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Ayodhya News: चार जिलों में स्थापित होंगे अत्याधुनिक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन

Thu, 03 Jul 2025 09:16 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jul 2025 09:16 PM IST
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State-of-the-art air quality monitoring stations will be set up in four districts
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग की 44.80 लाख रुपये की अब तक की सबसे बड़ी अनुसंधान परियोजना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वीकृत हुई है। अब विश्वविद्यालय का पर्यावरण विज्ञान विभाग गोंडा, बहराइच, अंबेडकर नगर और श्रावस्ती में भी वायु गुणवत्ता निगरानी का काम करेगा। परियोजना के तहत इन जिलों में दो-दो अत्याधुनिक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
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इन जिलों में स्थापित किए जाने वाले अत्याधुनिक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन निरंतर पीएम 10, पीएम 2.5, सल्फर ऑक्साइड्स और नाइट्रोजन ऑक्साइड्स जैसे प्रमुख प्रदूषकों की निगरानी करेंगे। ये सभी प्रदूषक मानवीय स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक माने जाते हैं।
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इस महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व पर्यावरण विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनोद चौधरी कर रहे हैं। इस परियोजना की वार्षिक लागत 44.80 लाख रुपये है। यह नियमित चलने वाली परियोजना है, जो विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता और पर्यावरणीय विषयों में उसकी गंभीरता को दर्शाती है।
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पर्यावरण विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनोद चौधरी ने बताया कि विभाग वर्ष 2021 से अयोध्या में वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है। उस अनुभव और आधारभूत संरचना को ध्यान में रखते हुए अब यह कार्यक्षेत्र चार अन्य जिलों में विस्तार पा रहा है। यह परियोजना क्षेत्रीय प्रदूषण की सही स्थिति जानने और नीतिगत निर्णयों में वैज्ञानिक सहयोग देने में सहायक सिद्ध होगी।

यह परियोजना ऐसे समय में स्वीकृत हुई है, जब वायु प्रदूषण भारत में, विशेषकर गंगा के मैदानी क्षेत्रों में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। इन चार जिलों में निरंतर और वैज्ञानिक आधार पर वायु गुणवत्ता की निगरानी से न केवल नीति निर्धारण में सहयोग मिलेगा, बल्कि आम जनता को भी जागरूक किया जा सकेगा।


छात्रों व शोधकर्ताओं को मिलेंगे व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुसंधान के नए अवसर

इस परियोजना से विश्वविद्यालय के छात्रों और शोधकर्ताओं को भी व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुसंधान के नए अवसर मिलेंगे। निगरानी, डाटा विश्लेषण, रिपोर्ट निर्माण जैसे कार्यों में प्रत्यक्ष भागीदारी से छात्रों की वैज्ञानिक समझ और तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने डॉ. चौधरी और पर्यावरण विज्ञान विभाग को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना विश्वविद्यालय के सतत विकास और सामाजिक सरोकार से जुड़े अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


यह परियोजना न केवल पर्यावरणीय आंकड़ों के संग्रहण में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, बल्कि विश्वविद्यालय को क्षेत्रीय पर्यावरणीय अनुसंधान के एक अग्रणी केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगी।
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