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Ayodhya News: घर डूबे, रास्ते बंद, चारपाई बनी एंबुलेंस
Mon, 14 Sep 2026 12:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 14 Sep 2026 12:34 AM IST
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ट्रॉली पर सामान लादकर जाते ग्रामीण।
अयोध्या। सरयू की उफनती लहरों ने कोटसराय ग्राम पंचायत के मांझा कला गांव में जिंदगी की रफ्तार रोक दी है। करीब 1500 की आबादी वाला यह गांव इस समय पानी, बेबसी और खौफ के बीच घिरा है। रविवार सुबह 11:33 बजे गांव पहुंची अमर उजाला की टीम ने जो हालात देखे, उनमें प्रशासन के राहत दावों और जमीन पर मौजूद हकीकत के बीच बड़ा फासला नजर आया।
घर पानी से घिरे हैं, रास्ते डूब चुके हैं और जिन परिवारों ने किसी तरह अपना सामान बचाया है, उनकी जिंदगी ट्रैक्टर-ट्राली और राहत शिविरों के बीच सिमट गई है। गांव के युवा मुरली कहते हैं कि कागजों पर राहत के इंतजाम भले ही पूरे हों, लेकिन जमीन पर ग्रामीण हर कदम पर संकट से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि बाढ़ का पानी घरों को चारों तरफ से घेर चुका है। रात में सरयू की तेज लहरों की गर्जना से लोग सहम जाते हैं।
सरयू के मुहाने पर घर, ट्रैक्टर-ट्रॉली में पूरी गृहस्थी
सुक्खादेवी का घर सरयू के मुहाने पर है। परिवार ने घर का सारा सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली में लाद दिया है। कभी जिस जगह घर बसाया था, अब वहीं से सामान समेटकर दूसरी जगह जोन की तैयारी है। सुक्खादेवी बताती हैं कि 2012 की बाढ़ के बाद उन्होंने इसी जगह अपना आशियाना बनाया था। तब से सरयू लगातार जमीन निगलती रही। करीब आठ बीघा खेत नदी में समा चुका है। परिवार के सामने सवाल सिर्फ सामान बचाने का नहीं, बल्कि यह है कि अगर घर भी चला गया तो जाएंगे कहां?
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स्टीमर तो मिला, डीजल का इंतजाम ग्रामीण करें
बाढ़ के कारण गांव का संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है। वाहनों का घरों तक पहुंचना मुश्किल है। प्रशासन ने आवागमन के लिए स्टीमर उपलब्ध कराया है, लेकिन मोहन, पप्पू, बृजनंदन, संजय, रामनिहाल, बाबूराम और मुन्नालाल का आरोप है कि उसे चलाने के लिए तेल का इंतजाम भी ग्रामीणों को अपनी जेब से करना पड़ रहा है।
बीमार पड़ा कोई तो चारपाई ही एंबुलेंस
बाढ़ ने गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। रास्ते डूबे होने से घर तक वाहन नहीं पहुंच सकते। ऐसे में किसी की तबीयत बिगड़ने पर मरीज को चारपाई पर उठाकर पानी से बाहर लाना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, सबसे ज्यादा डर रात में रहता है। दवा के लिए निकलना जोखिम भरा है। पानी में डूबने के खतरे के साथ जंगली जानवरों और मगरमच्छों का डर भी बना रहता है।
उप जिलाधिकारी सोहावल आदित्य विक्रम अग्रवाल ने बताया कि गांव के कुछ लोगों का आधार चेक करने पर वह जनपद गोंडा के और मांझा कला के बाहर के लोग पाए गए थे। इसलिए उनको राशन नहीं मिला। जो स्टीमर बिना तेल के खड़े हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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घर पानी से घिरे हैं, रास्ते डूब चुके हैं और जिन परिवारों ने किसी तरह अपना सामान बचाया है, उनकी जिंदगी ट्रैक्टर-ट्राली और राहत शिविरों के बीच सिमट गई है। गांव के युवा मुरली कहते हैं कि कागजों पर राहत के इंतजाम भले ही पूरे हों, लेकिन जमीन पर ग्रामीण हर कदम पर संकट से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि बाढ़ का पानी घरों को चारों तरफ से घेर चुका है। रात में सरयू की तेज लहरों की गर्जना से लोग सहम जाते हैं।
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सरयू के मुहाने पर घर, ट्रैक्टर-ट्रॉली में पूरी गृहस्थी
सुक्खादेवी का घर सरयू के मुहाने पर है। परिवार ने घर का सारा सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली में लाद दिया है। कभी जिस जगह घर बसाया था, अब वहीं से सामान समेटकर दूसरी जगह जोन की तैयारी है। सुक्खादेवी बताती हैं कि 2012 की बाढ़ के बाद उन्होंने इसी जगह अपना आशियाना बनाया था। तब से सरयू लगातार जमीन निगलती रही। करीब आठ बीघा खेत नदी में समा चुका है। परिवार के सामने सवाल सिर्फ सामान बचाने का नहीं, बल्कि यह है कि अगर घर भी चला गया तो जाएंगे कहां?
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स्टीमर तो मिला, डीजल का इंतजाम ग्रामीण करें
बाढ़ के कारण गांव का संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है। वाहनों का घरों तक पहुंचना मुश्किल है। प्रशासन ने आवागमन के लिए स्टीमर उपलब्ध कराया है, लेकिन मोहन, पप्पू, बृजनंदन, संजय, रामनिहाल, बाबूराम और मुन्नालाल का आरोप है कि उसे चलाने के लिए तेल का इंतजाम भी ग्रामीणों को अपनी जेब से करना पड़ रहा है।
बीमार पड़ा कोई तो चारपाई ही एंबुलेंस
बाढ़ ने गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। रास्ते डूबे होने से घर तक वाहन नहीं पहुंच सकते। ऐसे में किसी की तबीयत बिगड़ने पर मरीज को चारपाई पर उठाकर पानी से बाहर लाना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, सबसे ज्यादा डर रात में रहता है। दवा के लिए निकलना जोखिम भरा है। पानी में डूबने के खतरे के साथ जंगली जानवरों और मगरमच्छों का डर भी बना रहता है।
उप जिलाधिकारी सोहावल आदित्य विक्रम अग्रवाल ने बताया कि गांव के कुछ लोगों का आधार चेक करने पर वह जनपद गोंडा के और मांझा कला के बाहर के लोग पाए गए थे। इसलिए उनको राशन नहीं मिला। जो स्टीमर बिना तेल के खड़े हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी।