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Ayodhya News: बीसीपीएम ने सीएमओ के खिलाफ खोला मोर्चा, लगाए गंभीर आरोप
Mon, 27 Oct 2025 08:23 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 27 Oct 2025 08:23 PM IST
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अयोध्या। सीएचसी सोहावल की ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (बीसीपीएम) नेहा सिंह ने वित्तीय अनियमितता के आरोप लगने पर पलटवार किया है। अब उन्होंने सीएमओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन पर उत्पीड़न करने, अभद्र टिप्पणी समेत अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में बीसीपीएम ने बताया कि आशा बहू के भुगतान के लिए बाउचर व प्रपत्र जमा किया जाता है। 25 तारीख तक एमआईएस पर भुगतान अपडेट करने के बाद ब्लॉक लेखा प्रबंधक (बीएएम) को सत्यापन के लिए भेजा जाता है। उनके सत्यापन के बाद ही कोई बाउचर भुगतान के लिए अग्रसारित होता है।
इससे असहमत होने पर प्रभारी चिकित्साधिकारी इसे निरस्त कर सकते हैं। संदेह होने पर एसीएमओ आरसीएच, डीपीएम और डीसीपीएम व डीएएम मातहतों को नोटिस देकर सवाल भी उठाते हैं। भुगतान पूरे टीम की जिम्मेदारी है। इसलिए बीसीपीएम के साथ ही वह लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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आरोप लगाया कि जांच समिति के नाम में हेराफेरी की गई है। महिला कर्मचारी से संबंधित जांच के लिए समिति में महिला कर्मचारी होनी चाहिए। समिति ने सीएमओ के दबाव में भ्रामक व तथ्यहीन जांच आख्या दी है। बाउचर के रखरखाव की जिम्मेदारी बीएएम की होती है, लेकिन उनसे स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया।
16 सितंबर तक वह मातृत्व अवकाश पर थीं। इस दौरान आशाओं का भुगतान स्थानीय व्यवस्था से ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) ने किया। यदि बिना क्लस्टर बैठक में उपस्थिति के आशा बहुओं का भुगतान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी बीपीएम की है। मातृत्व अवकाश के दौरान भी उनका स्थानांतरण 40 किलोमीटर दूर कर दिया गया। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। सीएमओ ने उन पर अभद्र टिप्पणी की। बिना कारण बताए उनका दो माह का वेतन रोक लिया गया।
कार्रवाई के डर से लगा रहीं आरोप : सीएमओ
सीएमआ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि बीएएम का दायित्व सत्यापन करना नहीं है, बल्कि दिए गए बाउचरों का भुगतान करना है। जांच में वित्तीय अनियमितता मिलने पर कार्रवाई के डर से बीसीपीएम तरह-तरह के आरोप लगा रही हैं, जो कि निराधार हैं। उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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प्रेस विज्ञप्ति में बीसीपीएम ने बताया कि आशा बहू के भुगतान के लिए बाउचर व प्रपत्र जमा किया जाता है। 25 तारीख तक एमआईएस पर भुगतान अपडेट करने के बाद ब्लॉक लेखा प्रबंधक (बीएएम) को सत्यापन के लिए भेजा जाता है। उनके सत्यापन के बाद ही कोई बाउचर भुगतान के लिए अग्रसारित होता है।
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इससे असहमत होने पर प्रभारी चिकित्साधिकारी इसे निरस्त कर सकते हैं। संदेह होने पर एसीएमओ आरसीएच, डीपीएम और डीसीपीएम व डीएएम मातहतों को नोटिस देकर सवाल भी उठाते हैं। भुगतान पूरे टीम की जिम्मेदारी है। इसलिए बीसीपीएम के साथ ही वह लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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आरोप लगाया कि जांच समिति के नाम में हेराफेरी की गई है। महिला कर्मचारी से संबंधित जांच के लिए समिति में महिला कर्मचारी होनी चाहिए। समिति ने सीएमओ के दबाव में भ्रामक व तथ्यहीन जांच आख्या दी है। बाउचर के रखरखाव की जिम्मेदारी बीएएम की होती है, लेकिन उनसे स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया।
16 सितंबर तक वह मातृत्व अवकाश पर थीं। इस दौरान आशाओं का भुगतान स्थानीय व्यवस्था से ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) ने किया। यदि बिना क्लस्टर बैठक में उपस्थिति के आशा बहुओं का भुगतान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी बीपीएम की है। मातृत्व अवकाश के दौरान भी उनका स्थानांतरण 40 किलोमीटर दूर कर दिया गया। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। सीएमओ ने उन पर अभद्र टिप्पणी की। बिना कारण बताए उनका दो माह का वेतन रोक लिया गया।
कार्रवाई के डर से लगा रहीं आरोप : सीएमओ
सीएमआ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि बीएएम का दायित्व सत्यापन करना नहीं है, बल्कि दिए गए बाउचरों का भुगतान करना है। जांच में वित्तीय अनियमितता मिलने पर कार्रवाई के डर से बीसीपीएम तरह-तरह के आरोप लगा रही हैं, जो कि निराधार हैं। उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।