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Ayodhya News: विकास की चमक के नीचे दबी चीखें, पीढ़ियों से बसे परिवार सड़क पर

Wed, 21 Jan 2026 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Wed, 21 Jan 2026 11:15 PM IST
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The cries of development are buried beneath the glow of development, families settled for generations are on the streets
55- ध्वस्तीकरण के बाद चौक सब्जी मंडी में मलबे के ढेर पर बैठी महिलाएं - संवाद
अयोध्या। चौक सब्जी मंडी क्षेत्र में की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं। मंगलवार को हुई कार्रवाई के अगले दिन जब मौके पर पहुंची टीम ने हालात देखे, तो जहां एक ओर मलबे के ढेर थे, वहीं दूसरी ओर उजड़े परिवारों की बेबसी और आक्रोश साफ नजर आया। प्रभावितों का आरोप है कि उन्हें बिना पूर्व सूचना दिए घर गिरा दिए गए।
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वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि सरकारी अभिलेखों में सार्वजनिक उपयोग की बताई गई है और पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाने की सूचना दी जा चुकी थी। प्रशासन का दावा है कि पात्र परिवारों को शासन की पुनर्वास योजनाओं के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
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हालांकि, मलबे पर बैठी महिलाएं और बच्चे यह सवाल कर रहे हैं कि यदि वे वर्षों से वहीं रह रहे थे, तो अचानक उनका आशियाना कैसे अवैध घोषित कर दिया गया। फिलहाल, उजड़े परिवार खुले आसमान के नीचे अपनी टूटी हुई जिंदगी को फिर से समेटने की कोशिश में जुटे हैं।
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प्रभावित महिला रुबीना ने कहा कि कार्रवाई के समय वह घर में खाना बना रही थीं। न कोई नोटिस मिला, न सामान निकालने का मौका। अचानक बुलडोजर आ गया। विरोध करने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। रुबीना ने कहा कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से इसी स्थान पर रह रहा था और उनके पुरखों की कब्रें भी यहीं मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्हें शहर से दूर आवास दिया गया, तो दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग रोज आने-जाने और किराये का खर्च कैसे उठा पाएंगे।
रहनुमा ने बताया कि उनके घर की एक बेटी की शादी तय थी, लेकिन मकान टूटने के बाद लड़के वालों ने रिश्ता तोड़ दिया। ठंड के मौसम में बेटियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजन गहरी चिंता में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले हुई कार्रवाई में भी कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। एक परिवार ने बताया कि उस समय सदमे के कारण एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ गई थी, जिससे गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। प्रवीन ने बताया कि पिछली कार्रवाई में उजड़ा घर और सामान अभी ठीक से संभल भी नहीं पाया था कि इस बार की कार्रवाई ने बचा-कुचा सामान भी नष्ट कर दिया।

प्रभावितों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें उसी क्षेत्र के आसपास वैकल्पिक भूमि या आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका रोजगार और आजीविका प्रभावित न हो।
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