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कंपनियों ने बुलाया तो 10 फीसदी लौटे काम पर

Sun, 19 Jul 2020 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2020 10:30 PM IST
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10 percent returned to work if companies called
आजमगढ़। कोरोना काल में दूसरे प्रांतों में रहने वाले लगभग एक लाख 70 हजार प्रवासी श्रमिक कंपनी बंद होने के कारण घर आए थे। लेकिन जैसे लाक डाउन खुला और कंपनियां खुली वहां से इन्हें बुलावा आने लगा। घर पर कोई काम न होने और परिवार के भरण पोषण की समस्या को देखते हुए इनमें से लगभग 10 प्रतिशत प्रवासी अपने काम पर लौट चुके हैं।
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लाक डाउन के दौरान घर लौटे प्रवासी श्रमिकों को अपने प्रदेश और घर पर रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा इन्हें मनरेगा आदि योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है। सरकार की ओर से गरीब परिवार कल्याण योजना की शुरूआत की गई। जिसमें 25 विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह रोजगार का सृजन कर प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराएं। इसके लिए सरकार ने सभी विभागों को 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का निर्देेेश दिया है। जिसके क्रम में अपना जनपद मानव दिवस सृजन करने में प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। वहीं जिला प्रशासन की ओर से एक लाख 70 हजार प्रवासी श्रमिकों में से लगभग 40 हजार प्रवासी श्रमिकों का मनरेगा जाबकार्ड बनाकर उन्हें रोजगार दिया गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 240 प्रवासी श्रमिकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं सरकार की ओर से जनपद में 3068 प्रवासी श्रमिकों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला उद्योग केंद्र की ओर से नाई, टेलरिंग आदि के प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। इसमें अब तक एक दर्जन के करीब प्रवासी श्रमिकों को प्रशिक्षित कर उनमें टूल किट का वितरण किया जा चुका है। कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा की ओर से प्रवासियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभी तक दो बैच में 50 प्रवासी किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम की ओर से 10 लोगों को ऋण दिलाया गया है।
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डीएम ने बनवाया ई-प्रयास पोर्टल
प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए डीएम राजेश कुमार द्वारा लेखपालों आदि को लेकर इनका सर्वे कराया गया। जिसमें उनकी सारी जानकारियां ली गई कि उनके पास कौन सा हुनर है। उनके टैलेंट के हिसाब से अलग-अलग डाटा फीडिंग कर एक फोल्डर बनाया गया है। अब अगर किसी को कंप्यूटर आपरेटर, सेल्समैन, पेंटर, बढ़ई आदि की जरूरत है तो वह इस पोर्टल पर जाकर अपनी जरूरत के हिसाब से आदमी को ले सकता है।
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मास्टर ट्रेनर नियुक्त करने की तैयारी
वहीं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत विभिन्न प्रकार की विधा जानने वाले प्रवासी श्रमिकों को मास्टर ट्रेनर नियुक्त करने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। डीसी एनआरएलएम का प्रयास है कि इसके माध्यम से समूह की महिलाओं को नई वस्तुएं बनाने की विधि आए। जनपद में कुल 9700 स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं। इसमें 106000 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। कोरोना काल में इन महिलाओं द्वारा एक लाख 68 हजार मास्क तैयार कर बिक्री की गई। प्रवासी महिलाओं को समूह से जोड़कर रोजगार देने की भी योजना है।
आए 100 से ज्यादा, 80 फीसदी अभी गांव में ही
अहरौला। पकड़ी गांव के प्रधान दिलीप उर्फ रिंकू यादव ने बताया कि उनके गांव में लगभग 100 से ज्यादा प्रवासी श्रमिक अपने घरों को लौटे थे। घरों को लौटने वाले सभी प्रवासी मध्यम वर्ग और निचले तबके से संबंध रखते हैं। इन आने वालों में लगभग 18 से 20 प्रतिशत लोग वापस काम पर लौट चुके हैं। लेकिन अभी भी 80 प्रतिशत लोग गांव में जमे हुए हैं। इसमें से बहुत से लोग मनरेगा से जुड़कर कार्य कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोग मनरेगा से न जुड़कर वापस होने लगे हैं। कुछ लोगों ऐसे भी हैं जो गांव में ही रहकर कुछ करना चाहते हैं।
40 से ज्यादा आए एक दो ही हुए वापस
अहरौला। हांसा मतलूबपुर के प्रधान आनंद पांडेेय ने बताया कि हमारे ग्रामसभा में 40 से ज्यादा प्रवासी श्रमिक गांव लौटे थे। गांव लौटने के बाद उन्हें ग्राम सभा में मनरेगा के तहत जो इच्छुक थे उन्हें काम दिया गया और उन्हें ग्रामसभा के तहत जो भी सुविधाएं थी वह भी मुहैया कराई गई। आने वाले प्रवासी मजदूर सभी निचले तबके से संबंध रखते हैं। इसमें से एक दो लोग अपने पुराने काम पर वापस भी लौट चुके हैं। उसमें से कुछ तो ऐसे मजदूर हैं जो पुन: अन्य प्रांतों में जाने से भी डर रहे हैं यही रह कर अपना कोई छोटा मोटा काम करना चाहते हैं। कई लोग ऐसे हैं जो मनरेगा में कार्य नहीं करना चाहते हैं।

जनपद में लगभग एक लाख 70 हजार प्रवासी श्रमिक आए हैं। इनमें से लगभग 62 हजार प्रवासियों को हम रोजगार से जोड़ चुके हैं। सिर्फ पांच हजार लोगों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और 54 लोगों को उद्योग केंद्र द्वारा रोजगार से जोड़ा गया है। अन्य विभागों द्वारा भी कुछ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रवासी श्रमिक वापस होने लगे हैं लेकिन अभी तक उनका आंकड़ा नहीं जुटाया गया है।
आनंद प्रकाश शुक्ला, सीडीओ।
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