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बोली मां, डॉ. रफी परवेज की हुई थी हत्या, कराएं जांच
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आजमगढ़। जिला अस्पताल में तैनात रहे चर्म रोग विशेषज्ञ के प्रभारी डॉ. रफी परवेज की मौत के मामले में नया मोड़ सामने आया है। डॉ. रफी की मां अफरोज जहां ने सोमवार को एसपी बबलू कुमार से मिलकर इंसाफ की गुहार लगाई। उनका आरोप है कि 23 दिसंबर की रात उनके बेटे की मौत हृदयगति रुकने से नहीं बल्कि गोली मारने से हुई थी। इसके पीछे परिवार और विभागीय लोगों का हाथ है। एसपी ने मामले की जांच एसपी सिटी को सौंपते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई का निर्देश दिया है। उधर डॉ. रफी परवेज की मौत की जांच शुरू होने से जिला अस्पताल के डाक्टर, कर्मचारियों के होश उड़ गए हैं।
मूलरूप से वाराणसी के सलेमपुरा मुहल्ले की रहने वाली अफरोज जहां पत्नी स्व. कुंवर अकबर अली के मुताबिक उनका बेटा डॉ. रफी परवेज जिला अस्पताल आजमगढ़ में चर्म रोग विशेषज्ञ के पद पर तैनात था। वो अस्पताल परिसर में बने सरकारी आवास में पत्नी साजिया हाशमी और दो बच्चों के साथ रहते थे। 23 दिसंबर की शाम करीब छह बजे उनकी तबियत खराब हुई। पत्नी साजिया हाशमी ने अस्पताल के एक चिकित्सक को फोन कर इसकी जानकारी दी। आवास पर पहुंचे डॉक्टर ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद बेटे को शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पत्नी, उसकी एक सहेली के अलावा दो से तीन लोग मौजूद थे। इलाज के दौरान रात नौ बजे उनकी मौत हो गई। मां का कहना है कि बेटे के कनपटी पर गोली मारने जैसा निशान था। गर्दन सूजी हुई थी। मौत के दो दिन बाद हमें सूचना दी गई। यही नहीं मां ने ये भी सवाल खड़े किए हैं कि जिला अस्पताल की बजाय सरकारी डाक्टर को प्राइवेट अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया? ये सवाल हत्या की ओर से इशारा कर रहा है। एसपी बबलू कुमार ने एसपी सिटी को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. रफी परवेज की मां अफरोज जहां ने बताया कि घटना के बाद कार्रवाई के लिए वाराणसी एसपी से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया तो वहां से आजमगढ़ भेजा गया। यहां पर भी शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला दबा दिया जा रहा है। एसपी ने अफरोज जहां को भरोसा दिया कि मामले की जांच के लिए वाराणसी के डीएम से बात कर कब्र खोदकर लाश बाहर निकालने की अनुमति ली जाएगी और पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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मूलरूप से वाराणसी के सलेमपुरा मुहल्ले की रहने वाली अफरोज जहां पत्नी स्व. कुंवर अकबर अली के मुताबिक उनका बेटा डॉ. रफी परवेज जिला अस्पताल आजमगढ़ में चर्म रोग विशेषज्ञ के पद पर तैनात था। वो अस्पताल परिसर में बने सरकारी आवास में पत्नी साजिया हाशमी और दो बच्चों के साथ रहते थे। 23 दिसंबर की शाम करीब छह बजे उनकी तबियत खराब हुई। पत्नी साजिया हाशमी ने अस्पताल के एक चिकित्सक को फोन कर इसकी जानकारी दी। आवास पर पहुंचे डॉक्टर ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद बेटे को शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पत्नी, उसकी एक सहेली के अलावा दो से तीन लोग मौजूद थे। इलाज के दौरान रात नौ बजे उनकी मौत हो गई। मां का कहना है कि बेटे के कनपटी पर गोली मारने जैसा निशान था। गर्दन सूजी हुई थी। मौत के दो दिन बाद हमें सूचना दी गई। यही नहीं मां ने ये भी सवाल खड़े किए हैं कि जिला अस्पताल की बजाय सरकारी डाक्टर को प्राइवेट अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया? ये सवाल हत्या की ओर से इशारा कर रहा है। एसपी बबलू कुमार ने एसपी सिटी को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
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डॉ. रफी परवेज की मां अफरोज जहां ने बताया कि घटना के बाद कार्रवाई के लिए वाराणसी एसपी से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया तो वहां से आजमगढ़ भेजा गया। यहां पर भी शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला दबा दिया जा रहा है। एसपी ने अफरोज जहां को भरोसा दिया कि मामले की जांच के लिए वाराणसी के डीएम से बात कर कब्र खोदकर लाश बाहर निकालने की अनुमति ली जाएगी और पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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