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Azamgarh News: जीवित्पुत्रिका की खरीदारी को लेकर बाजारों में उमड़ी भीड़

Thu, 05 Oct 2023 11:40 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 05 Oct 2023 11:40 PM IST
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Crowd gathered in the markets to buy Jivitputrika
आजमगढ़। जीवित्पुत्रिका व्रत इस बार शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह निर्जला व्रत माताएं अपने संतान की लंबी आयु और मंगलकामना के लिए रखती हैं। व्रत को लेकर बृहस्पतिवार को बाजार में काफी चहल-पहल रही। पूजन सामग्री के साथ सब्जी और अन्य सामान की खरीदारी के लिए दुकानों पर भीड़ देखने को मिली।
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संतान की सुरक्षा, स्वास्थ्य, दीर्घायु व समृद्धि की मंगलकामना को पूर्ण करने वाला लोकपर्व जीवित्पुत्रिका व्रत शुक्रवार को है। चीनी की मिठाई, जिउतिया, साड़ी एवं अन्य सामान के साथ ही परंपरा के अनुसार खरीदारी के लिए बृहस्पतिवार को नगर के मुख्य चौक के साथ ही ग्रामीण इलाकों में स्थित बाजारों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीण इलाकों के बाजारों के चौक-चौराहों पर जगह-जगह दुकानें सजी थीं। फुटपाथ पर जिउतिया गूंथने वाले कारीगर भी अपनी दुकानें सजाए थे। महिलाएं दुकानों पर जिउतिया लेकर लाल, पीला, हरा आदि रंग के धागाें में उसे गुथवा रही थीं। आभूषण की दुकान पर जिउतिया खरीदने के लिए भीड़ देखी गई। जीवित्पुत्रिका पर्व पर फल की जमकर खरीदारी की गई। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने पिता की मौत से नाराज होकर पांच लोगों को पांडव समझकर मार डाला। यह सभी द्रौपदी की पांच संतानें थी। जिसपर अर्जुन अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उनकी दिव्यमणी छिन ली। जिस पर अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे को मार डाला। जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने पुण्य प्रताप के बल पर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को पुन: जीवित किया। भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से उत्पन्न बच्चे नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। आगे चलकर यहीं राजा परीक्षित के नाम से प्रचलित हुए। तभी से इस व्रत को माताएं संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं।
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गेहूं और उड़द के दान का विशेष महत्व
आजमगढ़। पंडित सत्यम गुुरु ने बताया कि व्रत के दिन स्नान आदि से निवृत होकर भगवान सूर्यनारायण की प्रतिमा को स्नान कराएं। इसके बाद गंध, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप आदि से उनकी पूजा करें। बाजरे व चने से बना भोग अर्पित करें। इस दिन स्त्रियां उड़द के कुछ साबुत दाने निगलती हैं। जिसका प्रयोजन भगवान श्री कृष्ण के सूक्ष्म रूप को उदर में प्रवेश माना जाता है। इस दिन गेहूं तथा उड़द के दान का विशेष महत्व है।
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खरीदारी से सरपुतिया के भाव चढ़े आसमान

रानी की सराय। वंश वृद्धि एवं उसकी सलामती के लिए माताओं द्वारा रखे जाने वाले जीवित्पुत्रिका व्रत की पूर्व संध्या पर बाजारों में सरपुतिया की काफी मांग रही। जिसके कारण इसका भाव प्रतिदिन की अपेक्षा आसमान छूता दिखा। प्रतिदिन बाजारों में 25 से 30 रुपए प्रति किलो बिकने वाली सरपुतिया के भाव सवा सौ रुपए प्रति किलो हो गए। बता दें कि जीवित्पुत्रिका व्रत की पूर्व संध्या पर व्रती महिलाएं संध्या काल आहार में सतपुतिया की सब्जी खाने के बाद ही व्रत का शुभारंभ करती हैं।
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