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Ayodhya News: गुमनामी बाबा संग्रहालय की योजना अटकी

Thu, 04 Dec 2025 11:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Dec 2025 11:30 PM IST
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Gumnami Baba museum plan stalled
मांझा बरहटा में ​स्थित संस्कृ​ति विभाग का भवन - फोटो : मांझा बरहटा में ​स्थित संस्कृ​ति विभाग का भवन
अयोध्या। गुमनामी बाबा संग्रहालय की बहुप्रतीक्षित योजना अब भी कागजों से बाहर नहीं आ सकी है। संस्कृति विभाग की ओर से तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य फिलहाल अधर में लटका हुआ है। स्थिति यह है कि जिस भूमि पर संग्रहालय विकसित किया जाना था, उसका अधिकांश हिस्सा परिवहन विभाग को स्थानांतरित हो चुका है, जबकि विभाग के पास बची अवशेष जमीन अपने उद्देश्य के अनुरूप उपयोग में नहीं लाई जा सकती। संस्कृति विभाग ने इस पर शासन-प्रशासन से आपत्ति दर्ज कराई है।
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सूत्रों के अनुसार, मांझा बरहटा में स्थित संस्कृति विभाग की जमीन पर गुमनामी बाबा के सामानों को संरक्षित करने के लिए एक संग्रहालय व अंतरराष्ट्रीय वैदिक शोध संस्थान का एकेडमिक परिसर बनाया जाना प्रस्तावित है। इससे पहले गुमनामी बाबा के सामान रामकथा संग्रहालय में संरक्षित थे, लेकिन संग्रहालय राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया गया। अब ट्रस्ट संग्रहालय का सुंदरीकरण करा रहा है। संग्रहालय में संरक्षित गुमनामी बाबा के सामान अब संस्कृति विभाग के तुलसी स्मारक भवन परिसर में रखे गए हैं। इन सामानों के प्रदर्शन के लिए संस्कृति विभाग ने संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया। इसके लिए मांझा बरहटा स्थित जमीन का चयन किया गया है।
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संस्कृति विभाग के सूत्रों के अनुसार मांझा बरहटा में संस्कृति विभाग के पास कुल 24 एकड़ जमीन थी, लेकिन अब महज ढ़ाई एकड़ जमीन बची है। परिवहन विभाग को पहले बस अड्डा और अब बस पोर्ट के लिए जमीन हस्तांतरित की जा चुकी है। विभाग का मानना है कि परिवहन विभाग को भूमि हस्तांतरण के बाद अब जो हिस्सा बचा है, वह संग्रहालय जैसे बड़े ढांचे के लिए अपर्याप्त है। यही नहीं, बची हुई जमीन का स्वरूप परियोजना के अनुरूप नहीं है, जिससे निर्माण की योजना तकनीकी रूप से भी बाधित हो रही है।
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आपत्ति के साथ सुझाव भी दिया
संस्कृति विभाग की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति में कहा गया है कि परिवहन विभाग को पहले चरण में ही भूमि इस प्रकार दी गई कि हाईवे से अवशेष भूमि का संपर्क कट गया। संस्कृति विभाग के लिए निकासी का रास्ता शेष नहीं रहा। बंधे से गांव की ओर जा रही सड़क से लगी भूमि एल डक्ट की तरह से बची है। इसका भी संस्कृति विभाग के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए समुचित प्रयोग नहीं हो सकेगा। एल डक्ट के मध्य में बना रैन बसेरा भी निष्प्रयोज्य हो जाएगा। ऐसे में सांस्कृतिक संकुल तक पहुंचना दुरूह होगा। योजना को किस तरह क्रियान्वित किया जा सकता है, इसका भी विभाग ने सुझाव दिया है।

कोट-
परिवहन विभाग को बहुत पहले ही कुछ जमीन दी जा चुकी है। नई परियोजना में कुछ दिक्कतें आ रही हैं, जमीन की नापजोख कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने भी इसका संज्ञान लिया है। मौका मुआयना कर आगे की योजना बनाई जाएगी।
- जयेंद्र कुमार, निदेशक, अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान
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