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Ayodhya News: वेदाध्ययन और शास्त्रीय परंपरा के महत्व पर डाला प्रकाश
Mon, 09 Mar 2026 08:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 09 Mar 2026 08:26 PM IST
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19- साकेत महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते मुख्य वक्ता- संवाद
अयोध्या। साकेत महाविद्यालय में सांस्कृतिक परिषद एवं पुरातन छात्र परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं शास्त्रों में अनुबंध चतुष्टय विषय पर विचारोत्तेजक व्याख्यान का आयोजन हुआ। मुख्य वक्ता आलोचक वागीश शुक्ला ने वेदाध्ययन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने जैमिनी के सूत्रों, उन पर लिखे भाष्यों और वार्तिकों की चर्चा करते हुए अनुबंध चतुष्टय अधिकारी और प्रयोजन का विस्तृत विश्लेषण किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि रामचरितमानस, रामायण और महाभारत जैसे-जैसे भारतीय वाङ्मय के उदाहरणों के माध्यम से विषय को सहज ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि बोध की सर्वोच्च अवस्था में भाषा का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और मौन ही संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन जाता है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अनादि काल से चली आ रही है, जिसका स्वरूप हमें ऋग्वेद में दिखाई देता है।
इस अवसर पर राष्ट्रधर्म के संपादक मनोजकांत मिश्र ने भी विचार रखे। संचालन अंग्रेजी विभाग एवं सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. असीम त्रिपाठी ने किया। विन्ध्यमणि ने आभार व्यक्त किया। मीडिया प्रभारी प्रो. आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि कार्यक्रम में प्रो. अशोक कुमार राय, प्रो. अनुराग मिश्रा, प्रो. पवन सिंह, प्रो. शिवकुमार तिवारी, प्रो. अभिषेक दत्त त्रिपाठी, प्रो. अजय सिंह, प्रो. कविता सिंह, प्रो. वंदना जायसवाल मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि रामचरितमानस, रामायण और महाभारत जैसे-जैसे भारतीय वाङ्मय के उदाहरणों के माध्यम से विषय को सहज ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि बोध की सर्वोच्च अवस्था में भाषा का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और मौन ही संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन जाता है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अनादि काल से चली आ रही है, जिसका स्वरूप हमें ऋग्वेद में दिखाई देता है।
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इस अवसर पर राष्ट्रधर्म के संपादक मनोजकांत मिश्र ने भी विचार रखे। संचालन अंग्रेजी विभाग एवं सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. असीम त्रिपाठी ने किया। विन्ध्यमणि ने आभार व्यक्त किया। मीडिया प्रभारी प्रो. आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि कार्यक्रम में प्रो. अशोक कुमार राय, प्रो. अनुराग मिश्रा, प्रो. पवन सिंह, प्रो. शिवकुमार तिवारी, प्रो. अभिषेक दत्त त्रिपाठी, प्रो. अजय सिंह, प्रो. कविता सिंह, प्रो. वंदना जायसवाल मौजूद रहे।
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