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Ayodhya News: मुफलिसी में जी रहीं पीएम मोदी को चाय पिलाने वाली मीरा
Wed, 28 Oct 2026 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:45 PM IST
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मीरा अपने बच्चे के साथ व जानकारी देते कांग्रेस नेता।
अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर 2023 को अयोध्या में मीरा मांझी के घर पहुंचकर चाय पी थी। उस समय यह मुलाकात देशभर में चर्चा का विषय बनी और मीरा मांझी का परिवार सुर्खियों में आया। हालांकि, करीब तीन साल बाद इसी परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिवार का दावा है कि रोजगार से पर्याप्त आमदनी नहीं हो रही, कर्ज की किस्तें चुकाना मुश्किल है और तीन छोटे बच्चों के पालन-पोषण का संकट बना हुआ है।
प्रधानमंत्री के दौरे से परिवार को जीवन में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन मीरा मांझी के मुताबिक, उनकी आर्थिक परेशानियां दूर नहीं हो सकीं। मीरा मांझी ने अमर उजाला को बताया कि प्रधानमंत्री के घर आने के बाद उम्मीद जगी थी कि परिवार की आजीविका बेहतर होगी। वह पहले घाट पर फूल बेचकर परिवार का खर्च चलाती थीं, लेकिन अब यह काम बंद हो चुका है। उनका आरोप है कि फूल बेचने के लिए जगह उपलब्ध कराने के बदले उनसे पांच हजार रुपये की वसूली की जाती थी। इस समस्या को लेकर उन्होंने जनप्रतिनिधियों से शिकायत भी की, लेकिन समाधान नहीं हुआ। कारोबार बंद होने से परिवार की आय का एक अहम जरिया छिन गया।
मीरा मांझी ने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान अधिकारियों ने परिवार से आजीविका के साधन के बारे में पूछा था। मांझी समुदाय से होने के कारण उन्होंने नाव के जरिये रोजगार करने की इच्छा जताई थी। कई महीने तक सुनवाई नहीं होने पर वह जिलाधिकारी से मिलने पहुंचीं। इसके बाद डूडा के माध्यम से केनरा बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण दिलाया गया। नाव से पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण अब ऋण की किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है।
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प्रधानमंत्री के दौरे से परिवार को जीवन में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन मीरा मांझी के मुताबिक, उनकी आर्थिक परेशानियां दूर नहीं हो सकीं। मीरा मांझी ने अमर उजाला को बताया कि प्रधानमंत्री के घर आने के बाद उम्मीद जगी थी कि परिवार की आजीविका बेहतर होगी। वह पहले घाट पर फूल बेचकर परिवार का खर्च चलाती थीं, लेकिन अब यह काम बंद हो चुका है। उनका आरोप है कि फूल बेचने के लिए जगह उपलब्ध कराने के बदले उनसे पांच हजार रुपये की वसूली की जाती थी। इस समस्या को लेकर उन्होंने जनप्रतिनिधियों से शिकायत भी की, लेकिन समाधान नहीं हुआ। कारोबार बंद होने से परिवार की आय का एक अहम जरिया छिन गया।
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मीरा मांझी ने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान अधिकारियों ने परिवार से आजीविका के साधन के बारे में पूछा था। मांझी समुदाय से होने के कारण उन्होंने नाव के जरिये रोजगार करने की इच्छा जताई थी। कई महीने तक सुनवाई नहीं होने पर वह जिलाधिकारी से मिलने पहुंचीं। इसके बाद डूडा के माध्यम से केनरा बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण दिलाया गया। नाव से पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण अब ऋण की किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है।
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