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Ayodhya News: यूरिन कैथेटर से होने वाले संक्रमण पर शोध करेगा मेडिकल कॉलेज
Sun, 02 Mar 2025 09:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 02 Mar 2025 09:56 PM IST
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अयोध्या। मरीजों के इलाज को लेकर लगातार उपलब्धियां बटोर रहा मेडिकल कॉलेज शोध के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। हाल ही में यहां एसटीएसए (शॉर्ट टर्म स्टडीज) प्रोजेक्ट के तहत यूरिन कैथेटर से मरीजों में होने वाले बैक्टीरियल संक्रमण पर शोध को हरी झंडी मिली है। इस शोध में मरीजों में संक्रमण के कारणों का पता लगाने, संक्रमण की रोकथाम और इलाज की भी खोज होगी।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबाॅयोलॉजी विभाग में वर्ष 2022 बैच के दो विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट आईसीएमआर (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) को भेजे गए थे। इनमें छात्रा वैशाली के प्रोजेक्ट को अनुमति मिली है। इस शो में मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशनों के बाद भर्ती मरीजों (जिनमें यूरिन कैथेटर लगा हो) की कल्चर सेंसटिविटी जांच कराई जाएगी। उनमें संक्रमण की पुष्टि होने पर संक्रमण के कारक बैक्टीरिया, उसके इलाज, बचाव, सावधानियों आदि पर अध्ययन किया जाएगा।
प्रोजेक्ट गाइड व माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहांशु शुक्ला ने बताया कि लगभग दो साल तक यह प्रोजेक्ट चलेगा। इसमें कम से कम 250 मरीजों पर शोध होगा। अब तक 15 मरीजों की जांच के लिए नमूना लिया गया है। बताया कि कभी भी दवाओं से भी इस तरह के संक्रमण होते हैं। लंबे समय तक कैथेटर के प्रयोग से भी समस्याएं होती हैं। संक्रमण का पता लगाने के बाद उनकी दवाओं पर भी शोध होगा।
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प्रोजेक्ट गाइड के अनुसार एसटीएस प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट से संबंधित विवरण आईसीएमआर को ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाते हैं। सभी मानकों व प्रोजेक्ट की उपयोगिता के आधार पर इसकी अनुमति मिलती है। इसके लिए संबंधित छात्र/छात्रा को 60,000 रुपये एकमुश्त मिलते हैं। इसका उपयोग वह प्रोजेक्ट पूर्ण करने में करते हैं।
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मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबाॅयोलॉजी विभाग में वर्ष 2022 बैच के दो विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट आईसीएमआर (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) को भेजे गए थे। इनमें छात्रा वैशाली के प्रोजेक्ट को अनुमति मिली है। इस शो में मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशनों के बाद भर्ती मरीजों (जिनमें यूरिन कैथेटर लगा हो) की कल्चर सेंसटिविटी जांच कराई जाएगी। उनमें संक्रमण की पुष्टि होने पर संक्रमण के कारक बैक्टीरिया, उसके इलाज, बचाव, सावधानियों आदि पर अध्ययन किया जाएगा।
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प्रोजेक्ट गाइड व माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहांशु शुक्ला ने बताया कि लगभग दो साल तक यह प्रोजेक्ट चलेगा। इसमें कम से कम 250 मरीजों पर शोध होगा। अब तक 15 मरीजों की जांच के लिए नमूना लिया गया है। बताया कि कभी भी दवाओं से भी इस तरह के संक्रमण होते हैं। लंबे समय तक कैथेटर के प्रयोग से भी समस्याएं होती हैं। संक्रमण का पता लगाने के बाद उनकी दवाओं पर भी शोध होगा।
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प्रोजेक्ट गाइड के अनुसार एसटीएस प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट से संबंधित विवरण आईसीएमआर को ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाते हैं। सभी मानकों व प्रोजेक्ट की उपयोगिता के आधार पर इसकी अनुमति मिलती है। इसके लिए संबंधित छात्र/छात्रा को 60,000 रुपये एकमुश्त मिलते हैं। इसका उपयोग वह प्रोजेक्ट पूर्ण करने में करते हैं।