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Ayodhya News: दीपोत्सव के लिए वॉलंटियर व शिक्षकों का संकायवार प्रशिक्षण शुरू
सार
अयोध्या में दीपोत्सव के लिए वॉलंटियर और शिक्षकों का संकायवार प्रशिक्षण शुरू किया गया। इस प्रशिक्षण में दीपकों के संयोजन, सुरक्षा और प्रबंधन संबंधी जानकारी दी गई। आयोजन का उद्देश्य 26 लाख दीप जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है।
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विस्तार
अयोध्या। दीपोत्सव के लिए वॉलंटियर और शिक्षकों का संकायवार प्रशिक्षण शुरू हो गया है। एमबीए विभाग में शुक्रवार को पहले प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। पाॅवर पॉइंट प्रेजेंटेशन व वीडियो के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान दीपकों के संयोजन व उनको जलाने से संबंधित सावधानी के बारे में बताया गया।
वाणिज्य व प्रबंधन संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र वर्मा ने बताया कि दीपों को घाटों पर नियत 4.5X4.5 वर्ग फीट के ब्लाॅकों में 16X16 संख्या में सज्जित करना है। विशेष परिस्थिति में दीपों की संख्या बढ़ाने और स्थान प्रबंधन की दृष्टि से इसे कुछ स्थानों पर 14x14 या 12x12 किया जा सकता है। सभी दीपकों में तेल की बर्बादी कम से कम हो, इसका विशेष ध्यान रखना है। दीपोत्सव के दिन स्वयंसेवकों को ढीले कपड़े न पहनते हुए सूती कपड़े पहनने के लिए सजग किया गया।
दीपोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. एसएस मिश्र ने कहा कि इस बार दीपोत्सव 19 अक्तूबर को मनाया जाएगा। दीपकों को लगाने का काम 16 अक्तूबर से ही शुरू हो जाएगा। घाटों पर दीपक पहुंचाने का काम 15 अक्तूबर से होगा। प्रो. मिश्र ने कहा कि प्रभु श्रीराम के वनवास के बाद अयोध्या आगमन के पावन अवसर पर अयोध्या वासियों ने संपूर्ण अयोध्या को दीपकों से सजा कर प्रभु का स्वागत किया था। उसी अवसर को फिर से जीवंत बनाने के लिए राज्य सरकार ने दीपोत्सव शुरू किया है। यह काम किसी का व्यक्तिगत न होकर रामकाज है।
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नोडल अधिकारी ने कहा कि सभी सहयोगी अपना अधिकतम पुरुषार्थ कर यह कार्यक्रम कराने में योगदान करें, जिससे इस बार पुनः 26 लाख से ज्यादा दीपकों को जला कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जा सके। दीपोत्सव प्रशिक्षण समिति के सदस्य अनुराग सोनी, आलोक तिवारी व गायत्री वर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान किया। इस दौरान डॉ. निमिष मिश्र, पावनी रस्तोगी, श्याम श्रीवास्तव, अनुराग तिवारी व डॉ. अंशुमान पाठक मौजूद रहे।
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वाणिज्य व प्रबंधन संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र वर्मा ने बताया कि दीपों को घाटों पर नियत 4.5X4.5 वर्ग फीट के ब्लाॅकों में 16X16 संख्या में सज्जित करना है। विशेष परिस्थिति में दीपों की संख्या बढ़ाने और स्थान प्रबंधन की दृष्टि से इसे कुछ स्थानों पर 14x14 या 12x12 किया जा सकता है। सभी दीपकों में तेल की बर्बादी कम से कम हो, इसका विशेष ध्यान रखना है। दीपोत्सव के दिन स्वयंसेवकों को ढीले कपड़े न पहनते हुए सूती कपड़े पहनने के लिए सजग किया गया।
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दीपोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. एसएस मिश्र ने कहा कि इस बार दीपोत्सव 19 अक्तूबर को मनाया जाएगा। दीपकों को लगाने का काम 16 अक्तूबर से ही शुरू हो जाएगा। घाटों पर दीपक पहुंचाने का काम 15 अक्तूबर से होगा। प्रो. मिश्र ने कहा कि प्रभु श्रीराम के वनवास के बाद अयोध्या आगमन के पावन अवसर पर अयोध्या वासियों ने संपूर्ण अयोध्या को दीपकों से सजा कर प्रभु का स्वागत किया था। उसी अवसर को फिर से जीवंत बनाने के लिए राज्य सरकार ने दीपोत्सव शुरू किया है। यह काम किसी का व्यक्तिगत न होकर रामकाज है।
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नोडल अधिकारी ने कहा कि सभी सहयोगी अपना अधिकतम पुरुषार्थ कर यह कार्यक्रम कराने में योगदान करें, जिससे इस बार पुनः 26 लाख से ज्यादा दीपकों को जला कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जा सके। दीपोत्सव प्रशिक्षण समिति के सदस्य अनुराग सोनी, आलोक तिवारी व गायत्री वर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान किया। इस दौरान डॉ. निमिष मिश्र, पावनी रस्तोगी, श्याम श्रीवास्तव, अनुराग तिवारी व डॉ. अंशुमान पाठक मौजूद रहे।