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राम मंदिर: बेनकाब हुए चढ़ावा चोरी के आरोपी, आठ लोगों के FIR में नाम; इन बड़े चेहरों को बचाने की चर्चा

Thu, 25 Jun 2026 09:52 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 25 Jun 2026 09:52 PM IST
सार

राम मंदिर के चढ़ावे और दान प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज प्राथमिकी के बाद जांच तेज हो गई है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू हुई है। वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अंतिम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

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Ram Mandir: Identities of those behind the offering theft revealed; staff responsible for counting and jewelry
राम मंदिर प्रकरण। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गुरुवार को FIR दर्ज करा दी। इसमें ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर समेत 8 आरोपी बनाए गए हैं। ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने SIT की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया है। 

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FIR दर्ज होने के बाद आरोपी टिन्नू, लवकुश और अनुकल्प को हिरासत में लिया गया है। वहीं, एफआईआर की आंच किसी बड़े तक नहीं पहुंची। ट्रस्ट के बड़े नाम चंपत राय और अनिल मिश्रा व निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव का केस में कहीं कोई जिक्र नहीं है। 
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अज्ञात लोगों को शामिल किए जाने से जांच का दायरा और बढ़ गया है। अभी जांच में और कई लोग निशाने पर आ सकते हैं। एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है वह सभी गणना व गहने के रखरखाव के कार्य से जुड़े रहे हैं। 
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कानून के जानकारों का कहना है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद तत्काल प्रभाव से आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकेगी। फैजाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री गिरीश चंद्र तिवारी का कहना है कि जिन धाराओं में ट्रस्ट में प्राथमिकी दर्ज कराई है उनमें आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी होगी।

ट्रस्ट ने बड़ा संदेश देने का प्रयास किया

ट्रस्ट ने एफआईआर दर्ज कराकर बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। यह मामला छह जून को पहली बार प्रकाश में आया था। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। 20वें दिन राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के कदम को मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में जिम्मेदार व्यक्तियों, वित्तीय प्रक्रियाओं और कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। 

रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में वित्तीय लेनदेन और चढ़ावा व्यवस्था से जुड़े बिंदुओं पर सवाल उठे थे। इसके बाद ट्रस्ट ने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेते हुए एफआईआर दर्ज कराई। 

इससे यह संदेश गया है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच से कोई परहेज नहीं किया जाएगा। मामला सामने आने के बाद पिछले कई दिनों से अयोध्या में चर्चाओं और अटकलों का दौर जारी था। विपक्षी दलों, संत समाज और विभिन्न संगठनों की ओर से भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। ऐसे माहौल में एफआईआर दर्ज होने को जांच प्रक्रिया को महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

 

अयोध्यावासी बोले- अब सच्चाई सामने आने का रास्ता खुला

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद अयोध्या के विभिन्न वर्गों ने इस कदम का स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान राम के मंदिर से जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। महंत विवेक आचारी ने कहा कि एफआईआर राम मंदिर ट्रस्ट को पहले ही करा देना चाहिए था।

जांच आगे बढ़ने और एफआईआर दर्ज होने से सच्चाई सामने आने का रास्ता खुला है। महंत डॉ़ देवेशाचार्य ने उम्मीद जताई कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पूरे प्रकरण से पर्दा उठेगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, जबकि निर्दोष लोगों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। व्यापारी पंकज गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट ने सही निर्णय लिया है। जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए, ताकि पूरी दुनिया को एक संदेश जाए।
 

एसआईटी जांच की दिनवार कार्यवाही

  • 15 जून- महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जानकारी ली गई। आठ से 10 कर्मचारियों से करीब छह घंटे पूछताछ की गई।
  • 16 जून- चंपत राय और गोपाल राव से लगभग चार-चार घंटे तक सवाल-जवाब हुए। ट्रस्ट के 11 महीने के दस्तावेज खंगाले गए। चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों से लंबी पूछताछ की गई।
  • 17 जून- बैंक अधिकारियों और नोट गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ। बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच-पड़ताल की गई।
  • 18 जून- एसआईटी टीम करीब 10 घंटे मंदिर परिसर में मौजूद रही। डॉ. अनिल मिश्रा से चार घंटे तक पूछताछ की गई। टिन्नू यादव से डेढ़ घंटे तक सवाल-जवाब हुए। दोनों के बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया गया।
  • 19 जून- चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ। भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक और कैशियर से भी जानकारी ली गई।
  • 20 जून- आरोपियों और संदिग्धों के बैंक खातों का विवरण जुटाया गया। दस्तावेजी एवं वित्तीय साक्ष्य एकत्र किए गए। जांच पूरी कर एसआईटी सबूतों के साथ लखनऊ रवाना हो गई।
  • 23 जून- एसआईटी ने 20 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी।

 

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