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Ayodhya News: अब ठहरकर निहार सकेंगे अयोध्या की संस्कृति
Sun, 29 Mar 2026 08:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 29 Mar 2026 08:17 PM IST
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अयोध्या। राम की पैड़ी पर अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पहचान देने के उद्देश्य से साकेत संध्या कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही यहां आयोजित सरस मेले में संस्कृति, आस्था और ग्रामीण विकास का अनूठा संगम देखने को मिला। यह मेला 31 मार्च तक चलेगा। अब तक राम की पैड़ी पर सरयू आरती के अलावा ऐसा कोई नियमित कार्यक्रम नहीं था, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक अधिक समय तक रुक सकें।
साकेत संध्या की शुरुआत से यह स्थिति बदलेगी और लोग यहां अधिक समय बिताकर अवध की समृद्ध सांस्कृतिक झलक का आनंद ले सकेंगे।कार्यक्रम के तहत हर शनिवार को साकेत संध्या का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को और व्यापक बनाने के लिए क्यूआर कोड भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से लोग स्वेच्छा से सहयोग कर सकेंगे। राम की पैड़ी पर आयोजित इस मेले में अयोध्या मंडल सहित विभिन्न जिलों से आए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए स्टॉल लगाए हैं। कुल 25 स्टॉलों पर 55 स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी रही, जिसमें सोहावल, बीकापुर, मसौधा, रुदौली समेत 11 ब्लॉकों के समूहों को अवसर मिला। इसके अलावा टांडा, सुल्तानपुर और अन्य जिलों की महिलाएं भी शामिल हुईं।
मेले में ग्रामीण हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद और स्थानीय व्यंजनों की विविधता देखने को मिल रही है। मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों को पहचान दिलाने का अवसर मिलता है। इससे उनकी आय में वृद्धि होती है और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। जिला मिशन निदेशक सरिता वर्मा ने कहा कि सरस मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए एक बड़ा अवसर है, जहां उन्हें अपने उत्पादों को सीधे बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का मंच मिलता है।
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साकेत संध्या की शुरुआत से यह स्थिति बदलेगी और लोग यहां अधिक समय बिताकर अवध की समृद्ध सांस्कृतिक झलक का आनंद ले सकेंगे।कार्यक्रम के तहत हर शनिवार को साकेत संध्या का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को और व्यापक बनाने के लिए क्यूआर कोड भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से लोग स्वेच्छा से सहयोग कर सकेंगे। राम की पैड़ी पर आयोजित इस मेले में अयोध्या मंडल सहित विभिन्न जिलों से आए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए स्टॉल लगाए हैं। कुल 25 स्टॉलों पर 55 स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी रही, जिसमें सोहावल, बीकापुर, मसौधा, रुदौली समेत 11 ब्लॉकों के समूहों को अवसर मिला। इसके अलावा टांडा, सुल्तानपुर और अन्य जिलों की महिलाएं भी शामिल हुईं।
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मेले में ग्रामीण हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद और स्थानीय व्यंजनों की विविधता देखने को मिल रही है। मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों को पहचान दिलाने का अवसर मिलता है। इससे उनकी आय में वृद्धि होती है और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। जिला मिशन निदेशक सरिता वर्मा ने कहा कि सरस मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए एक बड़ा अवसर है, जहां उन्हें अपने उत्पादों को सीधे बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का मंच मिलता है।
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