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Azamgarh News: 5 माह से सीटी स्कैन मशीन खराब, नहीं हो रही मरम्मत
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बलरामपुर। मंडलीय जिला अस्पताल में पांच माह से सीटी स्कैन मशीन खराब है। लेकिन अस्पताल प्रशासन इसकी मरम्मत नहीं करा रहा है। ऐसे में दूर दराज से आने वाले मरीजों को सीटी स्कैन जांच कराने के लिए बाहर निजी सेंटरों में एक हजार से 12 सौ रुपये तक देना पड़ रहा है। जबकि अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर लगी सीटी स्कैन मशीन से यह जांच मुफ्त में होती है।
मंडलीय जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को चिकित्सक जरूरत के हिसाब से जांच लिखते हैं। इन्हीं जांचों में से एक सीटी स्कैन की जांच पहले सरकारी अस्पतालों में होती थी। मंडलीय जिला चिकित्सालय में 2005 में सीटी स्कैन मशीन लगी थी। लगने के कुछ वर्ष तक तो यह मशीन ठीक तरीके से काम करती रही। जब एक बार बंद हुई तो फिर दोबारा शुरू नहीं हुई। इसके बाद क्रस्ना डायग्नोस्टिक लिमिटेड पुणे ने अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर सीटी स्कैन का संचालन शुरू किया। इससे लोगों को राहत मिली। प्रतिदिन यहां पर 70 से 80 मरीज सीटी स्कैन कराने के लिए पहुंचते थे। तीन अक्तूबर 2024 को पीपीपी मॉडल पर संचालित यह सीटी स्कैन मशीन भी खराब हो गई। एक बार यह मशीन बिगड़ी तो पांच माह बीतने के बाद भी अब तक इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। इसके कारण सीटी स्कैन कराने वाले मरीजों को प्राइवेट सेंटरों पर हजारों रुपये खर्च कर सीटी स्कैन कराने को विवश हैं।
पांच महीने से सीटी स्कैन मशीन बिगड़ी है जिसकी सूचना शासन से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचा दी गई है। लेकिन, अभी तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।-आशुतोष चौधरी, सीटी स्कैन इंचार्ज।
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मंडलीय जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को चिकित्सक जरूरत के हिसाब से जांच लिखते हैं। इन्हीं जांचों में से एक सीटी स्कैन की जांच पहले सरकारी अस्पतालों में होती थी। मंडलीय जिला चिकित्सालय में 2005 में सीटी स्कैन मशीन लगी थी। लगने के कुछ वर्ष तक तो यह मशीन ठीक तरीके से काम करती रही। जब एक बार बंद हुई तो फिर दोबारा शुरू नहीं हुई। इसके बाद क्रस्ना डायग्नोस्टिक लिमिटेड पुणे ने अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर सीटी स्कैन का संचालन शुरू किया। इससे लोगों को राहत मिली। प्रतिदिन यहां पर 70 से 80 मरीज सीटी स्कैन कराने के लिए पहुंचते थे। तीन अक्तूबर 2024 को पीपीपी मॉडल पर संचालित यह सीटी स्कैन मशीन भी खराब हो गई। एक बार यह मशीन बिगड़ी तो पांच माह बीतने के बाद भी अब तक इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। इसके कारण सीटी स्कैन कराने वाले मरीजों को प्राइवेट सेंटरों पर हजारों रुपये खर्च कर सीटी स्कैन कराने को विवश हैं।
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पांच महीने से सीटी स्कैन मशीन बिगड़ी है जिसकी सूचना शासन से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचा दी गई है। लेकिन, अभी तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।-आशुतोष चौधरी, सीटी स्कैन इंचार्ज।
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