{"_id":"6ae38b434f1130111f09b67b","slug":"display-across-the-entire-ram-mandir-ayodhya-news-c-97-1-ayo1002-162016-2026-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: राम मंदिर के पूरे परिसर में दिखेगा दीपोत्सव का दिव्य वैभव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: राम मंदिर के पूरे परिसर में दिखेगा दीपोत्सव का दिव्य वैभव
Thu, 29 Oct 2026 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:36 PM IST
विज्ञापन
राम की पैड़ी पर की गई सजावट।
अयोध्या। पांच सौ वर्षों के संघर्ष, प्रतीक्षा और आस्था के बाद रामलला के भव्य मंदिर में इस बार दीपावली का दिव्य वैभव नए स्वरूप में दिखाई देगा। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला अवसर होगा, जब राम मंदिर का पूरा परिसर अपने पूर्ण स्वरूप में दीपों की रोशनी से जगमगाएगा।
अब तक रामलला के दरबार तक सीमित रहने वाला दीपोत्सव इस बार 70 एकड़ में फैले मंदिर परिसर के उत्सव का रूप लेगा। परिसर में आकार ले चुके सभी 18 मंदिरों में दीपावली मनाई जाएगी। इन्हें एक लाख एक हजार 11 दीपों से रोशन करने की योजना है। पारंपरिक दीपमाला के साथ आधुनिक प्रकाश व्यवस्था मंदिर की भव्यता को नया आयाम देगी। भव्य मंदिर में रामलला की दीपावली का यह दृश्य देश-दुनिया के रामभक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
टेंट से पूर्ण मंदिर तक, बदलता गया दीपोत्सव का स्वरूप
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। उस समय रामलला टेंट में विराजमान थे। वर्ष 2018 और 2019 में भी रामलला टेंट में ही विराजमान रहे और दीपोत्सव इसी स्थिति में मनाया गया। नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद 25 मार्च 2020 को रामलला टेंट से निकलकर अस्थायी मंदिर में विराजमान हुए। वर्ष 2020 के दीपोत्सव में पहली बार अस्थायी मंदिर में रामलला का दरबार दीपों से रोशन हुआ। वर्ष 2021, 2022 और 2023 में भी अस्थायी मंदिर में दीपोत्सव की परंपरा जारी रही। इस दौरान भव्य मंदिर का निर्माण आकार लेता रहा और रामभक्तों की प्रतीक्षा अपने निर्णायक पड़ाव की ओर बढ़ती गई। वर्ष 2024 में 22 जनवरी को नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला के नवीन विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके बाद रामलला पहली बार भव्य मंदिर में विराजमान होकर दीपोत्सव का हिस्सा बने।
विज्ञापन
नए नेतृत्व के सामने भी पहली बड़ी परीक्षा
इस दीपोत्सव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए नेतृत्व के सामने यह पहला बड़ा आयोजन है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट के संगठनात्मक स्वरूप में बदलाव हुआ है। महासचिव और कोषाध्यक्ष बदले गए हैं तथा नए ट्रस्टी भी शामिल हुए हैं। इसके अलावा राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति हुई है। ऐसे में नए नेतृत्व के सामने आयोजन को भव्य, व्यवस्थित और यादगार बनाने की चुनौती होगी।
विज्ञापन
अब तक रामलला के दरबार तक सीमित रहने वाला दीपोत्सव इस बार 70 एकड़ में फैले मंदिर परिसर के उत्सव का रूप लेगा। परिसर में आकार ले चुके सभी 18 मंदिरों में दीपावली मनाई जाएगी। इन्हें एक लाख एक हजार 11 दीपों से रोशन करने की योजना है। पारंपरिक दीपमाला के साथ आधुनिक प्रकाश व्यवस्था मंदिर की भव्यता को नया आयाम देगी। भव्य मंदिर में रामलला की दीपावली का यह दृश्य देश-दुनिया के रामभक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
विज्ञापन
टेंट से पूर्ण मंदिर तक, बदलता गया दीपोत्सव का स्वरूप
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। उस समय रामलला टेंट में विराजमान थे। वर्ष 2018 और 2019 में भी रामलला टेंट में ही विराजमान रहे और दीपोत्सव इसी स्थिति में मनाया गया। नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद 25 मार्च 2020 को रामलला टेंट से निकलकर अस्थायी मंदिर में विराजमान हुए। वर्ष 2020 के दीपोत्सव में पहली बार अस्थायी मंदिर में रामलला का दरबार दीपों से रोशन हुआ। वर्ष 2021, 2022 और 2023 में भी अस्थायी मंदिर में दीपोत्सव की परंपरा जारी रही। इस दौरान भव्य मंदिर का निर्माण आकार लेता रहा और रामभक्तों की प्रतीक्षा अपने निर्णायक पड़ाव की ओर बढ़ती गई। वर्ष 2024 में 22 जनवरी को नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला के नवीन विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके बाद रामलला पहली बार भव्य मंदिर में विराजमान होकर दीपोत्सव का हिस्सा बने।
विज्ञापन
नए नेतृत्व के सामने भी पहली बड़ी परीक्षा
इस दीपोत्सव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए नेतृत्व के सामने यह पहला बड़ा आयोजन है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट के संगठनात्मक स्वरूप में बदलाव हुआ है। महासचिव और कोषाध्यक्ष बदले गए हैं तथा नए ट्रस्टी भी शामिल हुए हैं। इसके अलावा राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति हुई है। ऐसे में नए नेतृत्व के सामने आयोजन को भव्य, व्यवस्थित और यादगार बनाने की चुनौती होगी।