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Azamgarh News: कर्बला के शहीदों की याद में निकाला गया मातमी जुलूस

Thu, 02 Jul 2026 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 12:10 AM IST
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A mourning procession was held in memory of the martyrs of Karbala
सरायामीर के निकामुद्दीनपुर में मातमी जुलूस में शामिल लोग। संवाद
सरायमीर। कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में बुधवार को निकामुद्दीनपुर में मातमी जुलूस अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में जायरीन, मातमी अंजुमनों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
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जुलूस निर्धारित समय पर सैय्यदवाड़ा से अलम, ताबूत व जुलजनाह के साथ बरामद हुआ, जो कि विभिन्न अजाखानों व इमाम चौक से होकर देर शाम कर्बला पहुंचा जहां मंजरकशी की गई जिसकी नकाबत जीशान अली निजामाबादी ने किया पूरे रास्ते ‘या हुसैन’, ‘या अब्बास’ की सदाओं से माहौल गूंजता रहा।
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प्रसिद्ध नौहाखवान शबीह अब्बास व अली मूसा लखनऊ ने दर्दभरे नौहे पढ़े और सीना-जनी कर कर्बला के गम का इजहार किया।
जगह-जगह लोगों ने जुलूस के जायरीन के लिए ठंडे पानी, शर्बत और तबर्रुक के इंतजाम किए। गर्म मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने सबीलों पर सेवा देकर इंसानियत और मोहब्बत का संदेश दिया। जुलूस में महिलाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।
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पूरे मार्ग पर अनुशासन और धार्मिक गरिमा बनाए रखी गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन और पुलिस बल तैनात रहा।
पहली मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मेराज हैदर ने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, इंसाफ, सब्र और मानवता की रक्षा के लिए दी गई महान कुर्बानी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने के बजाय अपने परिवार और साथियों के साथ शहादत स्वीकार की, लेकिन सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। उनका संदेश आज भी पूरी इंसानियत के लिए मार्गदर्शक है।
तकरीर करते हुए अजमेर से आए मौलाना गुलजार हुसैन जाफरी ने कहा कि मुहर्रम हमें आपसी भाईचारा, अमन, इंसानियत, त्याग और नैतिक मूल्यों पर चलने की प्रेरणा देता है।

मौलाना फरमान हैदर ने कर्बला की मार्मिक घटना को बयान किया तो लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े जुलूस में अंजुमन दुआए जहरा मुजफ्फरनगर, अंजुमन मासूमिया बड़ागांव घोसी, अंजुमन हुसैनिया जाफराबाद जलालपुर, अंजुमन अब्बासिया टांडा, अंजुमन जाफरिया शमसपुर, अंजुमन तबलीगे अजा मकसूदन चक ने नौहा मातम किया। जुलूस का संचालन सागर आजमी व मोहम्मद हुसैन सरायमीरी ने किया।
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