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Ayodhya News: भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी
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अयोध्या। ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति के सामने क्या चुनौतियां हैं और बदलती परिस्थितियों में देश अपने हितों को कैसे साध सकता है, इस पर अयोध्या में दो दिन तक चर्चा हुई। महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति को भारत की ऊर्जा, व्यापार और विदेश नीति के संदर्भ में देखा। संगोष्ठी में ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति को भारत की ऊर्जा जरूरतों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर तेल की कीमतों में बदलाव हो सकता है, जिसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसलिए बदलती परिस्थितियों के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। चर्चा में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर आगे की नीति तैयार करने पर जोर दिया गया। महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में ‘ईरान-इजराइल संघर्ष : भारत की विदेश नीति पर मध्य पूर्व का प्रभाव’ विषय पर हुई संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। चार तकनीकी सत्रों में शिक्षकों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन हिस्सा लिया। कुल 42 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
दूसरे दिन तीसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता साकेत महाविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. योगेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने की। प्रो. कविता सिंह, विभागाध्यक्ष विषय विशेषज्ञ रहीं। इस सत्र में 12 शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। समापन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भानु प्रताप सिंह ने की। मुख्य अतिथि अवध विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. सुरेंद्र मिश्र रहे।
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क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर तेल की कीमतों में बदलाव हो सकता है, जिसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसलिए बदलती परिस्थितियों के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। चर्चा में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर आगे की नीति तैयार करने पर जोर दिया गया। महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में ‘ईरान-इजराइल संघर्ष : भारत की विदेश नीति पर मध्य पूर्व का प्रभाव’ विषय पर हुई संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। चार तकनीकी सत्रों में शिक्षकों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन हिस्सा लिया। कुल 42 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
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दूसरे दिन तीसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता साकेत महाविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. योगेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने की। प्रो. कविता सिंह, विभागाध्यक्ष विषय विशेषज्ञ रहीं। इस सत्र में 12 शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। समापन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भानु प्रताप सिंह ने की। मुख्य अतिथि अवध विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. सुरेंद्र मिश्र रहे।
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