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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Crossing a swollen river without a life jacket.

Ayodhya News: बिना लाइफ जैकेट पार कर रहे उफनाती नदी

Mon, 31 Aug 2026 10:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 31 Aug 2026 10:42 PM IST
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Crossing a swollen river without a life jacket.
सरयू के किनारे ढ़ेमवा घाट पुल पार सुरक्षा मानको की अनदेखी कर चलाई जा रही नावे
सोहावल। सरयू की उफनाती लहरों पर ढेमवा घाट से नवाबगंज (गोंडा) की ओर जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। नावों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं और लाइफ जैकेट के बिना ही लोग नदी पार कर रहे हैं। नाव संचालन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है।
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गर्मी में गोंडा प्रशासन ने आवागमन के लिए पीपा पुल बनाया था, जिसे करीब दो महीने बाद लोक निर्माण विभाग ने हटा दिया। इसके बाद बाढ़ के दौरान गोंडा सांसद के हस्तक्षेप पर लोक निर्माण विभाग ने दो स्टीमर निशुल्क सेवा में लगाए। यात्रियों की संख्या अधिक होने से स्टीमर नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसी का फायदा उठाकर दो निजी नावें भी संचालित की जा रही हैं। आरोप है कि निजी नाव संचालक यात्रियों से किराया भी वसूलते हैं।
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घाट पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए बोर्ड पर स्पष्ट निर्देश हैं कि नाव में खड़े होकर यात्रा नहीं करनी है और लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य है। खराब मौसम में नाव नहीं चलाने के निर्देश भी हैं। इसके बावजूद नावों पर इन नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा है। तहसील प्रशासन का कहना है कि नाव और स्टीमर की व्यवस्था गोंडा जिले की ओर से की गई है। वहीं, गोंडा के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं उठ सका।
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बाढ़ का पानी उतरा, ग्रामीणों की मुश्किलें नहीं
- 41 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, फसल, चारा और बीमारी का संकट बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
शुजागंज। सरयू नदी का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ का पानी तो उतर गया लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कैथी माझा के प्राथमिक विद्यालय के 41 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है और कई विद्यार्थियों को नाव से आवागमन करना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण फसल और पशुओं के चारे का नुकसान हुआ है, जबकि पानी घटने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
कैथी माझा, मरौचा माझा और पटरंगा माझा अति संवेदनशील बाढ़ प्रभावित गांव हैं। महगू का पुरवा, सराय नासिर, मुजेहना, कैथी और अब्बूपुर समेत अन्य गांव भी नदी के जलस्तर बढ़ने-घटने से प्रभावित होते हैं। करीब 850 परिवार और पांच हजार की आबादी हर साल बाढ़ की मार झेलती है। बाढ़ के पानी में हरा चारा खराब होने से पशुपालकों के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है। उप जिलाधिकारी रुदौली विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य और राहत संबंधी व्यवस्थाएं कराई जा रही हैं।
इनसेट-
कटान में 50 बीघा जमीन नदी में समाई
पटरंगा माझा के राजेंद्र ने बताया कि नदी कटान में करीब 50 बीघा जमीन नदी में समा गई। इससे खेती पर निर्भर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मरौचा माझा के कुंवर बहादुर और गंगाराम ने बताया कि बाढ़ के कारण गांव में विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। कैथी माझा के ग्रामीण शिवकुमार और पुत्तीलाल ने बताया कि बाढ़ के दौरान रास्ते प्रभावित होने से विद्यार्थियों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।

सरयू के किनारे ढ़ेमवा घाट पुल पार सुरक्षा मानको की अनदेखी कर चलाई जा रही नावे

सरयू के किनारे ढ़ेमवा घाट पुल पार सुरक्षा मानको की अनदेखी कर चलाई जा रही नावे

सरयू के किनारे ढ़ेमवा घाट पुल पार सुरक्षा मानको की अनदेखी कर चलाई जा रही नावे

सरयू के किनारे ढ़ेमवा घाट पुल पार सुरक्षा मानको की अनदेखी कर चलाई जा रही नावे

सरयू के किनारे ढ़ेमवा घाट पुल पार सुरक्षा मानको की अनदेखी कर चलाई जा रही नावे

सरयू के किनारे ढ़ेमवा घाट पुल पार सुरक्षा मानको की अनदेखी कर चलाई जा रही नावे

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