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Ayodhya News: नगर भ्रमण करने निकले प्रभु, ''जय जगन्नाथ'' के जयघोष से गूंजी रामनगरी
Thu, 16 Jul 2026 10:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 16 Jul 2026 10:12 PM IST
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अयोध्या धाम स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा ट्रस्ट से भगवान जगन्नाथ जी के रथ यात्रा में
अयोध्या। रामनगरी बृहस्पतिवार शाम भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर नजर आई। शहर के विभिन्न मठ-मंदिरों से निकली भव्य रथयात्राओं ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सुसज्जित रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले तो श्रद्धालुओं की भीड़ उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। पूरे मार्ग में जय जगन्नाथ के उद्घोष, शंखनाद, नगाड़ों की गूंज और पुष्पवर्षा के बीच भक्तों ने रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य माना।
रामनगरी के करीब 10 मंदिरों से अलग-अलग समय पर रथयात्राएं निकाली गईं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, वैदिक मंत्रोच्चार और आकर्षक झांकियों से सजी यात्राओं ने शहर की धार्मिक छटा को और भव्य बना दिया। प्रमुख मार्गों से गुजरती रथयात्राओं के स्वागत में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक अस्वस्थ रहने के कारण भक्तों को दर्शन नहीं देते। उपचार अवधि पूर्ण होने के बाद वे भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए अयोध्या में भी भगवान की रथयात्रा निकाली गई।
रामहर्षण कुंज से निकली रथयात्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। सात घोड़ों की आकृति वाले भव्य रथ पर भगवान की सवारी निकाली गई। वहीं राम जन्मभूमि के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर से महंत राघवदास के निर्देशन में निकली शोभायात्रा में कलाकारों के सांस्कृतिक प्रदर्शन और भक्तों के संकीर्तन ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। शाम को यात्रा लौटने के बाद भगवान का स्नान, विशेष शृंगार, पूजन और भव्य झांकी सजाई गई। देर रात तक विभिन्न मंदिरों में भगवान जगन्नाथ के दर्शन, पूजन-अर्चन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का क्रम चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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इनसेट
दशरथ महल से निकली भव्य यात्रा
बड़ा स्थान दशरथ महल से शाम करीब पांच बजे महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य के सानिध्य में रथयात्रा शुरू हुई। यात्रा से पहले भगवान का विशेष शृंगार, पूजन और आरती की गई। इसके बाद भगवान को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि इस महोत्सव में भगवान अपने भक्तों के द्वार पहुंचते हैं और सभी पर समान रूप से कृपा बरसाते हैं। यह भगवान और भक्त के मिलन का महापर्व है।
इनसेट
राम कचहरी मंदिर से तीन रथों पर विराजे भगवान
राम जन्मभूमि परिसर से सटे राम कचहरी मंदिर में भी परंपरागत रथयात्रा निकाली गई। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई। महंत शशिकांत दास ने बताया कि यात्रा हनुमानगढ़ी, रानी बाजार, तपस्वी छावनी, रामघाट और हनुमान गुफा होते हुए सरयू तट पहुंची, जहां विधिवत मां सरयू का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद रथयात्रा पुनः मंदिर पहुंची।
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रामनगरी के करीब 10 मंदिरों से अलग-अलग समय पर रथयात्राएं निकाली गईं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, वैदिक मंत्रोच्चार और आकर्षक झांकियों से सजी यात्राओं ने शहर की धार्मिक छटा को और भव्य बना दिया। प्रमुख मार्गों से गुजरती रथयात्राओं के स्वागत में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक अस्वस्थ रहने के कारण भक्तों को दर्शन नहीं देते। उपचार अवधि पूर्ण होने के बाद वे भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए अयोध्या में भी भगवान की रथयात्रा निकाली गई।
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रामहर्षण कुंज से निकली रथयात्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। सात घोड़ों की आकृति वाले भव्य रथ पर भगवान की सवारी निकाली गई। वहीं राम जन्मभूमि के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर से महंत राघवदास के निर्देशन में निकली शोभायात्रा में कलाकारों के सांस्कृतिक प्रदर्शन और भक्तों के संकीर्तन ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। शाम को यात्रा लौटने के बाद भगवान का स्नान, विशेष शृंगार, पूजन और भव्य झांकी सजाई गई। देर रात तक विभिन्न मंदिरों में भगवान जगन्नाथ के दर्शन, पूजन-अर्चन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का क्रम चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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दशरथ महल से निकली भव्य यात्रा
बड़ा स्थान दशरथ महल से शाम करीब पांच बजे महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य के सानिध्य में रथयात्रा शुरू हुई। यात्रा से पहले भगवान का विशेष शृंगार, पूजन और आरती की गई। इसके बाद भगवान को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि इस महोत्सव में भगवान अपने भक्तों के द्वार पहुंचते हैं और सभी पर समान रूप से कृपा बरसाते हैं। यह भगवान और भक्त के मिलन का महापर्व है।
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राम कचहरी मंदिर से तीन रथों पर विराजे भगवान
राम जन्मभूमि परिसर से सटे राम कचहरी मंदिर में भी परंपरागत रथयात्रा निकाली गई। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई। महंत शशिकांत दास ने बताया कि यात्रा हनुमानगढ़ी, रानी बाजार, तपस्वी छावनी, रामघाट और हनुमान गुफा होते हुए सरयू तट पहुंची, जहां विधिवत मां सरयू का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद रथयात्रा पुनः मंदिर पहुंची।