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Ayodhya News: सावन शिवरात्रि पर उमड़ा शिव भक्ति का सागर
Wed, 23 Jul 2025 09:13 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 23 Jul 2025 09:13 PM IST
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अयोध्या। सरयू के तट से लेकर शिवालयों तक, भक्तों की लंबी कतार, हर दिशा से बोल बम, हर हर महादेव का जयघोष...। सावन की शिवरात्रि पर अयोध्या की धरा पर यही दृश्य साकार हुआ। आस्था न केवल बह रही थी, बल्कि थिरक रही थी... झूम रही थी... और झंकृत हो रही थी। कोई नंगे पांव पहुंचा तो किसी ने हाथ में सरयू जल भरा कलश लेकर शिवालय में हाजिरी लगाई।
हजारों की संख्या में केसरिया वस्त्रधारी कावड़िये, जल से भरी कांवड़ लिए, श्रद्धा से अभिभूत, पैदल, बाइक, ट्रैक्टर आदि से सरयू के घाटों की ओर बढ़ते चले आए। सरयू की लहरों ने जैसे उनका स्वागत किया। जल भरकर जैसे ही वे शिवालयों की ओर बढ़े, पूरा नगर शिवमय हो उठा। नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, कोटेश्वर नाथ, दुर्गा काली दरबार समेत अन्य शिवालयों में रुद्राभिषेक, मंत्रोच्चार की ध्वनि और घंटियों की गूंज ने अयोध्या को शिव की तपोभूमि बना दिया। शिवालयों में कोई रुद्राष्टक गा रहा था, कोई शिव चालीसा का पाठ कर रहा था, और कहीं शिव तांडव स्तोत्र की झंकार लहरों-सी बह रही थी। दुर्गा काली दरबार के महंत सूर्यानंद ने कहा कि यह केवल एक पर्व नहीं था, यह था भक्ति का महासागर, जिसमें रामनगरी ने डुबकी लगाई। श्रद्धा ने सबको एक सूत्र में बांधा और सावन शिवरात्रि ने फिर साबित किया कि अयोध्या केवल राम की नहीं, समस्त सनातन संस्कृति की प्राणवायु है।
रामनगरी में भोले की प्रतिष्ठित पीठ नागेश्वरनाथ में सुबह तीन बजे से ही कांवड़िए लाइन में लगने शुरू हो गए थे। यहां करीब 500 मीटर लंबी लाइन अभिषेक-पूजन के लिए लगी रही। सुबह तीन बजे से लेकर नौ बजे तक शिवालयों से लेकर अन्य मंदिरों रामलला, कनक भवन व हनुमानगढ़ी में भीड़ का दबाव अधिक था। सुबह 10 बजे के बाद तेज धूप के कारण रामपथ पर श्रद्धालुओं की भीड़ कम हो गई।
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सावन की शिवरात्रि पर जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। ड्रोन से निगरानी, ट्रैफिक डायवर्जन, मेडिकल टीमों की तैनाती और महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी ने व्यवस्था को सुगम बनाए रखा। सीसीटीवी से सभी प्रमुख मठ-मंदिरों की निगरानी की जाती रही। सुबह की पाली में रामपथ पर चार पहिया व दो पहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया था। जिसके चलते ऑफिस जाने वाले लोगों व स्कूली वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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हजारों की संख्या में केसरिया वस्त्रधारी कावड़िये, जल से भरी कांवड़ लिए, श्रद्धा से अभिभूत, पैदल, बाइक, ट्रैक्टर आदि से सरयू के घाटों की ओर बढ़ते चले आए। सरयू की लहरों ने जैसे उनका स्वागत किया। जल भरकर जैसे ही वे शिवालयों की ओर बढ़े, पूरा नगर शिवमय हो उठा। नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, कोटेश्वर नाथ, दुर्गा काली दरबार समेत अन्य शिवालयों में रुद्राभिषेक, मंत्रोच्चार की ध्वनि और घंटियों की गूंज ने अयोध्या को शिव की तपोभूमि बना दिया। शिवालयों में कोई रुद्राष्टक गा रहा था, कोई शिव चालीसा का पाठ कर रहा था, और कहीं शिव तांडव स्तोत्र की झंकार लहरों-सी बह रही थी। दुर्गा काली दरबार के महंत सूर्यानंद ने कहा कि यह केवल एक पर्व नहीं था, यह था भक्ति का महासागर, जिसमें रामनगरी ने डुबकी लगाई। श्रद्धा ने सबको एक सूत्र में बांधा और सावन शिवरात्रि ने फिर साबित किया कि अयोध्या केवल राम की नहीं, समस्त सनातन संस्कृति की प्राणवायु है।
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रामनगरी में भोले की प्रतिष्ठित पीठ नागेश्वरनाथ में सुबह तीन बजे से ही कांवड़िए लाइन में लगने शुरू हो गए थे। यहां करीब 500 मीटर लंबी लाइन अभिषेक-पूजन के लिए लगी रही। सुबह तीन बजे से लेकर नौ बजे तक शिवालयों से लेकर अन्य मंदिरों रामलला, कनक भवन व हनुमानगढ़ी में भीड़ का दबाव अधिक था। सुबह 10 बजे के बाद तेज धूप के कारण रामपथ पर श्रद्धालुओं की भीड़ कम हो गई।
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सावन की शिवरात्रि पर जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। ड्रोन से निगरानी, ट्रैफिक डायवर्जन, मेडिकल टीमों की तैनाती और महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी ने व्यवस्था को सुगम बनाए रखा। सीसीटीवी से सभी प्रमुख मठ-मंदिरों की निगरानी की जाती रही। सुबह की पाली में रामपथ पर चार पहिया व दो पहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया था। जिसके चलते ऑफिस जाने वाले लोगों व स्कूली वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।