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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: अध्यापन छोड़ आंदोलन को दिया पूरा जीवन, अब चंपत राय की ट्रस्ट से दागदार विदाई
Sat, 27 Jun 2026 07:28 PM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: Bhupendra Singh
Updated Sat, 27 Jun 2026 07:28 PM IST
सार
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: चंपत राय ने अध्यापन छोड़ आंदोलन को पूरा जीवन दिया। अब ट्रस्ट से उनकी दागदार विदाई हो गई। इस्तीफे के साथ ही उनके चार दशक लंबे दौर का समापन हो गया। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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चंपत राय का इस्तीफा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रामनगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे के साथ राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हो गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व और फिर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव तक का उनका लगभग चार दशक का सफर संगठन, आंदोलन और मंदिर निर्माण की धुरी रहा। लेकिन, चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच उनका कार्यकाल विवादों की छाया में समाप्त हुआ।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में जन्मे चंपत राय ने रसायन विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने अध्यापन छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक का दायित्व संभाला और स्वयं को पूरी तरह संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में जन्मे चंपत राय ने रसायन विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने अध्यापन छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक का दायित्व संभाला और स्वयं को पूरी तरह संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।
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आंदोलन के घटनाक्रम पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती थी
इसके बाद वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े और अंतरराष्ट्रीय महामंत्री तथा केंद्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वे रणनीति, न्यायालयी प्रक्रिया और जनसंपर्क अभियान के प्रमुख चेहरों में रहे। विवाद से जुड़े मुकदमों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और आंदोलन के घटनाक्रम पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती थी।
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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद फरवरी 2020 में केंद्र सरकार की ओर से गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उन्हें महासचिव बनाया गया। ट्रस्ट के गठन से लेकर मंदिर निर्माण, राष्ट्रव्यापी निधि समर्पण अभियान, निर्माण कार्यों की निगरानी और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा तक लगभग हर महत्वपूर्ण निर्णय और आयोजन में उनकी केंद्रीय भूमिका रही।
इसके बाद जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और ट्रस्ट की साख पर कोई सवाल न उठे, इसी बीच महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने दोनों इस्तीफों की पुष्टि की है।
आखिर क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद शुरू हुए घटनाक्रम ने ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व तक असर डाला। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने कई दौर की पूछताछ की और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट से जुड़े आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।इसके बाद जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और ट्रस्ट की साख पर कोई सवाल न उठे, इसी बीच महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने दोनों इस्तीफों की पुष्टि की है।