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Ayodhya News: 5100 दीपों से जगमगाएगी भरत की तपोस्थली
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भरतकुंड महोत्सव के पोस्टर का विमोचन करते अतिथि।
अयोध्या। बीकापुर विधानसभा क्षेत्र के भरतकुंड में 12 से 18 नवंबर तक 28वां भरतकुंड महोत्सव आयोजित किया जाएगा। सात दिवसीय महोत्सव में 5100 दीप जलाए जाएंगे। इसके अलावा चित्रकला और कबड्डी प्रतियोगिता के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महोत्सव की तैयारियों को लेकर आयोजक समिति और बीकापुर विधायक अमित सिंह चौहान ने सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता की। इस दौरान महोत्सव के पोस्टर का विमोचन भी किया गया।
विधायक अमित सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 1997 में शुरू हुआ भरतकुंड महोत्सव लगातार भव्य स्वरूप ले रहा है। इस बार भी विभिन्न प्रदेशों और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विभागों के कलाकार कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। चिकित्सा, शिक्षा, किसान, खेल, युवा और अधिवक्ता समेत विभिन्न क्षेत्रों की पांच-पांच विभूतियों को सम्मानित करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि भरतकुंड भगवान भरत की तपोस्थली है। भगवान श्रीराम के वनवास के दौरान भरत ने उनकी खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर 14 वर्षों तक राजकाज संभाला था। श्रीराम के लौटने पर उन्होंने राजपाट उन्हें सौंप दिया। भरत का जीवन भाईचारे, त्याग और प्रेम का संदेश देता है। महोत्सव के माध्यम से इस पौराणिक और धार्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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विधायक ने कहा कि भरतकुंड के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। धार्मिक स्थल को विकसित कर प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। महोत्सव में विभिन्न अतिथियों और मंत्रियों के शामिल होने की भी संभावना है। भरतकुंड महोत्सव न्यास के अध्यक्ष अंजनी कुमार पांडेय ने आयोजन की तैयारियों और महोत्सव के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महोत्सव के माध्यम से धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
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विधायक अमित सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 1997 में शुरू हुआ भरतकुंड महोत्सव लगातार भव्य स्वरूप ले रहा है। इस बार भी विभिन्न प्रदेशों और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विभागों के कलाकार कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। चिकित्सा, शिक्षा, किसान, खेल, युवा और अधिवक्ता समेत विभिन्न क्षेत्रों की पांच-पांच विभूतियों को सम्मानित करने की योजना है।
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उन्होंने कहा कि भरतकुंड भगवान भरत की तपोस्थली है। भगवान श्रीराम के वनवास के दौरान भरत ने उनकी खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर 14 वर्षों तक राजकाज संभाला था। श्रीराम के लौटने पर उन्होंने राजपाट उन्हें सौंप दिया। भरत का जीवन भाईचारे, त्याग और प्रेम का संदेश देता है। महोत्सव के माध्यम से इस पौराणिक और धार्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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विधायक ने कहा कि भरतकुंड के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। धार्मिक स्थल को विकसित कर प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। महोत्सव में विभिन्न अतिथियों और मंत्रियों के शामिल होने की भी संभावना है। भरतकुंड महोत्सव न्यास के अध्यक्ष अंजनी कुमार पांडेय ने आयोजन की तैयारियों और महोत्सव के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महोत्सव के माध्यम से धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।