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Ayodhya News: अब अभिभावक तय करेंगे स्कूल की प्राथमिकताएं
Fri, 07 Aug 2026 09:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 07 Aug 2026 09:50 PM IST
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अयोध्या। जिले के सरकारी स्कूलों में विकास कार्यों और संसाधनों के उपयोग की प्राथमिकता तय करने में अब अभिभावकों की भूमिका बढ़ेगी। एक नवंबर से परिषदीय और पीएमश्री विद्यालयों में नई विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। नई एसएमसी 15 सदस्यीय होगी, जिसमें 11 सदस्य विद्यार्थियों के अभिभावक होंगे। समिति में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत अनिवार्य रखी गई है। प्रत्येक कक्षा का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन अभिभावकों में से होगा, जिसमें एक पद महिला के लिए आरक्षित रहेगा। समिति में एएनएम और लेखपाल को भी शामिल किया जाएगा, जबकि प्रधानाध्यापक सचिव होंगे।
जिले के 1790 परिषदीय विद्यालयों और 14 पीएमश्री विद्यालयों में एसएमसी के नाम से बैंक में संयुक्त बचत खाते खोले जाएंगे। इन खातों का संचालन समिति अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक संयुक्त हस्ताक्षर से करेंगे। समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाली अनुदान राशि इन्हीं खातों में भेजी जाएगी। इससे विद्यालयों को रखरखाव, मरम्मत और अन्य स्वीकृत कार्यों के लिए अलग-अलग बजट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
एसएमसी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने, बच्चों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं की निगरानी करेगी। समिति विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने और अनुदान के उपयोग पर भी नजर रखेगी। बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी नियमित निरीक्षण करेंगे। वित्तीय अनियमितता पर प्रधानाध्यापक के साथ निरीक्षण अधिकारी और बीईओ की जवाबदेही तय होगी। बीएसए लालचंद्र ने बताया कि नई समितियों से धनराशि समय पर मिलेगी और विकास कार्यों की निगरानी मजबूत होगी।
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हर महीने होगा खातों का मिलान
विद्यालयों को मिलने वाली अनुदान राशि का पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन दर्ज होगा। बैंक खातों का हर महीने मिलान किया जाएगा और आंतरिक ऑडिट भी होगा। कैशबुक, पासबुक, वाउचर और स्टॉक रजिस्टर का नियमित संधारण अनिवार्य रहेगा। खर्च में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
जिले के 1790 परिषदीय विद्यालयों और 14 पीएमश्री विद्यालयों में एसएमसी के नाम से बैंक में संयुक्त बचत खाते खोले जाएंगे। इन खातों का संचालन समिति अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक संयुक्त हस्ताक्षर से करेंगे। समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाली अनुदान राशि इन्हीं खातों में भेजी जाएगी। इससे विद्यालयों को रखरखाव, मरम्मत और अन्य स्वीकृत कार्यों के लिए अलग-अलग बजट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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एसएमसी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने, बच्चों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं की निगरानी करेगी। समिति विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने और अनुदान के उपयोग पर भी नजर रखेगी। बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी नियमित निरीक्षण करेंगे। वित्तीय अनियमितता पर प्रधानाध्यापक के साथ निरीक्षण अधिकारी और बीईओ की जवाबदेही तय होगी। बीएसए लालचंद्र ने बताया कि नई समितियों से धनराशि समय पर मिलेगी और विकास कार्यों की निगरानी मजबूत होगी।
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हर महीने होगा खातों का मिलान
विद्यालयों को मिलने वाली अनुदान राशि का पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन दर्ज होगा। बैंक खातों का हर महीने मिलान किया जाएगा और आंतरिक ऑडिट भी होगा। कैशबुक, पासबुक, वाउचर और स्टॉक रजिस्टर का नियमित संधारण अनिवार्य रहेगा। खर्च में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।