राम मंदिर: अयोध्या में आज फिर हो सकती SIT की एंट्री, आरोप लगाने वालों से होगी पूछताछ; इनके भी दर्ज होंगे बयान
दानराशि और चढ़ावा प्रबंधन को लेकर चल रही जांच में आरोप लगाने वाले पक्षों से बयान और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। ट्रस्ट की आय-व्यय और संपत्तियों की जानकारी फिलहाल जांच पूरी होने तक सार्वजनिक नहीं की जाएगी। संतों ने जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए अंतिम रिपोर्ट आने तक धैर्य रखने की अपील की है।
विस्तार
राम मंदिर की दानराशि और चढ़ावा प्रबंधन को लेकर सामने आए विवाद की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) बृृहस्पतिवार को अयोध्या पहुंचकर आरोप लगाने वाले पक्षों से पूछताछ शुरू कर सकती है। सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को बृहस्पतिवार को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है।
जानकारी के अनुसार एसआईटी उन सभी व्यक्तियों और संगठनों के प्रतिनिधियों के बयान दर्ज करने की तैयारी में है जिन्होंने सार्वजनिक रूप से राम मंदिर की दानराशि, चढ़ावे की गिनती और वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं। जांच टीम आरोपों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज, साक्ष्य और अन्य जानकारियां भी एकत्र करेगी।
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी पहले चरण में आरोप लगाने वाले पक्षों से तथ्य जुटाएगी। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट, संबंधित कर्मचारियों तथा व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों से पूछताछ कर आरोपों का सत्यापन करेगी। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
दिनभर रही टीम के पहुंचने की चर्चा
बुधवार को अयोध्या में पूरे दिन इस बात की चर्चा रही कि एसआईटी किसी भी समय पहुंच सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न पक्षों के प्रतिनिधियों ने भी संभावित पूछताछ को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि जांच के इस चरण में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में प्राप्त तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की जांच की दिशा तय की जाएगी। यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री मिलती है तो संबंधित व्यक्तियों से विस्तृत पूछताछ और रिकॉर्ड के मिलान की कार्रवाई भी की जा सकती है।
जांच पूरी होने दीजिए, सच खुद बोल उठेगा
राम मंदिर की दानराशि प्रबंधन को लेकर चल रही एसआईटी जांच के बीच राम जन्मभूमि परिसर स्थित शेषावतार मंदिर में आयोजित ध्वजारोहण समारोह ने एक अलग संदेश दिया। समारोह में शामिल संतों ने जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
मंगलवार को शेषावतार मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धर्मध्वज स्थापित किया गया। इस अवसर पर रामनगरी के अनेक प्रमुख संत-महंत मौजूद रहे। समारोह में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा तथा गोपाल राव सहित ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारी भी उपस्थित रहे और व्यवस्थाओं का संचालन करते दिखाई दिए।
ध्वजारोहण समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में अनेक तरह की बातें सामने आ रही हैं, लेकिन जांच एजेंसियां अपना कार्य कर रही हैं। ऐसे में बिना पूरी जांच के किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि सत्य को सामने आने में समय लग सकता है, लेकिन वह कभी छिप नहीं सकता। जांच पूरी होने दीजिए सच खुद बोल उठेगा।
श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि एसआईटी अपनी जांच कर रही है और शासन को रिपोर्ट भी सौंप दी गई है। अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। उन्होंने लोगों से अफवाहों और अटकलों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए। महंत गिरीश दास ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और उससे जुड़े किसी भी विषय पर तथ्यों के आधार पर ही राय बनाई जानी चाहिए।
रामलला चढ़ावा प्रकरण की आंच विहिप तक पहुंची
रामलला मंदिर के चढ़ावे और दानराशि से जुड़े गड़बड़ी के मामले की गूंज अब विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की शीर्ष बैठकों तक पहुंच गई है। इसके चलते ही अयोध्या में 25 से 29 जून तक प्रस्तावित विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति और प्रन्यासी मंडल की पांच दिवसीय बैठक को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में रामलला मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये के कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना थी। माना जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर कुछ संतों और पदाधिकारियों की ओर से तीखे सवाल उठाए जा सकते थे, जिससे बैठक में हंगामे की स्थिति भी बन सकती थी। विहिप की ओर से बैठक स्थगित किए जाने के पीछे अपरिहार्य कारण बताए गए हैं। संगठन ने संकेत दिया है कि बैठक की नई तिथि और स्थान को लेकर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच, हरिद्वार में हाल ही में आयोजित विहिप के मार्गदर्शक मंडल और उच्चाधिकार समिति की बैठक में भी रामलला चढ़ावा प्रकरण प्रमुख मुद्दा बना रहा। बैठक में शामिल कई संतों ने कहा था कि रामलला के नाम पर प्राप्त दानराशि का एक-एक पैसा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और उसकी पूरी जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई थी।
उधर, रामलला चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी की गतिविधियों पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि जांच की दिशा और निष्कर्ष आने वाले दिनों में राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं और ट्रस्टों की कार्यप्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।