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Azamgarh News: 55 आंगनबाड़ी भवन अधूरे, 82.5 लाख की जरूरत
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आजमगढ़। एमएसडीपी योजना के तहत जनपद के दो ब्लॉकों में स्वीकृत 66 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कार्यदायी संस्था की उदासीनता के कारण पूरा नहीं हो पाया है। जबकि इसके लिए स्वीकृत धनराशि 496.32 लाख पांच किस्तों में जारी हो चुकी है। कार्यदायी संस्था ने फिर 82.5 लाख रुपये की मांग की है।
एमएसडीपी योजना के तहत वर्ष 2016-17 में जनपद के सठियांव और मिर्जापुर ब्लॉक में 496.32 लाख से 66 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति मिली। सभी आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड को दी गई। प्रति भवन के निर्माण में 7.52 लाख रुपये खर्च होने थे। शासन द्वारा भवन निर्माण के लिए दिसंबर 2017 में 82.72 लाख, मई 2020 में 132.35 लाख, जनवरी 2023 में 33.09 लाख, जुलाई 2023 में 99.24 लाख और नवंबर 2023 में 148.90 लाख रुपये जारी किए गए। यानी निर्माण के लिए स्वीकृत पूरी धनराशि कार्यदायी संस्था को जारी कर दी गई। पूरी धनराशि खर्च हो गई लेकिन 11 आंगनबाड़ी भवनों को छोड़ दिया जाए तो 55 आंगनबाड़ी भवन अभी अधूरे पड़े हुए हैं। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों की उदासीनता के कारण पहले काम काफी धीमी गति से किया गया और पूरी धनराशि खत्म होने की बात कह काम नहीं हो पाया। कहीं छत नहीं बनी तो कहीं नींव भरकर छोड़ दी गई है। तैयार आंगनबाड़ी भवनों में खिड़की और मुख्य दरवाजे लगे ही नहीं हैं। उधर, कार्यदायी संस्था ने जीएसटी में बढ़ोतरी का हवाला देकर अधूरे 55 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण पूरा करने के लिए 82.5 लाख की और मांग की है। इसके लिए अल्पसंख्यक विभाग को पत्र भी भेजा गया है।
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सठियांव और मिर्जापुर ब्लॉक में 496.32 लाख से 66 आंगनबाड़ी भवन बनने थे। शासन से स्वीकृत धनराशि भी जारी हो चुकी है। लेकिन 55 आंगनबाड़ी केंद्र अभी अधूरे ही पड़े हैं। इनको पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था ने फिर 82.5 लाख की और मांग की है। शासन को पत्र भेजा गया है लेकिन बजट नहीं आया है। - वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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एमएसडीपी योजना के तहत वर्ष 2016-17 में जनपद के सठियांव और मिर्जापुर ब्लॉक में 496.32 लाख से 66 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति मिली। सभी आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड को दी गई। प्रति भवन के निर्माण में 7.52 लाख रुपये खर्च होने थे। शासन द्वारा भवन निर्माण के लिए दिसंबर 2017 में 82.72 लाख, मई 2020 में 132.35 लाख, जनवरी 2023 में 33.09 लाख, जुलाई 2023 में 99.24 लाख और नवंबर 2023 में 148.90 लाख रुपये जारी किए गए। यानी निर्माण के लिए स्वीकृत पूरी धनराशि कार्यदायी संस्था को जारी कर दी गई। पूरी धनराशि खर्च हो गई लेकिन 11 आंगनबाड़ी भवनों को छोड़ दिया जाए तो 55 आंगनबाड़ी भवन अभी अधूरे पड़े हुए हैं। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों की उदासीनता के कारण पहले काम काफी धीमी गति से किया गया और पूरी धनराशि खत्म होने की बात कह काम नहीं हो पाया। कहीं छत नहीं बनी तो कहीं नींव भरकर छोड़ दी गई है। तैयार आंगनबाड़ी भवनों में खिड़की और मुख्य दरवाजे लगे ही नहीं हैं। उधर, कार्यदायी संस्था ने जीएसटी में बढ़ोतरी का हवाला देकर अधूरे 55 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण पूरा करने के लिए 82.5 लाख की और मांग की है। इसके लिए अल्पसंख्यक विभाग को पत्र भी भेजा गया है।
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सठियांव और मिर्जापुर ब्लॉक में 496.32 लाख से 66 आंगनबाड़ी भवन बनने थे। शासन से स्वीकृत धनराशि भी जारी हो चुकी है। लेकिन 55 आंगनबाड़ी केंद्र अभी अधूरे ही पड़े हैं। इनको पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था ने फिर 82.5 लाख की और मांग की है। शासन को पत्र भेजा गया है लेकिन बजट नहीं आया है। - वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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