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Ayodhya News: दीन दयाल अंत्योदय सखी मॉडल से महिलाओं को मिली नई उड़ान
Mon, 08 Dec 2025 09:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 08 Dec 2025 09:43 PM IST
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अयोध्या। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की दीन दयाल अंत्योदय योजना के सखी मॉडल ने हजारों महिलाओं की जिंदगी को नई दिशा दी है। जिले में अब तक 3000 से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित हो चुके हैं। इनसे जुड़कर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि घर-परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। बिजली से बैंक सखी तक महिलाओं की हर महीने की कमाई 15 से 20 हजार रुपये महीने तक पहुंच गई है।
पहले जहां ये महिलाएं चूल्हा-चौका और घर-गृहस्थी तक ही सीमित रहती थीं, वहीं आज वे समूह की बैठकों में हिस्सा लेती हैं, बैंक खाते संचालित करती हैं, छोटे व्यवसाय चला रही हैं और अपने फैसले खुद ले रही हैं। मुद्रा लोन, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और रिवॉल्विंग फंड जैसी योजनाओं का लाभ लेकर ये महिलाएं कुटीर उद्योग, पशुपालन, किराना दुकान, सिलाई केंद्र व अगरबत्ती निर्माण जैसे कई काम कर रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला मिशन प्रबंधक सरिता वर्मा ने बताया कि योगी सरकार की विशेष पहल पर अयोध्या अब प्रदेश में सबसे अधिक सक्रिय समूहों वाला जिला बन चुका है। यहां सबसे ज्यादा महिलाएं “सखी” (समूह की सक्रिय सदस्य) के रूप में जुड़ी हैं। सरकार की ओर से समूहों को 15 हजार से 2.50 लाख तक का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड, बैंक लिंकेज और प्रशिक्षण निरंतर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम और सरस आजीविका मेला जैसी योजनाएं भी इन महिलाओं को बड़ा बाजार और नई तकनीक से जोड़ रही हैं।
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कई समूह अब क्लस्टर और प्रोड्यूसर कंपनी के रूप में भी पंजीकृत
रुदौली, मवई, सोहावल और बीकापुर जैसे ब्लॉकों में तो सैकड़ों समूह ऐसे हैं, जिनकी महिलाएं अब लाखों रुपये का सालाना कारोबार कर रही हैं। एक समूह की औसत मासिक बचत 15-20 हजार तक पहुंच चुकी है। कई समूह तो अब क्लस्टर और प्रोड्यूसर कंपनी के रूप में भी पंजीकृत हो चुके हैं। दीन दयाल अंत्योदय योजना ने न केवल इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदली है, बल्कि उन्हें नया सम्मान और नई पहचान भी दी है।
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पहले जहां ये महिलाएं चूल्हा-चौका और घर-गृहस्थी तक ही सीमित रहती थीं, वहीं आज वे समूह की बैठकों में हिस्सा लेती हैं, बैंक खाते संचालित करती हैं, छोटे व्यवसाय चला रही हैं और अपने फैसले खुद ले रही हैं। मुद्रा लोन, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और रिवॉल्विंग फंड जैसी योजनाओं का लाभ लेकर ये महिलाएं कुटीर उद्योग, पशुपालन, किराना दुकान, सिलाई केंद्र व अगरबत्ती निर्माण जैसे कई काम कर रही हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला मिशन प्रबंधक सरिता वर्मा ने बताया कि योगी सरकार की विशेष पहल पर अयोध्या अब प्रदेश में सबसे अधिक सक्रिय समूहों वाला जिला बन चुका है। यहां सबसे ज्यादा महिलाएं “सखी” (समूह की सक्रिय सदस्य) के रूप में जुड़ी हैं। सरकार की ओर से समूहों को 15 हजार से 2.50 लाख तक का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड, बैंक लिंकेज और प्रशिक्षण निरंतर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम और सरस आजीविका मेला जैसी योजनाएं भी इन महिलाओं को बड़ा बाजार और नई तकनीक से जोड़ रही हैं।
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कई समूह अब क्लस्टर और प्रोड्यूसर कंपनी के रूप में भी पंजीकृत
रुदौली, मवई, सोहावल और बीकापुर जैसे ब्लॉकों में तो सैकड़ों समूह ऐसे हैं, जिनकी महिलाएं अब लाखों रुपये का सालाना कारोबार कर रही हैं। एक समूह की औसत मासिक बचत 15-20 हजार तक पहुंच चुकी है। कई समूह तो अब क्लस्टर और प्रोड्यूसर कंपनी के रूप में भी पंजीकृत हो चुके हैं। दीन दयाल अंत्योदय योजना ने न केवल इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदली है, बल्कि उन्हें नया सम्मान और नई पहचान भी दी है।