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Ayodhya News: जिम्मेदारी पवित्र और महत्वपूर्ण, बेहतर करेंगे राम मंदिर की व्यवस्था
Thu, 03 Sep 2026 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 03 Sep 2026 11:49 PM IST
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अयोध्या। देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा के लिए युद्ध की रणनीतियां बनाने वाले एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र के सामने अब एक ऐसी जिम्मेदारी है, जहां चुनौती सुरक्षा के साथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सुविधा और विश्वास से जुड़ी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में बृहस्पतिवार को वह पहली बार अयोध्या पहुंचे। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ट्रस्ट के विशेष वाहन से उनका स्वागत हुआ। एयरपोर्ट से सीधे श्रीराम जन्मभूमि परिसर पहुंचे और रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। इसके बाद ट्रस्टियों के साथ बैठक कर मंदिर की व्यवस्थाओं को समझने की शुरुआत की।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें “अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र जिम्मेदारी” सौंपी गई है। अभी वह अयोध्या और मंदिर की व्यवस्थाओं को समझ रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों से संवाद, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ चर्चा और मौजूदा व्यवस्था के अध्ययन के बाद प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट की ओर से जो निर्देश और जिम्मेदारी दी जाएगी, उसी के अनुरूप व्यवस्थाओं को बेहतर करने का प्रयास होगा।
सवाल : मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी?
जवाब : अयोध्या और श्रीराम मंदिर मेरे लिए केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी का विषय नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मेरी अयोध्या की पहली यात्रा है, इसलिए फिलहाल मैं यहां की व्यवस्थाओं, मंदिर परिसर और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को समझ रहा हूं। मेरा पहला प्रयास होगा कि यहां की दिव्यता, भव्यता और श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु रहें। ट्रस्ट की ओर से जो दिशा-निर्देश और जिम्मेदारियां दी जाएंगी, उनके अनुरूप पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करूंगा।
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सवाल : मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर कैसे करेंगे?
जवाब : सबसे पहले मौजूदा व्यवस्थाओं को समझना और जमीन पर उनकी वास्तविक स्थिति को देखना जरूरी है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी लेने के साथ ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी लगातार संवाद किया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि मंदिर की भव्यता और गरिमा के अनुरूप हर व्यवस्था हो और देश-विदेश से आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु यहां से एक सुखद और आध्यात्मिक अनुभव लेकर जाए। जहां सुधार की आवश्यकता होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
सवाल : चढ़ावा चोरी के बाद डगमगाई व्यवस्था को कैसे सुधारेंगे?
जवाब : श्रीराम मंदिर में आने वाला प्रत्येक चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं से जुड़ा होता है। इसलिए उससे संबंधित व्यवस्था में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही बहुत महत्वपूर्ण है। अभी मैंने औपचारिक रूप से पूरी व्यवस्था को समझना शुरू किया है। सभी पहलुओं को देखने और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से चर्चा करने के बाद जो भी आवश्यक सुधार होंगे, उन्हें पूरी गंभीरता से लागू किया जाएगा। मेरा प्रयास रहेगा कि ऐसी व्यवस्थाएं मजबूत हों, जिनसे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक बढ़े और मंदिर की व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु रहें।
सवाल : श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर क्या योजना रहेगी?
जवाब : श्रीराम मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ गहरी आस्था और भाव लेकर आता है। इसलिए उसकी सुविधा और सम्मान हमारी प्राथमिक जिम्मेदारियों में होना चाहिए। पहले मौजूदा व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को समझेंगे। इसके बाद ट्रस्ट के साथ मिलकर यह तय किया जाएगा कि दर्शन, प्रवेश, निकास, प्रतीक्षा, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं में कहां और सुधार किया जा सकता है। हमारा प्रयास रहेगा कि श्रद्धालु यहां आए तो उसे व्यवस्था के साथ-साथ श्रीराम की नगरी की दिव्यता और आत्मीयता का भी अनुभव हो।
सवाल : राम मंदिर की भव्यता और दिव्यता को देखते हुए आपके लिए यह जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है?
जवाब : यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण और गौरव का दायित्व है। श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। अयोध्या की अपनी एक आध्यात्मिक पहचान है और मंदिर की भव्यता उस पहचान को और मजबूत करती है। मेरा प्रयास रहेगा कि यहां की व्यवस्थाएं भी उसी गरिमा, अनुशासन और श्रद्धा के अनुरूप हों। यह केवल एक मंदिर परिसर की व्यवस्था नहीं है, बल्कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी सेवा है।
सवाल : सीईओ के रूप में आपकी विस्तृत कार्ययोजना कब सामने आएगी?
जवाब : अभी मुझे औपचारिक रूप से पदभार संभालना है और सबसे पहले यहां की व्यवस्थाओं को समझना है। मेरा मानना है कि किसी भी बड़ी जिम्मेदारी में पहले व्यवस्था को समझना और फिर सुधार की दिशा तय करना जरूरी होता है। ट्रस्ट के साथ विचार-विमर्श और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है- श्रीराम मंदिर की दिव्यता और भव्यता के अनुरूप ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करना, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित, अनुशासित और संतोषजनक दर्शन का अनुभव मिले।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें “अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र जिम्मेदारी” सौंपी गई है। अभी वह अयोध्या और मंदिर की व्यवस्थाओं को समझ रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों से संवाद, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ चर्चा और मौजूदा व्यवस्था के अध्ययन के बाद प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट की ओर से जो निर्देश और जिम्मेदारी दी जाएगी, उसी के अनुरूप व्यवस्थाओं को बेहतर करने का प्रयास होगा।
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सवाल : मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी?
जवाब : अयोध्या और श्रीराम मंदिर मेरे लिए केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी का विषय नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मेरी अयोध्या की पहली यात्रा है, इसलिए फिलहाल मैं यहां की व्यवस्थाओं, मंदिर परिसर और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को समझ रहा हूं। मेरा पहला प्रयास होगा कि यहां की दिव्यता, भव्यता और श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु रहें। ट्रस्ट की ओर से जो दिशा-निर्देश और जिम्मेदारियां दी जाएंगी, उनके अनुरूप पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करूंगा।
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सवाल : मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर कैसे करेंगे?
जवाब : सबसे पहले मौजूदा व्यवस्थाओं को समझना और जमीन पर उनकी वास्तविक स्थिति को देखना जरूरी है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी लेने के साथ ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी लगातार संवाद किया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि मंदिर की भव्यता और गरिमा के अनुरूप हर व्यवस्था हो और देश-विदेश से आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु यहां से एक सुखद और आध्यात्मिक अनुभव लेकर जाए। जहां सुधार की आवश्यकता होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
सवाल : चढ़ावा चोरी के बाद डगमगाई व्यवस्था को कैसे सुधारेंगे?
जवाब : श्रीराम मंदिर में आने वाला प्रत्येक चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं से जुड़ा होता है। इसलिए उससे संबंधित व्यवस्था में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही बहुत महत्वपूर्ण है। अभी मैंने औपचारिक रूप से पूरी व्यवस्था को समझना शुरू किया है। सभी पहलुओं को देखने और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से चर्चा करने के बाद जो भी आवश्यक सुधार होंगे, उन्हें पूरी गंभीरता से लागू किया जाएगा। मेरा प्रयास रहेगा कि ऐसी व्यवस्थाएं मजबूत हों, जिनसे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक बढ़े और मंदिर की व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु रहें।
सवाल : श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर क्या योजना रहेगी?
जवाब : श्रीराम मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ गहरी आस्था और भाव लेकर आता है। इसलिए उसकी सुविधा और सम्मान हमारी प्राथमिक जिम्मेदारियों में होना चाहिए। पहले मौजूदा व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को समझेंगे। इसके बाद ट्रस्ट के साथ मिलकर यह तय किया जाएगा कि दर्शन, प्रवेश, निकास, प्रतीक्षा, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं में कहां और सुधार किया जा सकता है। हमारा प्रयास रहेगा कि श्रद्धालु यहां आए तो उसे व्यवस्था के साथ-साथ श्रीराम की नगरी की दिव्यता और आत्मीयता का भी अनुभव हो।
सवाल : राम मंदिर की भव्यता और दिव्यता को देखते हुए आपके लिए यह जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है?
जवाब : यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण और गौरव का दायित्व है। श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। अयोध्या की अपनी एक आध्यात्मिक पहचान है और मंदिर की भव्यता उस पहचान को और मजबूत करती है। मेरा प्रयास रहेगा कि यहां की व्यवस्थाएं भी उसी गरिमा, अनुशासन और श्रद्धा के अनुरूप हों। यह केवल एक मंदिर परिसर की व्यवस्था नहीं है, बल्कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी सेवा है।
सवाल : सीईओ के रूप में आपकी विस्तृत कार्ययोजना कब सामने आएगी?
जवाब : अभी मुझे औपचारिक रूप से पदभार संभालना है और सबसे पहले यहां की व्यवस्थाओं को समझना है। मेरा मानना है कि किसी भी बड़ी जिम्मेदारी में पहले व्यवस्था को समझना और फिर सुधार की दिशा तय करना जरूरी होता है। ट्रस्ट के साथ विचार-विमर्श और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है- श्रीराम मंदिर की दिव्यता और भव्यता के अनुरूप ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करना, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित, अनुशासित और संतोषजनक दर्शन का अनुभव मिले।