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Ayodhya News: अभय सिंह की एंट्री से भाजपा के भीतर सियासी समीकरण बदले
Thu, 15 Oct 2026 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:19 PM IST
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अयोध्या।
गोसाईंगंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अभय सिंह के भाजपा में शामिल होने से नए समीकरण बनने लगे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम भाजपा के भीतर नेतृत्व, स्थानीय प्रभाव और टिकट की दावेदारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जिस सीट पर अभय सिंह और इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी कभी एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे, वहां अब दोनों नेताओं की नई भूमिका पर नजर रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल है कि भाजपा गोसाईगंज में पुराने राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देगी या नए घटनाक्रम के बाद रणनीति में बदलाव करेगी। अभय सिंह की पार्टी में एंट्री के बाद खब्बू तिवारी की भूमिका क्या होगी और टिकट की दावेदारी में किस तरह का संतुलन बनेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
दो चुनाव, दो नतीजे और बदलती सियासी जमीन
गोसाईगंज के पिछले दो विधानसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां मुकाबले की तस्वीर बदलती रही है। वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर उतरे खब्बू तिवारी ने अभय सिंह को 11,620 मतों से हराया था। तब भाजपा के लिए यह जीत स्थानीय राजनीतिक प्रभाव और चुनावी संगठन के लिहाज से अहम थी। हालांकि, 2022 में तस्वीर बदल गई। सपा प्रत्याशी अभय सिंह को 1,05,863 वोट मिले, जबकि भाजपा की आरती तिवारी को 92,784 वोट मिले। अभय सिंह ने 13,079 मतों से जीत दर्ज की। यह नतीजा बताता है कि पिछले चुनाव की जीत अगले चुनाव में बढ़त की गारंटी नहीं है।
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क्रॉस वोटिंग से भाजपा तक
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले अभय सिंह को बाद में समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी लंबे समय से लगाई जा रही थीं। अब पार्टी में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पार्टी में शामिल होना और विधानसभा चुनाव का टिकट मिलना अलग-अलग बातें हैं। अभय सिंह को क्या जिम्मेदारी मिलती है, खब्बू तिवारी को संगठन में किस तरह समायोजित किया जाता है और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल कैसे बनता है, यह भाजपा के आगामी फैसलों से तय होगा।
टिकट की दावेदारी में स्थानीय नेतृत्व अहम
गोसाईगंज में भाजपा के सामने चुनौती केवल प्रत्याशी चुनने की नहीं होगी। पार्टी को यह भी देखना होगा कि स्थानीय संगठन में पुराने और नए राजनीतिक समीकरण किस तरह काम करते हैं। खब्बू तिवारी का राजनीतिक आधार, अभय सिंह का चुनावी प्रदर्शन और वर्ष 2022 में आरती तिवारी की उम्मीदवारी, तीनों पहलू टिकट की चर्चा को अहम बनाते हैं। प्रत्याशी चयन में व्यक्तिगत चुनावी प्रभाव, संगठन के साथ तालमेल और व्यापक सामाजिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
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गोसाईंगंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अभय सिंह के भाजपा में शामिल होने से नए समीकरण बनने लगे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम भाजपा के भीतर नेतृत्व, स्थानीय प्रभाव और टिकट की दावेदारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जिस सीट पर अभय सिंह और इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी कभी एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे, वहां अब दोनों नेताओं की नई भूमिका पर नजर रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल है कि भाजपा गोसाईगंज में पुराने राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देगी या नए घटनाक्रम के बाद रणनीति में बदलाव करेगी। अभय सिंह की पार्टी में एंट्री के बाद खब्बू तिवारी की भूमिका क्या होगी और टिकट की दावेदारी में किस तरह का संतुलन बनेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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दो चुनाव, दो नतीजे और बदलती सियासी जमीन
गोसाईगंज के पिछले दो विधानसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां मुकाबले की तस्वीर बदलती रही है। वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर उतरे खब्बू तिवारी ने अभय सिंह को 11,620 मतों से हराया था। तब भाजपा के लिए यह जीत स्थानीय राजनीतिक प्रभाव और चुनावी संगठन के लिहाज से अहम थी। हालांकि, 2022 में तस्वीर बदल गई। सपा प्रत्याशी अभय सिंह को 1,05,863 वोट मिले, जबकि भाजपा की आरती तिवारी को 92,784 वोट मिले। अभय सिंह ने 13,079 मतों से जीत दर्ज की। यह नतीजा बताता है कि पिछले चुनाव की जीत अगले चुनाव में बढ़त की गारंटी नहीं है।
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क्रॉस वोटिंग से भाजपा तक
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले अभय सिंह को बाद में समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी लंबे समय से लगाई जा रही थीं। अब पार्टी में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पार्टी में शामिल होना और विधानसभा चुनाव का टिकट मिलना अलग-अलग बातें हैं। अभय सिंह को क्या जिम्मेदारी मिलती है, खब्बू तिवारी को संगठन में किस तरह समायोजित किया जाता है और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल कैसे बनता है, यह भाजपा के आगामी फैसलों से तय होगा।
टिकट की दावेदारी में स्थानीय नेतृत्व अहम
गोसाईगंज में भाजपा के सामने चुनौती केवल प्रत्याशी चुनने की नहीं होगी। पार्टी को यह भी देखना होगा कि स्थानीय संगठन में पुराने और नए राजनीतिक समीकरण किस तरह काम करते हैं। खब्बू तिवारी का राजनीतिक आधार, अभय सिंह का चुनावी प्रदर्शन और वर्ष 2022 में आरती तिवारी की उम्मीदवारी, तीनों पहलू टिकट की चर्चा को अहम बनाते हैं। प्रत्याशी चयन में व्यक्तिगत चुनावी प्रभाव, संगठन के साथ तालमेल और व्यापक सामाजिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।