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Ayodhya News: 27 साल बाद हत्या के दोषी को आजीवन कारावास
Fri, 23 Oct 2026 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 23 Oct 2026 11:19 PM IST
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अयोध्या। हत्या के 27 साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय की अदालत ने दोषी राजेंद्र तिवारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी ने मानसिक रोगी होने का दावा किया था, लेकिन अस्पताल की जांच में स्वस्थ पाए जाने के बाद उसका यह बचाव काम नहीं आया।
अदालत ने दोषी पर साढ़े पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला वर्ष 1999 में महाराजगंज के कादीपुर गांव का है। राज बहादुर तिवारी अपने भाई और पुत्र के साथ नित्यक्रिया के लिए जा रहे थे। तभी राजेंद्र समेत छह आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और चोरी के आरोप में हॉकी, लाठी-डंडों से पीटने लगे। बीच-बचाव करने पहुंचे लोगों को अखंड तिवारी ने तमंचा दिखाकर भगा दिया। राज बहादुर को मरा समझकर आरोपी मौके से भाग गए। गंभीर रूप से घायल राज बहादुर की जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।
मृतक के भाई राम चंद्र तिवारी की तहरीर पर छह आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद सभी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसी दौरान राजेंद्र ने मानसिक रोगी होने का दावा किया, लेकिन अस्पताल ने उसे स्वस्थ घोषित कर दिया। जमानत पर छूटने के बाद उसके फरार होने पर उसकी पत्रावली अलग कर विचारण किया गया। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर राजेंद्र को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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अदालत ने दोषी पर साढ़े पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला वर्ष 1999 में महाराजगंज के कादीपुर गांव का है। राज बहादुर तिवारी अपने भाई और पुत्र के साथ नित्यक्रिया के लिए जा रहे थे। तभी राजेंद्र समेत छह आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और चोरी के आरोप में हॉकी, लाठी-डंडों से पीटने लगे। बीच-बचाव करने पहुंचे लोगों को अखंड तिवारी ने तमंचा दिखाकर भगा दिया। राज बहादुर को मरा समझकर आरोपी मौके से भाग गए। गंभीर रूप से घायल राज बहादुर की जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।
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मृतक के भाई राम चंद्र तिवारी की तहरीर पर छह आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद सभी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसी दौरान राजेंद्र ने मानसिक रोगी होने का दावा किया, लेकिन अस्पताल ने उसे स्वस्थ घोषित कर दिया। जमानत पर छूटने के बाद उसके फरार होने पर उसकी पत्रावली अलग कर विचारण किया गया। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर राजेंद्र को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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