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Ayodhya News: केपीआई में बेहतर रैंकिंग लाने की कवायद में जुटा अवध विवि

Fri, 09 Jan 2026 09:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Fri, 09 Jan 2026 09:11 PM IST
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Avadh University engaged in the exercise of getting better ranking in KPI
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने नैक में ए प्लस प्लस ग्रेड लाने के साथ ही अब की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (केपीआई) में भी बेहतर रैंकिंग लाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए पांच मुख्य प्रदर्शन संकेतक के मापदंड पर खरा उतरने के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं। विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विकास यात्रा में यह प्रमुख पड़ाव साबित हो सकता है।
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नैक मूल्यांकन के साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षिक उन्नयन में केपीआई महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। यह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में योगदान करेगा। साथ ही विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट रैंकिंग तय करने में मददगार होगा। इस नई मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से विश्वविद्यालय के संकायों और विभागों को अपनी कमजोरियों को पहचानने और उनमें सुधार करने में मदद मिलेगी। गुणवत्ता में सुधार के लिए स्पष्ट रोडमैप भी मिल सकेगा।
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केपीआई के प्रमुख रूप से पांच इंडिकेटर हैं। इसके तहत विश्वविद्यालय काम कर रहा है। इसमें प्रमुख रूप से शैक्षणिक सफलता के साथ छात्र-छात्राओं की संख्या और उनके उत्तीर्ण होने के प्रतिशत के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को दर्शाया जा सकेगा। साथ ही नामांकन दर में कितने विद्यार्थियों ने आवेदन किया, कितनों ने प्रवेश लिया और पहले वर्ष के बाद पढ़ाई जारी रखने वाले छात्रों का डेटा तैयार किया जाएगा।
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इसी कड़ी में स्नातक दर यानी निर्धारित समय तीन या चार साल में डिग्री पूरी करने वाले विद्यार्थियों के प्रतिशत का डेटा तैयार किया जाएगा। इतना ही नहीं विभिन्न शैक्षणिक विभागों के शिक्षकों को प्रति फैकल्टी कितने शोध पत्र प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुए और विश्वविद्यालय की ओर से किए गए नए आविष्कारों या पेटेंट की संख्या का विवरण उपलब्ध कराना होगा। केपीआई में बेहतर रैंकिंग मिलने पर विश्वविद्यालय को शोध परियोजनाओं के लिए बाहरी प्रतिष्ठित संस्थाओं से अनुदान प्राप्त हो सकेगा।




विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को कौटिल्य प्रशासनिक भवन सभागार में की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (केपीआई) समिति की बैठक भी हुई। इसमें कुलपति ने कहा कि अनुसंधान और नवाचार विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से जुड़े होते हैं। गुणवत्तापरक शोध कार्यों में तेजी लानी होगी। छात्र-छात्राओं की प्लेसमेंट दर व डिग्री पूरी होने के छह महीने के भीतर जॉब पाने वाले विद्यार्थियों का डेटा अपडेट किया जाए। विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने पर फोकस करना होगा। इस दौरान कुलसचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेंदु शुक्ल, प्रो. एसएस मिश्र, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, प्रो. सिद्धार्थ शुक्ल, प्रो. नीलम पाठक, प्रो. शैलेंद्र कुमार, उप कुलसचिव डॉ. एके गौतम, डॉ. रीमा श्रीवास्तव व डॉ. पीके द्विवेदी मौजूद रहे।
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