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अयोध्या: राम मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर करने को कराया गया था इंद्रध्वज मंडल विधान, मनाया जा रहा स्वर्ण जयंती

Tue, 22 Sep 2026 08:13 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 22 Sep 2026 08:13 PM IST
सार

अयोध्या में इंद्रध्वज मंडल विधान के आयोजन के 50वें वर्ष में इस बार स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा है। रायगंज जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के तहत श्रद्धालु दस धर्मों की आराधना कर रहे हैं। आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं।

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Indradhwaj Mandal Vidhan was performed to remove obstacles to the construction of the Ram Mandir.
इंद्र ध्वज मंडल विधान में भक्तों को संबोधित करते रविंद्रकीर्ति स्वामी - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर निर्माण की राह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए अयोध्या में इंद्रध्वज मंडल विधान कराया गया था। मंगलवार को रायगंज स्थित जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के दौरान पूर्व न्यायमूर्ति महाराष्ट्र कैलाश चंद्र चांदीवाल ने यह प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण को लेकर सामने आ रही बाधाओं के समय विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल ने जैन साध्वी गणिनी प्रमुख माता ज्ञानमती से मुलाकात कर इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद माता ज्ञानमती ने अपने अनुयायियों को इंद्रध्वज मंडल विधान कराने का निर्देश दिया था।

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इंद्रध्वज मंडल विधान के आयोजन के 50वें वर्ष में इस बार स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा है। रायगंज जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के तहत श्रद्धालु दस धर्मों की आराधना कर रहे हैं। आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं।
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चांदीवाल ने कहा कि अयोध्या केवल एक धर्म की नहीं, बल्कि विभिन्न धार्मिक परंपराओं की विरासत समेटे हुए नगरी है। राम मंदिर निर्माण से जुड़े संघर्ष के दौरान जैन समाज की ओर से भी धार्मिक अनुष्ठान किए गए थे। लखनऊ सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी आदेश जैन ने कहा कि अयोध्या ज्ञान और आस्था के साथ विविध धार्मिक विरासत की नगरी है। इसे सहेजना सभी की जिम्मेदारी है।
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नागालैंड से आईं रवि सेठी ने कहा कि इंद्रध्वज मंडल विधान में शामिल होकर उन्हें आध्यात्मिक रूप से बहुत कुछ सीखने को मिला। सत्र का संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने किया। विधान की प्रक्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में संपन्न हुईं। महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, नागालैंड, हस्तिनापुर समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जैन श्रद्धालु आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं।


आत्मशुद्धि और आत्ममंथन का अवसर देता है दशलक्षण पर्व
जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि दशलक्षण पर्व की शुरुआत उत्तम क्षमा धर्म से होती है और इसका समापन क्षमावाणी पर्व के साथ होता है। दस दिनों तक चलने वाला यह पर्व श्रद्धालुओं को आत्ममंथन, संयम और पापकर्मों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्ममंथन का अवसर भी है।

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