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अयोध्या: बैकफुट पर नहीं आएगा अधिवक्ता संघ, मुख्य आरोपियों को कटघरे में खड़ा कराने की लड़ाई जारी

Thu, 24 Sep 2026 08:07 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Thu, 24 Sep 2026 08:07 PM IST
सार

बार एसोसिएशन अयोध्या के अध्यक्ष ने कहा कि चढ़ावा चोरी मामले की विवेचना में मुख्य आरोपियों को बचाया गया। शपथपत्र और अधिवक्ताओं के बयान के बावजूद जांच नहीं हुई।

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Ayodhya: Advocates' Association will not back down; the fight to bring the main accused to the dock continues
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में दाखिल आरोपपत्र को लेकर अधिवक्ता संघ ने पुलिस विवेचना पर सवाल उठाते हुए मुख्य आरोपियों को कटघरे में खड़ा कराने की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है। बार एसोसिएशन अयोध्या के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा कि संघ इस मामले में बैकफुट पर आने वाला नहीं है। उनका आरोप है कि विवेचना के दौरान ऐसे लोगों को बचाया गया, जिनकी भूमिका चोरी में रही या जिन्होंने आरोपियों का सहयोग किया।

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अध्यक्ष ने बताया कि अधिवक्ता संघ की ओर से चढ़ावा चोरी के मामले में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण मोहन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना रामजन्मभूमि में तहरीर दी गई थी। पुलिस की ओर से पीली पर्ची देकर रिपोर्ट दर्ज करने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
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दस शपथपत्र, नौ अधिवक्ताओं के बयान दिए, फिर भी नहीं हुई जांच
- कालिका प्रसाद मिश्रा के मुताबिक, अधिवक्ता संघ ने विवेचक को दस लोगों के शपथपत्र साक्ष्य के तौर पर दिए। नौ अधिवक्ताओं के मौखिक बयान भी दर्ज कराए गए। इसके बावजूद इन बयानों और शपथपत्रों के आधार पर अपेक्षित जांच नहीं की गई। उनका कहना है कि विवेचना में मुख्य आरोपियों को बचाया गया और संघ की ओर से उठाए गए सवालों का विवेचक के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।उन्होंने कहा कि संघ ने भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में दाखिल आरोपपत्र पर आपत्ति भी दाखिल की है। संघ के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ताओं पीएन सिंह, केसी खरे, विजय बहादुर सिंह, सौरभ मिश्रा और निजामुद्दीन खान ने भी अदालत के समक्ष आरोपपत्र में कमियां रखीं।
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इनसेट

ऊपरी अदालत जाएगा संघ
- बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। जरूरत पड़ी तो संघ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी के मुख्य आरोपियों को अदालत के सामने लाने के लिए संघ की लड़ाई जारी रहेगी।

आरोप तय होने के बाद गवाहों के बयान होंगे

- वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता एवं पूर्व मंत्री आलोक खरे ने बताया कि आरोपपत्र न्यायालय में आने के बाद नियमानुसार आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। आरोपियों को आरोपपत्र और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद न्यायालय आरोपों पर विचार कर आरोप तय करेगा। आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज होंगे और उपलब्ध साक्ष्यों व गवाहों की गवाही के आधार पर अदालत मामले का निर्णय करेगी।

मुख्य आरोपियों को मुलजिम न बनाना विवेचक की बड़ी कमी
- बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सूर्य नारायण सिंह ने कहा कि न्यायालय में दाखिल आरोपपत्र में कार्रवाई तो हुई है, लेकिन मुख्य आरोपियों को मुलजिम नहीं बनाया जाना विवेचना की बड़ी कमी है। उनका कहना है कि इसी बिंदु को लेकर अधिवक्ता संघ लगातार सवाल उठा रहा है। वहीं पूर्व मंत्री गिरीश तिवारी ने कहा कि आरोपपत्र से अधिवक्ताओं में निराशा है। उनका आरोप है कि संघ की ओर से दिए गए शपथपत्रों और दर्ज कराए गए बयानों के आधार पर पर्याप्त जांच नहीं की गई और न ही इस संबंध में अपेक्षित साक्ष्य संकलित किए गए।

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