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Ayodhya News: अयोध्या जेल से फरार बंदी शेर अली दिल्ली से गिरफ्तार
Thu, 29 Oct 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:41 PM IST
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दिल्ली से पकड़ा गया शेर अली।
अयोध्या। मंडल कारागार से नौ माह पूर्व भागे बंदी शेर अली को यूपी एसटीएफ ने बुधवार देर रात दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर अयोध्या लाया गया और पुनः जेल में दाखिल करा दिया गया। मामले में फरार चल रहे दूसरे बंदी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरि की तलाश अभी भी जारी है।
सुल्तानपुर निवासी शेर अली हत्या के प्रयास के मामले में जेल में निरुद्ध था। वह 28 जनवरी 2026 की रात अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि के साथ मंडल कारागार की विशेष सुरक्षा बैरक से फरार हो गया था। दोनों बंदियों के फरार होने की जानकारी अगले दिन सुबह नियमित गिनती के दौरान हुई थी।
बैरक में दीवार से ईंटें निकालकर भागे थे
यूपीएसटीएफ के अनुसार, दोनों बंदियों ने अपनी कोठरी में पिछली दीवार में लगे जंगले के आसपास से लगभग 25 से 30 ईंटें निकालकर बाहर निकलने का रास्ता बनाया था। इसके बाद वे जेल परिसर में स्थित गोशाला तक पहुंचे, जहां उन्होंने कंबलों को फाड़कर एक रस्सी तैयार की। रस्सी के एक सिरे पर ईंट बांधकर उसे इमली के पेड़ पर फेंका। पेड़ के सहारे रस्सी को टिकाकर दोनों बंदी जेल की बाहरी दीवार पार करने में सफल हो गए। जेल से निकलने के बाद दोनों अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे और मुंबई जा रही ट्रेन में सवार हो गए।
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जांच में यह भी सामने आया कि जेल की बाहरी दीवार की निगरानी करने वाले चार सीसीटीवी कैमरे घटना के दौरान लगभग 16 घंटे तक बंद थे। इस चूक को जेल की सुरक्षा व्यवस्था में एक गंभीर लापरवाही माना गया।
जेल अधीक्षक समेत कर्मचारियों पर हुई थी कार्रवाई
घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। मामले की जांच के आधार पर जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई की गई थी। बाद की रिपोर्टों में कार्रवाई के दायरे में कुल 15 अधिकारियों और कर्मचारियों के आने का उल्लेख किया गया था।
अब गोलू अग्रहरि की गिरफ्तारी पर नजर
शेर अली की गिरफ्तारी के बाद अब गोलू अग्रहरि की तलाश अहम हो गई है। गोलू अमेठी जिले के मुसाफिरखाना क्षेत्र का निवासी है। दोनों बंदियों के फरार होने के बाद पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने उनकी तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया था।
पुलिस से बचने के लिए मुंबई, पुणे और दिल्ली में बदले कई ठिकाने
अयोध्या। दिल्ली से गिरफ्तार कर अयोध्या लाया बंदी शेर अली की मानें तो जेल में प्रताड़ना से परेशान होकर उसने दूसरे बंदी के साथ भागने की साजिश रची थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले नौ माह में उसने मुंबई, पुणे और दिल्ली में कई जगहों पर अपने ठिकाने बदले। वह बचने के लिए दिल्ली में मजदूरी कर रहा था।
एसटीएफ की अयोध्या इकाई फरार बंदियों की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान शेर अली के दिल्ली के मंगोलपुरी क्षेत्र में होने की सूचना मिली। उप निरीक्षक सौरभ मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत से गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद उसके खिलाफ धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
एसटीएफ के अनुसार, शेर अली नवंबर 2024 से जेल में बंद था। बीकापुर क्षेत्र में टावर रिपेयरिंग के दौरान विवाद में साथी कृष्ण कुमार को गोली मारकर घायल करने के आरोप में उसे जेल भेजा गया था। उसके खिलाफ अयोध्या में दो, जौनपुर में एक और सुल्तानपुर में नौ मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, लूट, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के मामले शामिल हैं। पूछताछ में उसने बताया कि दिल्ली में वह घरों की रंगाई-पुताई का काम कर रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।
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सुल्तानपुर निवासी शेर अली हत्या के प्रयास के मामले में जेल में निरुद्ध था। वह 28 जनवरी 2026 की रात अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि के साथ मंडल कारागार की विशेष सुरक्षा बैरक से फरार हो गया था। दोनों बंदियों के फरार होने की जानकारी अगले दिन सुबह नियमित गिनती के दौरान हुई थी।
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बैरक में दीवार से ईंटें निकालकर भागे थे
यूपीएसटीएफ के अनुसार, दोनों बंदियों ने अपनी कोठरी में पिछली दीवार में लगे जंगले के आसपास से लगभग 25 से 30 ईंटें निकालकर बाहर निकलने का रास्ता बनाया था। इसके बाद वे जेल परिसर में स्थित गोशाला तक पहुंचे, जहां उन्होंने कंबलों को फाड़कर एक रस्सी तैयार की। रस्सी के एक सिरे पर ईंट बांधकर उसे इमली के पेड़ पर फेंका। पेड़ के सहारे रस्सी को टिकाकर दोनों बंदी जेल की बाहरी दीवार पार करने में सफल हो गए। जेल से निकलने के बाद दोनों अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे और मुंबई जा रही ट्रेन में सवार हो गए।
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जांच में यह भी सामने आया कि जेल की बाहरी दीवार की निगरानी करने वाले चार सीसीटीवी कैमरे घटना के दौरान लगभग 16 घंटे तक बंद थे। इस चूक को जेल की सुरक्षा व्यवस्था में एक गंभीर लापरवाही माना गया।
जेल अधीक्षक समेत कर्मचारियों पर हुई थी कार्रवाई
घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। मामले की जांच के आधार पर जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई की गई थी। बाद की रिपोर्टों में कार्रवाई के दायरे में कुल 15 अधिकारियों और कर्मचारियों के आने का उल्लेख किया गया था।
अब गोलू अग्रहरि की गिरफ्तारी पर नजर
शेर अली की गिरफ्तारी के बाद अब गोलू अग्रहरि की तलाश अहम हो गई है। गोलू अमेठी जिले के मुसाफिरखाना क्षेत्र का निवासी है। दोनों बंदियों के फरार होने के बाद पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने उनकी तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया था।
पुलिस से बचने के लिए मुंबई, पुणे और दिल्ली में बदले कई ठिकाने
अयोध्या। दिल्ली से गिरफ्तार कर अयोध्या लाया बंदी शेर अली की मानें तो जेल में प्रताड़ना से परेशान होकर उसने दूसरे बंदी के साथ भागने की साजिश रची थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले नौ माह में उसने मुंबई, पुणे और दिल्ली में कई जगहों पर अपने ठिकाने बदले। वह बचने के लिए दिल्ली में मजदूरी कर रहा था।
एसटीएफ की अयोध्या इकाई फरार बंदियों की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान शेर अली के दिल्ली के मंगोलपुरी क्षेत्र में होने की सूचना मिली। उप निरीक्षक सौरभ मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत से गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद उसके खिलाफ धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
एसटीएफ के अनुसार, शेर अली नवंबर 2024 से जेल में बंद था। बीकापुर क्षेत्र में टावर रिपेयरिंग के दौरान विवाद में साथी कृष्ण कुमार को गोली मारकर घायल करने के आरोप में उसे जेल भेजा गया था। उसके खिलाफ अयोध्या में दो, जौनपुर में एक और सुल्तानपुर में नौ मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, लूट, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के मामले शामिल हैं। पूछताछ में उसने बताया कि दिल्ली में वह घरों की रंगाई-पुताई का काम कर रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।