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Ayodhya News: अब गर्भवती महिलाओं की छह बार होगी प्रसव पूर्व जांच
Thu, 14 May 2026 09:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 14 May 2026 09:34 PM IST
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सतीश पाठक
अयोध्या। सरकार ने मातृ व नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सभी गर्भवती महिलाओं की कम से कम छह प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें लापरवाही करने पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को भेजे पत्र में कहा कि गर्भावस्था के दौरान गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच मातृ व शिशु सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब तक गर्भवती महिला के लिए कम से कम चार एएनसी जांचों का प्रावधान था, लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और जोखिम कम करने के उद्देश्य से इसे बढ़ाकर छह कर दिया गया है।
उन्होंने गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही महिला का पंजीकरण कराने और प्रथम तिमाही में रजिस्ट्रेशन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण के समय मातृ-शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल से संबंधित सभी जांचों का विवरण दर्ज होगा। विभाग ने एएनसी जांच की समयसीमा भी तय की है। पहली जांच 12 सप्ताह तक, दूसरी 16 से 20 सप्ताह, तीसरी 24 से 28 सप्ताह, चौथी 28 से 32 सप्ताह, पांचवीं 32 से 36 सप्ताह और छठी 36 से 40 सप्ताह के बीच कराई जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस पर दूसरी या तीसरी तिमाही में कम से कम एक बार जांच कराना भी अनिवार्य रहेगा।
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लापरवाही पर प्रतिकूल प्रविष्टि की चेतावनी
मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन गर्भवती महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि 31 जुलाई से पूर्व है, उनकी सभी छह एएनसी जांचें प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाएं। इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि अंकित करने की चेतावनी भी दी गई है। सीएमओ डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए मातहतों को निर्देश दिए हैं।
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अयोध्या। सरकार ने मातृ व नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सभी गर्भवती महिलाओं की कम से कम छह प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें लापरवाही करने पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को भेजे पत्र में कहा कि गर्भावस्था के दौरान गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच मातृ व शिशु सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब तक गर्भवती महिला के लिए कम से कम चार एएनसी जांचों का प्रावधान था, लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और जोखिम कम करने के उद्देश्य से इसे बढ़ाकर छह कर दिया गया है।
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उन्होंने गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही महिला का पंजीकरण कराने और प्रथम तिमाही में रजिस्ट्रेशन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण के समय मातृ-शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल से संबंधित सभी जांचों का विवरण दर्ज होगा। विभाग ने एएनसी जांच की समयसीमा भी तय की है। पहली जांच 12 सप्ताह तक, दूसरी 16 से 20 सप्ताह, तीसरी 24 से 28 सप्ताह, चौथी 28 से 32 सप्ताह, पांचवीं 32 से 36 सप्ताह और छठी 36 से 40 सप्ताह के बीच कराई जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस पर दूसरी या तीसरी तिमाही में कम से कम एक बार जांच कराना भी अनिवार्य रहेगा।
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लापरवाही पर प्रतिकूल प्रविष्टि की चेतावनी
मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन गर्भवती महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि 31 जुलाई से पूर्व है, उनकी सभी छह एएनसी जांचें प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाएं। इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि अंकित करने की चेतावनी भी दी गई है। सीएमओ डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए मातहतों को निर्देश दिए हैं।