फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Anti-erosion work worth 9.15 crore fails to prevent erosion; surging Saryu waves along the banks are a cause for alarm.

Azamgarh News: 9.15 करोड़ के कटानरोधी कार्य पर नहीं मिली कटान से मुक्ति, किनारे डरा रही सरयू की उफनती लहरें

Tue, 04 Aug 2026 12:28 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 12:28 AM IST
विज्ञापन
Anti-erosion work worth 9.15 crore fails to prevent erosion; surging Saryu waves along the banks are a cause for alarm.
सगड़ी के झगरहवा में हो रही कटान। संवाद
नदी के मुहाने पर खड़े सगड़ी और महाराजगंज के कई गांवों पर फिर सरयू का कहर टूटने वाला है। बस्ती के निकट सरयू की उफनती लहरें टकरा रही हैं। गनीमत है कि यहां अभी रह-रहकर कटान हो रही है।
विज्ञापन

हालांकि, प्रशासन की ओर से 9.15 करोड़ की लागत से कटानरोधी कार्य तो किए गए हैं पर जगह-जगह बालू व मिट्टी से भरी बोरियां नदी की उफनती नदी में बैठने लगी हैं। नदी किनारे बस्तियों पर कटान का खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन

सगड़ी तहसील के देवारा खास राजा की झगरहवा में 5.39 करोड़ की लागत से बोल्डर डालकर डंपरिंग का काम किया गया है और कुछ दूर तक परखू पाइन लगाया गया है। झगरहवा गांव में करीब 25-30 परिवार निवास करते है। गांव के रामकरण जिनकी मंडई नदी किनारे पड़ी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि जो यह बोल्डर और परखू पाइन डाला गया है, इसका कोई मतलब नहीं है। आज भी कहीं न कहीं सरयू नदी के कटान का दंश हम ग्रामीण झेल रहे हैं। इससे कोई बहुत असर नहीं है। अगर कहीं कटान शुरू हुआ तो सब नदी में विलीन हो जाएगा।
वहीं रामकरण, राम आधार, कन्हैया, बलराम, शिवनाथ, द्वारिका आदि के घर के सामने नदी कटान करती हुए पहुंच चुकी है और विभाग ने कटान को रोकने के लिए डंपरिंग का काम किया है।
इसके आगे हाजीपुर गोला पुल के पूर्व तरफ भी कटान जारी है, तो वहीं सहबदिया और बरामदपुर गांव के पास भी कटान काफी तेजी से हो रही है। नदी में बहाव तेज हो जाने से तटवर्ती गांव के किसानों की खेती कटती जा रही है।
महाराजगंज विकास खंड में सरयू नदी के दाएं तट पर स्थित ग्राम समूह अराजी गंगापुर, अराजी मलहपुरवा और अराजी पुरैनिया की सुरक्षा के लिए 3.76 करोड़ से कटानरोधी कार्य किया गया है। आसपास के खेतों से मिट्टी निकालकर उसे पाटा गया है।
मिट्टी और बालू को बोरियों में भरकर रस्सियों से बांधकर नदी के तट पर डाला जा रहा है और उन्हें सहारा देने के लिए किनारे पर बांस के खूंटों से बांधा गया है। नदी में 10 कटर बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त परखू पाइप भी नदी में स्थापित की गई है।
यहां करीब 10 परखूपाइन नदी में समाहित हो चुकी है। गांव के बहादुर ने बताया कि परखू पाइप और बालू-मिट्टी से भरी बोरियों के सहारे स्थायी रूप से कटान नहीं रोका जा सकता। उनका कहना है कि यदि नदी किनारे बोल्डर और पत्थरों से मजबूत सुरक्षा कार्य कराया जाता तो कटान रोकने में अधिक सफलता मिलती।
बृजभान ने बताया कि परियोजना के तहत बनाए गए 10 कटर के साथ-साथ लगाए गए कुछ परखू पाइप पहले ही नदी में समाहित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल नदी में कटान नहीं हो रहा है, लेकिन यदि तेज बहाव और कटान शुरू हुआ तो मिट्टी से भरी बोरियां इसे रोकने में सक्षम नहीं होंगी।
--
डिघिया पर लाल निशान से 20 सेमी नीचे उफन रही नदी
लाटघाट। विभिन्न बैराजों द्वारा लगातार पानी छोड़े जाने से बदरहुआ और डिघिया नालों के जलस्तर में सोमवार को बढ़ोतरी दर्ज की गई। बदरहुआ नाले का जलस्तर रविवार शाम चार बजे 70.70 मीटर था, जो सोमवार को 22 सेंटीमीटर बढ़कर 70.92 मीटर पहुंच गया। वहीं डिघिया नाले का जलस्तर 70.04 मीटर से बढ़कर 70.20 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें 16 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। हालांकि, दोनों नालों का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है। डिघिया नाले का खतरा बिंदु 70.40 मीटर तथा बदरहुआ नाले का खतरा बिंदु 71.68 मीटर निर्धारित है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
--
खेतों से निकाली गई मिट्टी को निकाल कर बोरियों में भरकर नदी किनारे लगाया गया है। यदि नदी में तेज कटान शुरू हुआ तो मिट्टी से भरी बोरियां बहाव में बह सकती हैं और गांव की सुरक्षा संकट में पड़ जाएगी। हरिश्चंद्र यादव, निवासी अराजी गंगापुर।
--
सरकार कटाव निरोधक कार्य पर भारी धनराशि खर्च कर रही है। यदि इसी राशि से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भूमि उपलब्ध कराकर बसाया जाता तो यह अधिक स्थायी समाधान होता। उनका मकान नदी के कटान स्थल से मात्र सात से आठ मीटर की दूरी पर है और कटान बढ़ने पर घर नदी में समाहित होने का खतरा बना हुआ है। रमेश, निवासी अराजी पुरैनिया।

--
गांवों को कटान से बचाने के लिए डंपरिंग की गई है और परखूपाइन लगाई गई है। इससे गांव पूरी तरह सुरक्षित हैं। विभाग लगातार चक्रमण कर हर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विरेंद्र सिंह, अधिशासी अभिंयता बाढ़ खंड।

सगड़ी के झगरहवा में हो रही कटान। संवाद

सगड़ी के झगरहवा में हो रही कटान। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed