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Ayodhya News: बेटियों के सपनों के लिए धूप में तप रहीं राजकुमारी

Mon, 11 May 2026 10:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 11 May 2026 10:11 PM IST
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Rajkumari is toiling under the scorching sun for the sake of her daughters' dreams
तपती धूप में नया घाट बाईपास के किनारे फल व सब्जी बेचतीं राजकुमारी।
अयोध्या। नयाघाट बाईपास किनारे फल बेचकर राजकुमारी अपने पांच बच्चों को पढ़ा रही हैं। उनके पति मजदूरी करते हैं, जबकि वह ककड़ी, खीरा और तरबूज बेचकर परिवार का गुजारा चलाती हैं। सीमित आय के बावजूद वह बच्चों की शिक्षा में कोई बाधा नहीं आने देना चाहतीं। राजकुमारी को उम्मीद है कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर परिवार का नाम रोशन करेंगे। राजकुमारी की तीन बेटियां और दो बेटे हैं, जिनमें से दो बेटियां निजी स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ती हैं। छोटी बेटी कक्षा चार में सरकारी स्कूल में है, जबकि दोनों बेटे भी पढ़ाई कर रहे हैं। वह पहले बेटियों को बस से स्कूल भेजती थीं, लेकिन खर्च बढ़ने पर बेटियों ने साइकिल की मांग की, जिससे खर्च कम हो सके।
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राजकुमारी सड़क किनारे ककड़ी 40 रुपये किलो, खीरा 25 रुपये और देसी खीरा 30 रुपये किलो बेचती हैं। इसके अलावा काला तरबूज 25 रुपये किलो और सरस्वती तरबूज 30 रुपये किलो में बेच रही है। वह देसी खरबूज 100 रुपये में चार किलो तक बेचती हैं, जो बाहर से आने वाले लोगों में काफी लोकप्रिय है। राजकुमारी लौकी और तरोई भी बेचती हैं।
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राजकुमारी ने बताया कि सरयू नदी के किनारे इन फलों की खेती होती हैं। कई बार बाढ़ आने पर उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद वह हर साल नई उम्मीद के साथ दोबारा खेती शुरू करती हैं। इस बार फसल अच्छी हुई है। वह तरबूज और खरबूज के बीज भी 250 से 300 रुपये किलो तक बेचती हैं, जिनके दाम मंडी के खुले रेट के हिसाब से घटते-बढ़ते रहते हैं।
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राजकुमारी और उनके पति फलों के सीजन में सुबह से ही मेहनत में जुट जाते हैं। वे घर से सामान लादकर बाईपास तक पहुंचाते हैं और देर शाम तक दुकान संभालते हैं। इस समय उनकी रोजाना करीब 1500 से 2000 रुपये तक की बिक्री हो जाती है। हालांकि, परिवार बड़ा होने और बच्चों की पढ़ाई निजी स्कूल में होने के कारण खर्च आसानी से नहीं निकल पाता। राजकुमारी बताती हैं कि कई प्रयासों के बाद भी उन्हें सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है। उनका परिवार आज भी संघर्ष के बीच जीवन गुजार रहा है।


इनसेट-
नयाघाट बाईपास के किनारे राजकुमारी जैसी करीब दस अन्य महिलाएं भी रोजाना दुकान लगाकर अपने परिवार का गुजारा कर रही हैं। इन्हीं में से एक चंद्रावती बताती हैं कि सीजन अच्छा रहने पर उनकी रोजाना 1000 से 1500 रुपये तक की कमाई हो जाती है। कई कारोबारी सीधे खेतों से भी फल खरीदकर ले जाते हैं। इन महिलाओं का कहना है कि यदि मौसम साथ दे और कोई प्राकृतिक आपदा न आए, तो इसी कमाई से किसी तरह परिवार की जिंदगी पटरी पर चलती रहती है।
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