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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: विहिप को साख की चिंता, चंपत राय पर बढ़ा दबाव; ट्रस्टियों से मांगा गया त्यागपत्र

Thu, 25 Jun 2026 07:45 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Bhupendra Singh Updated Thu, 25 Jun 2026 07:45 PM IST
सार

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में विहिप को अपनी साख की चिंता है। मामले में चंपत राय पर दबाव बढ़ रहा। ट्रस्ट के साथ विहिप की बंद कमरे में हुई बैठक से अटकलें तेज हो गई हैं। एसआईटी जांच के बीच भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Ram Mandir donation controversy VHP concerned about reputation pressure mounts on Champat Rai
राम मंदिर चढ़ावा विवाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा और दानराशि प्रबंधन को लेकर उठे विवाद तथा एसआईटी जांच के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की सक्रियता बढ़ गई है। इसी बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विहिप के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच बृहस्पतिवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने नए राजनीतिक और सांगठनिक कयासों को जन्म दे दिया है। संगठन के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि विवाद लंबा खिंचता है तो मंदिर आंदोलन और विहिप की साख बचाने के लिए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
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सूत्रों के अनुसार, बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल राव, समेत विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे तथा केंद्रीय सह-संगठन महामंत्री विनायक राव सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन चढ़ावा विवाद, एसआईटी जांच और उससे उपजे हालात को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है। 
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राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस समय दान और चढ़ावा प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के केंद्र में हैं। ऐसे समय में विहिप के शीर्ष नेतृत्व और ट्रस्ट के बीच हुई बैठक को सामान्य औपचारिक बैठक मानने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जांच से उत्पन्न परिस्थितियों और उसके संभावित प्रभावों पर गंभीर मंथन हुआ है।
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विहिप सीधे नहीं हटा सकती, लेकिन प्रभाव रखती है

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कानूनी रूप से एक स्वतंत्र संस्था है। इसलिए विहिप के पास महासचिव को सीधे हटाने का अधिकार नहीं है। लेकिन चंपत राय विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष होने के साथ सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरों में रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका अहम रही है। ऐसे में संगठन यदि महसूस करता है कि विवाद से उसकी छवि प्रभावित हो रही है तो वह नैतिक आधार पर बदलाव की सलाह दे सकता है। विहिप उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद से मुक्त करने का दबाव बना सकती है। जांच के निष्कर्षों से पहले ही डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर विचार किया जाना स्वाभाविक माना जा रहा है।

एसआईटी की जांच रिपोर्ट और एफआईआर का इंतजार

सोशल मीडिया पर राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी चर्चा में हैं। लोग उन पर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। इनमें महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण कार्यों में सक्रिय रहे गोपाल राव सर्वाधिक निशाने पर हैं। इसके अलावा चंपत राय के करीबी टिन्नू का नाम भी हर किसी की जुबान पर है। चर्चा अब चाक-चौराहों से लेकर घर-घर तक पहुंच गई है। वहीं, एसआईटी की रिपोर्ट और आरोपियों पर एफआईआर का हर किसी को बेसब्री से इंतजार है लेकिन अब तक मामले में पुलिस को तहरीर नहीं मिली है। सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि अब तक उनके संज्ञान में तहरीर मिलने जैसी बात सामने नहीं आई है।

राम मंदिर ट्रस्टियों से हिंदू महासभा ने मांगा त्यागपत्र, जांच की मांग

हिंदू महासभा ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी ट्रस्टियों से नैतिक आधार पर त्यागपत्र मांगा है। महासभा ने राम मंदिर में हुई कथित चोरी, गबन और भूमि खरीद में हेराफेरी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडेय ने ट्रस्टियों को पत्र लिखकर यह मांग की। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से पूरा हिंदू समाज आहत है। ट्रस्टियों का इस मुद्दे पर मौन रहना अपराध को बढ़ावा दे रहा है। पांडेय ने अपने पत्र में गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण और नारद पुराण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर में दान की गई वस्तु की चोरी साधारण नहीं, बल्कि देवद्रव्य का हरण और महापाप है। पत्र में चेतावनी दी गई कि यदि ट्रस्टी त्यागपत्र नहीं देते, तो हिंदू समाज में गलत संदेश जाएगा। इससे समस्त हिंदू समाज के विश्वास को गहरी ठेस पहुंचेगी। पांडेय ने जोर दिया कि अपराधी का साथ देने वाला भी अपराधी होता है।
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