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Ayodhya News: वेदमूर्ति देवव्रत ने किया शुक्ल यजुर्वेद की ऋचाओं का उच्चारण
Sat, 06 Dec 2025 08:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 06 Dec 2025 08:27 PM IST
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07- वेदमूर्ति देवव्रत का सम्मान करते महापौर व अन्य- संगठन
अयोध्या। रामनगरी की पवित्र हवा शनिवार को वेदमंत्रों की गूंज से भर उठी। शुक्ल यजुर्वेद की ऋचाओं का सामूहिक उच्चारण मानो नगर की आध्यात्मिक धड़कन को एक नई लय दे गया। अवसर था काशी से आए वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे के स्वागत समारोह का। वेदमूर्ति ने शुक्ल यजुर्वेद की ऋचाओं का उच्चारण किया। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी के नेतृत्व में संतों ने उनका भव्य स्वागत किया। वेदमूर्ति ने देश में 200 साल बाद 50 दिनों में 2000 वेद मंत्रों का दंडक्रम पारायण किया है।
छले शनिवार को शुक्ल यजुर्वेद का पारायण कर वेदमूर्ति की उपाधि से विभूषित हुए देवव्रत महेश रेखे अपने पिता और गुरु पं. महेश चंद्रकांत रेखे और अन्य विद्वानों के साथ रामनगरी पहुंचे। यहां तुलसी उद्यान में आयोजित समारोह में महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने रामचरित मानस, स्वलिखित हृदय में राम पुस्तक के साथ भगवान राम की प्रतिमा भेंट कर स्वागत किया। इससे पूर्व कारसेवकपुरम में जुटे वेदपाठी बटुकों ने जब वेदमूर्ति के स्वागत में मंत्रोच्चार किया तो वातावरण दिव्य हो उठा।
इस मौके पर महापौर ने कहा कि दो सौ वर्षों बाद काशी के 19 वर्षीय बटुक ने वेद मूर्ति की उपाधि धारण कर वैदिक संस्कृति के पुनर्जागरण का शंखनाद किया है। आज पूरी दुनिया सनातन संस्कृति का लोहा मान रही है। उन्होंने कहा कि वृंदावन प्रेम की नगरी है। अयोध्या वैराग्य की और काशी विद्वता की धरती है। देवव्रत महेश रेखे ने इसे एक बार फिर सिद्ध कर दिया है। देवव्रत के पिता पं. महेश चंद्रकांत रेखे ने सम्मान देने के लिए महापौर और अयोध्या के संतों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विधर्मियों ने पुस्तक नष्ट कर दी, लेकिन ज्ञान की वैदिक परंपरा को नष्ट नहीं कर सके।
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कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित रघुनाथ दास शास्त्री ने किया। इस मौके पर महंत शशिकांत दास, मिथिलाबिहारी दास, डॉ़ रामानंद शुक्ल, महंत लल्लन तिवारी, रवि तिवारी, पार्षद अनुज दास, महेंद्र शुक्ल, सचिंद्र सिंह, सुनील अवस्थी, शिक्षक राहुल सिंह, श्रीनिवास शास्त्री आदि मौजूद रहे।
यह मेरा गौरव नहीं, विद्या का गौरव : वेदमूर्ति
दो हजार वेदमंत्रों का दंडक्रम पारायण करने वाले वेदमूर्ति ने बताया कि दंडक्रम पारायण में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यांदिनी शाखा के दो हजार मंत्रों को कंठस्थ कर सुनाना होता है। दो हजार मंत्रों के दंडक्रम पारायण करने पर दो लाख से अधिक बार पारायण होगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करना जीवन का सौभाग्य है। अपनी उपलब्धि पर कहा कि यह मेरा गौरव नहीं, विद्या का गौरव है। युवाओं को संदेश दिया कि युवा जिस भी क्षेत्र में हों, निरंतरता के साथ उसी में मेहनत करते रहें।
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छले शनिवार को शुक्ल यजुर्वेद का पारायण कर वेदमूर्ति की उपाधि से विभूषित हुए देवव्रत महेश रेखे अपने पिता और गुरु पं. महेश चंद्रकांत रेखे और अन्य विद्वानों के साथ रामनगरी पहुंचे। यहां तुलसी उद्यान में आयोजित समारोह में महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने रामचरित मानस, स्वलिखित हृदय में राम पुस्तक के साथ भगवान राम की प्रतिमा भेंट कर स्वागत किया। इससे पूर्व कारसेवकपुरम में जुटे वेदपाठी बटुकों ने जब वेदमूर्ति के स्वागत में मंत्रोच्चार किया तो वातावरण दिव्य हो उठा।
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इस मौके पर महापौर ने कहा कि दो सौ वर्षों बाद काशी के 19 वर्षीय बटुक ने वेद मूर्ति की उपाधि धारण कर वैदिक संस्कृति के पुनर्जागरण का शंखनाद किया है। आज पूरी दुनिया सनातन संस्कृति का लोहा मान रही है। उन्होंने कहा कि वृंदावन प्रेम की नगरी है। अयोध्या वैराग्य की और काशी विद्वता की धरती है। देवव्रत महेश रेखे ने इसे एक बार फिर सिद्ध कर दिया है। देवव्रत के पिता पं. महेश चंद्रकांत रेखे ने सम्मान देने के लिए महापौर और अयोध्या के संतों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विधर्मियों ने पुस्तक नष्ट कर दी, लेकिन ज्ञान की वैदिक परंपरा को नष्ट नहीं कर सके।
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कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित रघुनाथ दास शास्त्री ने किया। इस मौके पर महंत शशिकांत दास, मिथिलाबिहारी दास, डॉ़ रामानंद शुक्ल, महंत लल्लन तिवारी, रवि तिवारी, पार्षद अनुज दास, महेंद्र शुक्ल, सचिंद्र सिंह, सुनील अवस्थी, शिक्षक राहुल सिंह, श्रीनिवास शास्त्री आदि मौजूद रहे।
यह मेरा गौरव नहीं, विद्या का गौरव : वेदमूर्ति
दो हजार वेदमंत्रों का दंडक्रम पारायण करने वाले वेदमूर्ति ने बताया कि दंडक्रम पारायण में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यांदिनी शाखा के दो हजार मंत्रों को कंठस्थ कर सुनाना होता है। दो हजार मंत्रों के दंडक्रम पारायण करने पर दो लाख से अधिक बार पारायण होगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करना जीवन का सौभाग्य है। अपनी उपलब्धि पर कहा कि यह मेरा गौरव नहीं, विद्या का गौरव है। युवाओं को संदेश दिया कि युवा जिस भी क्षेत्र में हों, निरंतरता के साथ उसी में मेहनत करते रहें।