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Ayodhya News: बोगस फर्मों से आईटीसी ऐंठ रहे कारोबारी, 19 पर एफआईआर
Sun, 04 Jan 2026 08:22 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 04 Jan 2026 08:22 PM IST
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सतीश पाठक
अयोध्या। फर्जी (बोगस) फर्मों के सहारे आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) ऐंठने वालों पर स्टेट जीएसटी ने सख्ती की है। विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने जोन के सभी जिलों में अभियान चलाया है। बड़े पैमाने पर कर चोरी मिलने पर 19 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
कई लोग कागजों पर फर्म बनाकर स्टेट जीएसटी को चूना लगा रहे हैं। फर्जी पते का सहारा लेकर, गलत विवरण दर्ज करके जीएसटी पंजीयन ले लिया जाता है। फर्मों की श्रृंखला बनाकर आईटीसी ऐंठी जाती है। बीते दिनों संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं तो स्टेट जीएसटी ने इनके खिलाफ अभियान चलाया। अलग-अलग टीमों ने जोन के नौ जिलों में संदिग्ध कारोबारियों के यहां छापा मारा तो बड़े पैमाने पर कर चोरी पकड़ी गई। इसके बाद संबंधित से जुर्माना वसूलते हुए विधिक कार्रवाई कराई गई।
बड़े पैमाने पर की गई कर चोरी
अयोध्या जोन के संभाग बी ने रुदौली क्षेत्र की एक फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह फर्म 16 सितंबर, 2024 को ही निरस्त हो चुकी है। इसके बावजूद आईटीसी का लाभ लिया जा रहा था। फर्म ने 11 करोड़ रुपये की आईटीसी ऐंठ ली। बाराबंकी की एक फर्म ने आयरन-स्टील के कारोबार के लिए 12 जून, 2024 को जीएसटी पंजीयन लिया था। इसके बाद 11.75 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई। जांच में खुलासा होने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसी तरह अन्य कई व्यापारियों ने बोगस फर्मों के सहारे लंबी चपत लगाई।
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इस तरह करते हैं चोरी
अस्तित्वविहीन फर्म बनाकर पंजीकरण लिया जाता है। फर्म का कोई गोदाम या स्टाफ नहीं होता है। फर्जी पते, मोबाइल नंबर और ई-मेल का इस्तेमाल किया जाता है। माल की वास्तविक खरीद-फरोख्त नहीं होती है। एक ही माल या बिल को घुमाकर कई बार आईटीसी ली जाती है। ऐसे कारोबारी रिटर्न तो फाइल कर देते हैं, लेकिन टैक्स नहीं जमा करते हैं। आखिर में खरीदने वाला कारोबारी आईटीसी क्लेम कर लेता है। ऐसे कारोबारियों की कोई ई-वे बिल नहीं मिलती है। भौतिक सत्यापन के समय फर्म गायब रहती है। बैंक खातों से ट्रांजैक्शन भी संदिग्ध होता है। ऐसे में आसानी से यह लोग पकड़ में आ जाते हैं।
संभाग बी में हुई सर्वाधिक कार्रवाई
अयोध्या जोन के संभाग बी में अयोध्या आंशिक, बाराबंकी व अमेठी जिले आते हैं। बोगस फर्मों के सहारे कारोबार करने के सर्वाधिक 10 मामले इसी क्षेत्र में मिले हैं। इनमें सात के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और तीन के खिलाफ तहरीर दी गई है। गोंडा संभाग इस मामले में दूसरे नंबर पर है। इसमें देवीपाटन मंडल के सभी चार जिले आते हैं। यहां आठ मामले सामने आए हैं, जिनमें दो मामलों में रिपोर्ट दर्ज हुई और छह के खिलाफ तहरीर दी गई है। जबकि, संभाग ए में अयोध्या आंशिक, अंबेडकर नगर और सुल्तानपुर जिले आते हैं। यहां सिर्फ एक मामला सामने आया है।
अयोध्या जोन के अपर आयुक्त, ग्रेड-1 संतोष कुमार ने बताया कि बोगस फर्मों को लेकर विभाग सतर्क है। ऐसे कारोबारियों के खिलाफ आर्थिक दंड के अलावा विधिक कार्रवाई की जा रही है। इनसे आईटीसी की ब्याज सहित वसूली कराई जाएगी। जीएसटी पंजीयन निरस्त करने के साथ ही कुर्की की कार्रवाई भी होगी।
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अयोध्या। फर्जी (बोगस) फर्मों के सहारे आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) ऐंठने वालों पर स्टेट जीएसटी ने सख्ती की है। विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने जोन के सभी जिलों में अभियान चलाया है। बड़े पैमाने पर कर चोरी मिलने पर 19 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
कई लोग कागजों पर फर्म बनाकर स्टेट जीएसटी को चूना लगा रहे हैं। फर्जी पते का सहारा लेकर, गलत विवरण दर्ज करके जीएसटी पंजीयन ले लिया जाता है। फर्मों की श्रृंखला बनाकर आईटीसी ऐंठी जाती है। बीते दिनों संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं तो स्टेट जीएसटी ने इनके खिलाफ अभियान चलाया। अलग-अलग टीमों ने जोन के नौ जिलों में संदिग्ध कारोबारियों के यहां छापा मारा तो बड़े पैमाने पर कर चोरी पकड़ी गई। इसके बाद संबंधित से जुर्माना वसूलते हुए विधिक कार्रवाई कराई गई।
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बड़े पैमाने पर की गई कर चोरी
अयोध्या जोन के संभाग बी ने रुदौली क्षेत्र की एक फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह फर्म 16 सितंबर, 2024 को ही निरस्त हो चुकी है। इसके बावजूद आईटीसी का लाभ लिया जा रहा था। फर्म ने 11 करोड़ रुपये की आईटीसी ऐंठ ली। बाराबंकी की एक फर्म ने आयरन-स्टील के कारोबार के लिए 12 जून, 2024 को जीएसटी पंजीयन लिया था। इसके बाद 11.75 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई। जांच में खुलासा होने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसी तरह अन्य कई व्यापारियों ने बोगस फर्मों के सहारे लंबी चपत लगाई।
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इस तरह करते हैं चोरी
अस्तित्वविहीन फर्म बनाकर पंजीकरण लिया जाता है। फर्म का कोई गोदाम या स्टाफ नहीं होता है। फर्जी पते, मोबाइल नंबर और ई-मेल का इस्तेमाल किया जाता है। माल की वास्तविक खरीद-फरोख्त नहीं होती है। एक ही माल या बिल को घुमाकर कई बार आईटीसी ली जाती है। ऐसे कारोबारी रिटर्न तो फाइल कर देते हैं, लेकिन टैक्स नहीं जमा करते हैं। आखिर में खरीदने वाला कारोबारी आईटीसी क्लेम कर लेता है। ऐसे कारोबारियों की कोई ई-वे बिल नहीं मिलती है। भौतिक सत्यापन के समय फर्म गायब रहती है। बैंक खातों से ट्रांजैक्शन भी संदिग्ध होता है। ऐसे में आसानी से यह लोग पकड़ में आ जाते हैं।
संभाग बी में हुई सर्वाधिक कार्रवाई
अयोध्या जोन के संभाग बी में अयोध्या आंशिक, बाराबंकी व अमेठी जिले आते हैं। बोगस फर्मों के सहारे कारोबार करने के सर्वाधिक 10 मामले इसी क्षेत्र में मिले हैं। इनमें सात के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और तीन के खिलाफ तहरीर दी गई है। गोंडा संभाग इस मामले में दूसरे नंबर पर है। इसमें देवीपाटन मंडल के सभी चार जिले आते हैं। यहां आठ मामले सामने आए हैं, जिनमें दो मामलों में रिपोर्ट दर्ज हुई और छह के खिलाफ तहरीर दी गई है। जबकि, संभाग ए में अयोध्या आंशिक, अंबेडकर नगर और सुल्तानपुर जिले आते हैं। यहां सिर्फ एक मामला सामने आया है।
अयोध्या जोन के अपर आयुक्त, ग्रेड-1 संतोष कुमार ने बताया कि बोगस फर्मों को लेकर विभाग सतर्क है। ऐसे कारोबारियों के खिलाफ आर्थिक दंड के अलावा विधिक कार्रवाई की जा रही है। इनसे आईटीसी की ब्याज सहित वसूली कराई जाएगी। जीएसटी पंजीयन निरस्त करने के साथ ही कुर्की की कार्रवाई भी होगी।