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Ayodhya News: अब अप्रैल में पूरी होगी राम मंदिर की सुरक्षा दीवार
Tue, 27 Oct 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:41 PM IST
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अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही कंक्रीट की सुरक्षा दीवार का निर्माण अब दिसंबर तक पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। करीब 3400 मीटर लंबी इस दीवार के निर्माण में निजी जमीन, मकान और दुकानों से जुड़ी अड़चनें सामने आ रही हैं। ऐसे में परियोजना के अप्रैल तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, जमीन संबंधी विवादों का समाधान नहीं होने से अंतिम समयसीमा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए करीब 100 एकड़ क्षेत्र में 16 फीट ऊंची और 400 मिमी मोटी कंक्रीट की दीवार बनाई जा रही है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की कार्यदायी एजेंसी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) को दी गई है। परियोजना के तहत अब तक 1850 मीटर दीवार का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 700 मीटर हिस्से में काम चल रहा है। शेष 850 मीटर में निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध न होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
जमीन की अड़चन से अटका निर्माण :
ईआईएल के परियोजना प्रबंधक दुर्गेश कुमार ने बताया कि निर्माणाधीन 700 मीटर हिस्से को नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, बाकी हिस्से में दीवार बनाने के लिए जमीन मालिकों से सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए जमीन खरीदने और आपसी सहमति से भूमि का विनिमय करने जैसे विकल्पों पर विचार हो रहा है। निजी संपत्तियों के कारण प्रभावित हिस्से में निर्माण शुरू करने की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है। यही वजह है कि दिसंबर तक पूरी दीवार तैयार करने का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। जमीन का समाधान समय पर नहीं हुआ तो परियोजना को पूरा करने में अप्रैल तक का समय लग सकता है।
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स्थायी दीवार बनने तक फेंसिंग से सुरक्षा :
जिन स्थानों पर भूमि संबंधी अड़चनों के कारण कंक्रीट की दीवार नहीं बन पा रही है, वहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजबूत फेंसिंग लगाने का निर्णय लिया गया है। इन हिस्सों में पहले से लोहे की ग्रिल और कंटीले तार मौजूद हैं। इनके जरिये परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी है।
वॉच टावरों की संख्या 25 से घटाकर 21 की : सुरक्षा व्यवस्था के तहत परिसर में निगरानी के लिए वॉच टावर भी बनाए जा रहे हैं। पहले 25 टावर बनाने की योजना थी, लेकिन बाद में इनकी संख्या घटाकर 21 कर दी गई। इनमें से दो टावर नमूने के तौर पर तैयार किए जा चुके हैं। शेष टावरों का निर्माण दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। सुरक्षा दीवार और वॉच टावरों के साथ परिसर में आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी लगाए जाने हैं।
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रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए करीब 100 एकड़ क्षेत्र में 16 फीट ऊंची और 400 मिमी मोटी कंक्रीट की दीवार बनाई जा रही है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की कार्यदायी एजेंसी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) को दी गई है। परियोजना के तहत अब तक 1850 मीटर दीवार का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 700 मीटर हिस्से में काम चल रहा है। शेष 850 मीटर में निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध न होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
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जमीन की अड़चन से अटका निर्माण :
ईआईएल के परियोजना प्रबंधक दुर्गेश कुमार ने बताया कि निर्माणाधीन 700 मीटर हिस्से को नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, बाकी हिस्से में दीवार बनाने के लिए जमीन मालिकों से सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए जमीन खरीदने और आपसी सहमति से भूमि का विनिमय करने जैसे विकल्पों पर विचार हो रहा है। निजी संपत्तियों के कारण प्रभावित हिस्से में निर्माण शुरू करने की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है। यही वजह है कि दिसंबर तक पूरी दीवार तैयार करने का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। जमीन का समाधान समय पर नहीं हुआ तो परियोजना को पूरा करने में अप्रैल तक का समय लग सकता है।
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स्थायी दीवार बनने तक फेंसिंग से सुरक्षा :
जिन स्थानों पर भूमि संबंधी अड़चनों के कारण कंक्रीट की दीवार नहीं बन पा रही है, वहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजबूत फेंसिंग लगाने का निर्णय लिया गया है। इन हिस्सों में पहले से लोहे की ग्रिल और कंटीले तार मौजूद हैं। इनके जरिये परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी है।
वॉच टावरों की संख्या 25 से घटाकर 21 की : सुरक्षा व्यवस्था के तहत परिसर में निगरानी के लिए वॉच टावर भी बनाए जा रहे हैं। पहले 25 टावर बनाने की योजना थी, लेकिन बाद में इनकी संख्या घटाकर 21 कर दी गई। इनमें से दो टावर नमूने के तौर पर तैयार किए जा चुके हैं। शेष टावरों का निर्माण दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। सुरक्षा दीवार और वॉच टावरों के साथ परिसर में आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी लगाए जाने हैं।