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Ayodhya News: 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों के कंधों पर दीपोत्सव की जिम्मेदारी
Tue, 27 Oct 2026 11:14 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:14 PM IST
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चौराहों व सड़क के किनारे झालर लगाते कर्मचारी।
अयोध्या। दीपोत्सव में लाखों दीपों को रोशन करने की जिम्मेदारी इस बार डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 10 हजार से अधिक शिक्षक-कर्मचारियों पर होगी। वहीं, 35 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं दीप-दूत बनकर घाटों पर दीप सजाएंगे। शिक्षक-कर्मचारी व्यवस्थाओं की निगरानी, दीपों की गिनती और स्वयंसेवकों के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने 56 घाटों पर जिम्मेदारियां बांटने के साथ निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था की है। हजारों स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों पर तैनात करना और निर्धारित समय में दीप सजवाना बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए विश्वविद्यालय ने स्वयंसेवकों का डिजिटल पंजीकरण कराया है। प्रत्येक स्वयंसेवक को घाटवार क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें टी-शर्ट और कैप भी उपलब्ध कराई गई हैं।
राम की पैड़ी समेत सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर चार बाई चार के ग्रिड के अनुसार मार्किंग कराई गई है। इसी के आधार पर निर्धारित स्थानों पर दीप सजाए जाएंगे, ताकि सात नवंबर को अंतिम चरण में उनमें तेल डालने और बाती लगाने का काम पूरा किया जा सके। प्रत्येक घाट पर दीपों की संख्या का भौतिक सत्यापन करने के लिए वरिष्ठ प्राध्यापकों की जिम्मेदारी तय की गई है।
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स्वयंसेवकों के आवागमन की होगी व्यवस्था
स्वयंसेवकों के आवागमन के लिए सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक व्यवस्था की गई है। प्रमुख केंद्रों पर भोजन और प्रत्येक घाट पर पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। दीप, बाती, तेल और कपूर के वितरण के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छता और त्वरित कार्रवाई दल जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे।
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में कुलसचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेंदु शुक्ल और दीपोत्सव के नोडल प्रभारी प्रो. एसएस मिश्र समेत विश्वविद्यालय की टीम तैयारियों की समीक्षा कर रही है।
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आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने 56 घाटों पर जिम्मेदारियां बांटने के साथ निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था की है। हजारों स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों पर तैनात करना और निर्धारित समय में दीप सजवाना बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए विश्वविद्यालय ने स्वयंसेवकों का डिजिटल पंजीकरण कराया है। प्रत्येक स्वयंसेवक को घाटवार क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें टी-शर्ट और कैप भी उपलब्ध कराई गई हैं।
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राम की पैड़ी समेत सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर चार बाई चार के ग्रिड के अनुसार मार्किंग कराई गई है। इसी के आधार पर निर्धारित स्थानों पर दीप सजाए जाएंगे, ताकि सात नवंबर को अंतिम चरण में उनमें तेल डालने और बाती लगाने का काम पूरा किया जा सके। प्रत्येक घाट पर दीपों की संख्या का भौतिक सत्यापन करने के लिए वरिष्ठ प्राध्यापकों की जिम्मेदारी तय की गई है।
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स्वयंसेवकों के आवागमन की होगी व्यवस्था
स्वयंसेवकों के आवागमन के लिए सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक व्यवस्था की गई है। प्रमुख केंद्रों पर भोजन और प्रत्येक घाट पर पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। दीप, बाती, तेल और कपूर के वितरण के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छता और त्वरित कार्रवाई दल जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे।
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में कुलसचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेंदु शुक्ल और दीपोत्सव के नोडल प्रभारी प्रो. एसएस मिश्र समेत विश्वविद्यालय की टीम तैयारियों की समीक्षा कर रही है।