राम मंदिर के चढ़ावे में गबन: सबसे बड़ा सवाल, आखिर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई एफआईआर; अब एसआईटी आगे, सब पीछे
राम मंदिर के चढ़ावे में गबन मामले में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई। चंदे की राशि में हेरफेर कर गबन करने के मामले को सात दिन बीत गए हैं। संदिग्ध पकड़े गए हैं, रिकवरी हुई है लेकिन ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया।
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प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।
मामले में भले ही एसआईटी गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।
जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है।
राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।