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Ayodhya News: निजी प्रैक्टिस पर शासन सख्त, डॉक्टर भर रहे शपथ-पत्र
Sat, 15 Feb 2025 08:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 15 Feb 2025 08:47 PM IST
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अयोध्या। सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों के निजी प्रैक्टिस को लेकर शासन ने सख्ती की है। सभी सरकारी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में तैनात चिकित्सकों से निजी प्रैक्टिस न करने का शपथ-पत्र मांगा गया है। सभी चिकित्सकों को 20 फरवरी तक इसे जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
मेडिकल कॉलेज में नियमित तौर से 62 व संविदा पर लगभग 18 संकाय सदस्य तैनात हैं। जबकि जिला अस्पताल में 26, महिला अस्पताल में आठ व सीएमओ के अधीन 123 सरकारी चिकित्सक तैनात हैं। इनमें अधिकांश चिकित्सकों के निजी प्रैक्टिस करने की सूचनाएं मिलती हैं। कई चिकित्सक तो अस्पताल के बाहर बाकायदा बोर्ड लगाकर खुलेआम प्रैक्टिस करते हैं। कुछ ने आवासों को निजी क्लीनिक बनाई है तो कुछ निजी अस्पतालों में जाकर प्रैक्टिस भी करते हैं। अब हाईकोर्ट के दखल के बाद शासन ने इसे गंभीरता से संज्ञान लिया है।
बीते दिनों प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने निजी प्रैक्टिस न करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके लिए संबंधित चिकित्सकों से शपथ-पत्र मांगा है। निजी प्रैक्टिस करते पकड़े जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसके अनुपालन में सभी अस्पतालों में डॉक्टर शपथ-पत्र भरने में जुटे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि बैठक करके सभी संकाय सदस्यों से शपथ-पत्र मांगा गया था। अब तक 37 संकायों ने शपथ-पत्र दे दिया है। संविदा चिकित्सकों से उनके निजी प्रैक्टिस के कार्यस्थल का विवरण मांगा गया है। वहीं महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि सभी आठ चिकित्सकों ने शपथ-पत्र उपलब्ध कराया है। सीएमओ डॉ. पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि सभी सीएचसी-पीएचसी अधीक्षकों को निर्धारित समय सीमा में शपथ-पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निजी प्रैक्टिस को लेकर मेडिकल कॉलेज में उड़ाका दल बनेगा। इसमें नॉन क्लीनिकल तीन चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा, जो सूचनाओं के आधार पर संबंधित क्षेत्राें में जाकर निजी प्रैक्टिस की पड़ताल करेंगे। प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि इसे लेकर सोमवार को चिकित्सकों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में उड़ाका दल गठित किया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में नियमित तौर से 62 व संविदा पर लगभग 18 संकाय सदस्य तैनात हैं। जबकि जिला अस्पताल में 26, महिला अस्पताल में आठ व सीएमओ के अधीन 123 सरकारी चिकित्सक तैनात हैं। इनमें अधिकांश चिकित्सकों के निजी प्रैक्टिस करने की सूचनाएं मिलती हैं। कई चिकित्सक तो अस्पताल के बाहर बाकायदा बोर्ड लगाकर खुलेआम प्रैक्टिस करते हैं। कुछ ने आवासों को निजी क्लीनिक बनाई है तो कुछ निजी अस्पतालों में जाकर प्रैक्टिस भी करते हैं। अब हाईकोर्ट के दखल के बाद शासन ने इसे गंभीरता से संज्ञान लिया है।
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बीते दिनों प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने निजी प्रैक्टिस न करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके लिए संबंधित चिकित्सकों से शपथ-पत्र मांगा है। निजी प्रैक्टिस करते पकड़े जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसके अनुपालन में सभी अस्पतालों में डॉक्टर शपथ-पत्र भरने में जुटे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि बैठक करके सभी संकाय सदस्यों से शपथ-पत्र मांगा गया था। अब तक 37 संकायों ने शपथ-पत्र दे दिया है। संविदा चिकित्सकों से उनके निजी प्रैक्टिस के कार्यस्थल का विवरण मांगा गया है। वहीं महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि सभी आठ चिकित्सकों ने शपथ-पत्र उपलब्ध कराया है। सीएमओ डॉ. पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि सभी सीएचसी-पीएचसी अधीक्षकों को निर्धारित समय सीमा में शपथ-पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निजी प्रैक्टिस को लेकर मेडिकल कॉलेज में उड़ाका दल बनेगा। इसमें नॉन क्लीनिकल तीन चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा, जो सूचनाओं के आधार पर संबंधित क्षेत्राें में जाकर निजी प्रैक्टिस की पड़ताल करेंगे। प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि इसे लेकर सोमवार को चिकित्सकों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में उड़ाका दल गठित किया जाएगा।