई के बाद साक्ष्यों के अभाव में तत्कालीन एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह की कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद ग्राम प्रधान द्वारा रेस्टोरेशन दाखिल किया गया। फाइल दाखिल दफ्तर हाेने के बाद एडीएम के आदेश को निकालकर उसके द्वारा दूसरे आदेश की कापी लगा दी गई। जांच के दौरान एडीएम प्रशासन की कोर्ट ने आदेश को फर्जी पाया। इसे संज्ञान में लेते हुए एडीएम प्रशासन अनिल कुमार मिश्र ने इस मामले की जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपी है।
23 सितंबर 2019 को एडीएम प्रशासन की कोर्ट में तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा आशा देवी सहित 13 लोगों को कृषि आवंटन में दी गई भूमि के पट्टे को निरस्त करने के लिए मुकदमा दाखिल किया गया। इस मामले में सुनवाई के दौरान वह कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। जिसके कारण तत्कालीन एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह ने इस मुकदमे को खारिज करते हुए पट्टाधारकों के पक्ष में आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के विरुद्ध तत्कालीन ग्राम प्रधान अशरफा देवी ने 24 जून 2020 को रेस्टोरेशन दाखिल किया। इस रेस्टोरेशन को एडीएम ने 26 नवंबर 2020 को निरस्त कर दिया। इसके बाद फाइल दाखिल दफ्तर हो गई। इसके बाद एडीएम के आदेश को निकालकर उसके स्थान पर दूसरे आदेश की कापी लगा दी गई। एक बार फिर जब यह मामला उछला तो एडीएम प्रशासन ने फाइल को मंगाकर देखा। जिसमें उन्होंने पाया कि आदेश फर्जी है। आदेश पर जो क्रमांक दर्ज है, उसका नंबर दूसरा है। न ही यह आदेश ऑनलाइन दर्ज है। साथ ही तत्कालीन एडीएम प्रशासन की दस्तखत भी संदेहास्पद लग रही थी। इस पर एडीएम प्रशासन ने इसकी जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए जांच रिपोर्ट तलब की।
फाइल में लगा आदेश पूरी तरह से फर्जी लग रहा है। क्योंकि इसका नंबर और पूर्व एडीएम द्वारा दिए गए आदेश का नंबर अलग-अलग है। साथ ही इंटरनेट पर भी यह आदेश दर्ज नहीं है। इसके लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
विज्ञापन
अनिल कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन।
विज्ञापन
23 सितंबर 2019 को एडीएम प्रशासन की कोर्ट में तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा आशा देवी सहित 13 लोगों को कृषि आवंटन में दी गई भूमि के पट्टे को निरस्त करने के लिए मुकदमा दाखिल किया गया। इस मामले में सुनवाई के दौरान वह कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। जिसके कारण तत्कालीन एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह ने इस मुकदमे को खारिज करते हुए पट्टाधारकों के पक्ष में आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के विरुद्ध तत्कालीन ग्राम प्रधान अशरफा देवी ने 24 जून 2020 को रेस्टोरेशन दाखिल किया। इस रेस्टोरेशन को एडीएम ने 26 नवंबर 2020 को निरस्त कर दिया। इसके बाद फाइल दाखिल दफ्तर हो गई। इसके बाद एडीएम के आदेश को निकालकर उसके स्थान पर दूसरे आदेश की कापी लगा दी गई। एक बार फिर जब यह मामला उछला तो एडीएम प्रशासन ने फाइल को मंगाकर देखा। जिसमें उन्होंने पाया कि आदेश फर्जी है। आदेश पर जो क्रमांक दर्ज है, उसका नंबर दूसरा है। न ही यह आदेश ऑनलाइन दर्ज है। साथ ही तत्कालीन एडीएम प्रशासन की दस्तखत भी संदेहास्पद लग रही थी। इस पर एडीएम प्रशासन ने इसकी जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए जांच रिपोर्ट तलब की।
विज्ञापन
फाइल में लगा आदेश पूरी तरह से फर्जी लग रहा है। क्योंकि इसका नंबर और पूर्व एडीएम द्वारा दिए गए आदेश का नंबर अलग-अलग है। साथ ही इंटरनेट पर भी यह आदेश दर्ज नहीं है। इसके लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
विज्ञापन
अनिल कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन।