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Ayodhya News: तीर्थ यात्रियों के लिए 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर बढ़ेंगी सुविधाएं
Wed, 25 Feb 2026 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 25 Feb 2026 11:06 PM IST
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20- चौदहकोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित कुंड का हो रही सुंदरीकरण- सूचना विभाग
अयोध्या। निर्माणाधीन 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर व्यापक विकास हो रहा है। इससे तीर्थ यात्रियों को काफी सुगमता होगी। योगी सरकार रामनगरी को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पर्यटन और तीर्थाटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग का विकास एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह परिक्रमा मार्ग अयोध्या की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है जो लगभग 40-45 किलोमीटर लंबा है। यह सरयू नदी के आसपास फैला हुआ है। यहां श्रद्धालु भगवान श्रीराम की नगरी की परिक्रमा करते हैं। कार्तिक में परिक्रमा का विशेष महत्व होता है। यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड अयोध्या के परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि परियोजना की कुल लागत 2124.53 लाख रुपये है। इस राशि से मार्ग पर विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनमें विश्राम गृह, स्तंभ, कुंडों का निर्माण, इंटरप्रिटेशन वॉल, शिलालेख, डायरेक्शनल साइनेज, पाथवे, स्टोन बेंच, डस्टबिन, लाइटिंग, प्रवेश द्वार, बाउंड्रीवॉल और छतरी का निर्माण शामिल है। ये सुविधाएं तीर्थ यात्रियों को विश्राम, दिशा-निर्देश, स्वच्छता और सौंदर्य का पूर्ण आनंद प्रदान करेंगी।
जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि यह परियोजना न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। होटल, परिवहन, गाइड और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसाय फलेंगे-फूलेंगे।
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मार्ग पर स्थित कुंडों और स्थलों का हो रहा सुंदरीकरण
विशेष रूप से मार्ग पर स्थित महत्वपूर्ण कुंडों और स्थलों का सुंदरीकरण किया जा रहा है। लक्ष्मी सागर कुंड, वैतरणी कुंड, निर्मली कुंड, गिरिजा कुंड और विभीषण कुंड जैसे पवित्र स्थलों पर विशेष कार्य प्रस्तावित हैं। इन कुंड का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। साथ ही विघ्नेश्वर नाथ शिवमंदिर का भी विकास कार्य चल रहा है, जो मार्ग की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाएगा। पाथवे, स्टोन बेंच और लाइटिंग से रात्रि में भी सुरक्षित परिक्रमा संभव होगी। प्रवेश द्वार, बाउंड्रीवॉल और छतरी निर्माण से मार्ग का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाएगा।
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यह परिक्रमा मार्ग अयोध्या की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है जो लगभग 40-45 किलोमीटर लंबा है। यह सरयू नदी के आसपास फैला हुआ है। यहां श्रद्धालु भगवान श्रीराम की नगरी की परिक्रमा करते हैं। कार्तिक में परिक्रमा का विशेष महत्व होता है। यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड अयोध्या के परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि परियोजना की कुल लागत 2124.53 लाख रुपये है। इस राशि से मार्ग पर विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनमें विश्राम गृह, स्तंभ, कुंडों का निर्माण, इंटरप्रिटेशन वॉल, शिलालेख, डायरेक्शनल साइनेज, पाथवे, स्टोन बेंच, डस्टबिन, लाइटिंग, प्रवेश द्वार, बाउंड्रीवॉल और छतरी का निर्माण शामिल है। ये सुविधाएं तीर्थ यात्रियों को विश्राम, दिशा-निर्देश, स्वच्छता और सौंदर्य का पूर्ण आनंद प्रदान करेंगी।
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जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि यह परियोजना न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। होटल, परिवहन, गाइड और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसाय फलेंगे-फूलेंगे।
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मार्ग पर स्थित कुंडों और स्थलों का हो रहा सुंदरीकरण
विशेष रूप से मार्ग पर स्थित महत्वपूर्ण कुंडों और स्थलों का सुंदरीकरण किया जा रहा है। लक्ष्मी सागर कुंड, वैतरणी कुंड, निर्मली कुंड, गिरिजा कुंड और विभीषण कुंड जैसे पवित्र स्थलों पर विशेष कार्य प्रस्तावित हैं। इन कुंड का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। साथ ही विघ्नेश्वर नाथ शिवमंदिर का भी विकास कार्य चल रहा है, जो मार्ग की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाएगा। पाथवे, स्टोन बेंच और लाइटिंग से रात्रि में भी सुरक्षित परिक्रमा संभव होगी। प्रवेश द्वार, बाउंड्रीवॉल और छतरी निर्माण से मार्ग का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाएगा।