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Ayodhya News: मां कामाख्या भवानी के दरबार में उमड़े श्रद्धालु
Mon, 12 Oct 2026 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 12 Oct 2026 12:37 AM IST
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रुदौली। मां कामाख्या भवानी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है। शारदीय नवरात्र में मवई ब्लॉक के सुनवा के घने जंगलों में स्थित इस प्राचीन सिद्धपीठ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। नवरात्र के प्रथम दिन मंदिर को फूलों से सजाया गया।
रविवार भोर आरती हुई। विधायक रामचंद्र यादव और अन्य श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद लिया। यह मंदिर रुदौली तहसील मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर है। अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों से भक्त यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि राजा सुरथ और समाधि वैश्य ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें दर्शन दिए थे। तभी से यहां मां महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी पिंडी रूप में विराजमान हैं।
मंदिर परिसर में राजा सुरथ और समाधि वैश्य की प्रतिमाएं अक्षयवट के नाम से स्थापित हैं। कहा जाता है कि राजा दर्शन सिंह की मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। मंदिर के पुजारी मनोज मिश्रा ने बताया कि नवरात्र में दूरदराज से भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुलते हैं। रात आठ बजे आरती के बाद प्रवेश बंद हो जाता है।
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रविवार भोर आरती हुई। विधायक रामचंद्र यादव और अन्य श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद लिया। यह मंदिर रुदौली तहसील मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर है। अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों से भक्त यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि राजा सुरथ और समाधि वैश्य ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें दर्शन दिए थे। तभी से यहां मां महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी पिंडी रूप में विराजमान हैं।
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मंदिर परिसर में राजा सुरथ और समाधि वैश्य की प्रतिमाएं अक्षयवट के नाम से स्थापित हैं। कहा जाता है कि राजा दर्शन सिंह की मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। मंदिर के पुजारी मनोज मिश्रा ने बताया कि नवरात्र में दूरदराज से भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुलते हैं। रात आठ बजे आरती के बाद प्रवेश बंद हो जाता है।
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