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Ayodhya News: ट्रस्ट से तैनात कर्मी करते थे गिनती, बैंक देता था वेतन

Fri, 26 Jun 2026 10:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Fri, 26 Jun 2026 10:58 PM IST
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Personnel deployed by the trust carried out the counting, while the bank paid the salaries
सतीश पाठक
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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में संबंधित बैंक की भूमिका भी कम नहीं है। ट्रस्ट के माध्यम से तैनात कर्मियों को बैंक ने गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लगाया था और उन्हें वेतन देता था। बैंक के किसी अधिकारी या कर्मचारी के इतने महत्वपूर्ण कार्य में तैनात न होना भी घोर लापरवाही मानी जा रही है। पुलिस की जांच में ऐसे ही चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं और बैंक की करतूतों की पोल खुल रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर की दान पेटिकाओं की दो चाबियां रहती हैं। एक चाबी मंदिर ट्रस्ट और दूसरी बैंक को दी गई है। दोनों चाबियां साथ होने पर ही दान पेटिका खुलती थी। वहां से पेटिकाओं को स्ट्रॉन्ग रूम लाकर ताला खोला जाता था और गिनती करके यहीं पर रिसीविंग की व्यवस्था थी। रिसीविंग की तीन प्रतियां बनती थीं। एक प्रति बैंक कर्मी, दूसरी बैंक और तीसरी प्रति ट्रस्ट को मिलती थी। इन पर यहीं हस्ताक्षर भी किए जाते थे।
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प्रतिदिन लगभग 20-25 लाख रुपये दान स्वरूप मिलते थे, जिनकी गिनती करके बैंक तक पहुंचाने में बैंक का अपना स्थायी कर्मी नहीं लगा था। बीच-बीच में बैंक के अधिकारी जायजा लेने आते थे। जबकि, खाता संचालन से लेकर धनराशि की गणना करके बैंक तक ले जाने के लिए ट्रस्ट का संबंधित बैंक से अनुबंध है। इसके बावजूद बैंक की ओर से लापरवाही की जाती रही, जिसका फायदा कर्मियों ने उठाया और मोटी रकम पार कर दी। सूत्रों के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की सिफारिश और उनके बताए अनुसार सभी कर्मियों को इस कार्य में बैंक ने लगाया था। वर्ष 2016 में बैंक से सेवानिवृत्त हो चुके सुभाष श्रीवास्तव को गणना के समय पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी गई थी। वह पिछले करीब पांच साल से बिना वेतन के मंदिर में सेवा कर रहे थे, लेकिन इस महत्वपूर्ण कार्य की निगरानी में उनके स्तर से भी लापरवाही बरती गई।
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सूत्रों के अनुसार, गणना में शामिल कई कर्मी पहले से ही मंदिर में कार्य करते थे। निर्माण पूर्ण होने के बाद उन्हें कार्यमुक्त किया गया तो बाद में बैंक की मिलीभगत से यहीं पर गणना कार्य में लगा दिया गया। इनमें स्वर्गद्वार निवासी मनीष यादव लगभग दो माह पहले ही तैनात हुआ था लेकिन चोरी के खेल में वह सबके साथ ही शामिल हो गया। वह बैंक संबंधी पर्यवेक्षणीय कार्यों में तैनात चंपत राय के चालक टिन्नू का भतीजा है।


सीधे तौर पर दान की गई वस्तुएं सुरक्षित होने का दावा

पुलिस अधिकारी सिर्फ दान पेटिकाओं से ही चोरी की बात स्वीकार रहे हैं, लेकिन मंदिर ट्रस्ट को सीधे तौर से दान की गई कीमती वस्तुएं और नकदी आदि में किसी तरह के गबन से इन्कार कर रहे हैं। हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान दिए गए ठेकों में हुई अनियमितताओं पर मौन स्वीकृति दे रहे हैं। उसे अपने स्तर का मुद्दा न होना बताकर पल्ला भी झाड़ रहे हैं।


निगरानी छोड़ ट्रस्ट का प्रबंधन देखते थे आरएमओ

मंदिर में दो कंट्रोल रूम स्थापित हैं। इनमें गणना स्थल पर लगे कैमरे की निगरानी सुनिश्चित कराने का दायित्व आरएमओ अर्जुन देव का है। नियमतः हर समय वहां लगे कैमरे की निगरानी की जानी चाहिए, लेकिन आरएमओ इसका अनुपालन नहीं करा सके। सूत्रों के अनुसार, वह निगरानी कार्य छोड़कर मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन कार्यों में अधिक सक्रिय दिखते थे। गैर जनपद से तैनात सिपाहियों के जिम्मे ही निगरानी जैसा महत्वपूर्ण कार्य होता था। चोरी में शामिल कर्मियों ने इस लापरवाही और ढिलाई का भी खूब फायदा उठाया। फिलहाल अब तक आरएमओ की भूमिका तय नहीं हो सकी है।
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