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Ayodhya News: लोक अदालत में 81,803 मुकदमों का निस्तारण, 18 करोड़ की वसूली

Sat, 14 Mar 2026 10:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sat, 14 Mar 2026 10:29 PM IST
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81,803 cases settled in Lok Adalat, Rs 18 crore recovered
लोक अदालत में आए फरियादी व बैंक के बीच समझौता कराते जिला जज।
अयोध्या। दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। इस दौरान सुलह-समझौता के आधार पर 81,803 मुकदमों का निस्तारण कराकर 18,23,50,335 रुपये की वसूली की गई।
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अपर जिला जज/नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत दीपक यादव के अनुसार इसमें 75 हजार वादों के निस्तारण का लक्ष्य था। वर्चुअल कोर्ट की पीठासीन अधिकारी निवेदिता सिंह ने सबसे अधिक 32,436 मुकदमों का निस्तारण किया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 115 याचिकाओं का निस्तारण कराया, जिनमें 10.14 करोड़ रुपये प्रतिकर जमा कराया गया।
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बैंक रिकवरी से संबंधित 1084 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किए गए। बैंक संबंधी ऋण के मामलों में 6.88 करोड़ रुपये का सेटलमेंट किया गया, जो पिछली लोक अदालत की तुलना में अधिक है। पारिवारिक विवाद संबंधी 69 मुकदमों का निस्तारण किया गया। वाणिज्यिक न्यायालय से संबंधी 11 मुकदमों में 53.92 लाख का सेटलमेंट किया गया। सीजेएम की अदालत में 4,256, एसीजेएम की अदालत में 2,082 वाद, बीमा से संबंधित दो मुकदमों का निस्तारण किया गया। राजस्व मामलों से संबंधी 29,608 वाद जिले के राजस्व न्यायालयों ने निस्तारित किए हैं।
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प्यार और सकून के लिए सुलह-समझौता जरूरी : जिला जज

अयोध्या। सुलह-समझौता करने से आपस में प्यार तो बढ़ता ही है आत्मा को सकून भी मिलता है। यहां तक कि सुलह यदि दुश्मन से की जाए तो प्यार भले ही न बढ़े, लेकिन सकून दोनों को मिलता है। यह बातें जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि झगड़े की ऊंची दीवारों को समझौता के माध्यम से हटाया जा सकता है। झगड़े की जड़ का आधार आर्थिक होता है। सुलह-समझौता में दोनों पक्षों को त्याग करना पड़ता है। पीठासीन अधिकारी रविकांत, मनोज शुक्ला, नोडल अधिकारी दीपक यादव, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण रंजिनी शुक्ला आदि ने दीप जलाया। इस मौके पर एसीजेएम द्वितीय महेंद्र पासवान, न्यायिक अधिकारी सुरेंद्र मोहन सहाय, राकेश कुमार, अनिल कुमार वर्मा, रजत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, सीजेएम सुधांशु शेखर उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
इनसेट
16 साल लड़े रास्ते का मुकदमा, सुलह से हुआ समाधान
-सिविल जज सदर प्रत्यूष आनंद मिश्रा की अदालत से 16 वर्षों से रास्ते के विवाद को लेकर चल रहे मुकदमा सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराया गया। वर्ष 2009 में रानोपाली निवासी राम नरेश ने रास्ते पर कब्जेदारी को लेकर शाहजहांपुर गांव निवासी मुमताज के विरुद्ध दीवानी न्यायालय में सिविल वाद दायर किया था। वर्ष 2017 में रामनरेश की मृत्यु हो गई। उनके लड़के राजेश कुमार सिंह ने अदालत में पैरवी शुरू की।
इनसेट
85 हजार में खत्म हुआ 1.90 लाख का लोन
जिला जज ने भारतीय स्टेट बैंक में एक वादकारी को बड़ी राहत पहुंचाई है। बैंक की एक शाखा में उसका 1.90 लाख रुपये का ऋण बकाया था। जिला जज ने सुलह कराकर 85 हजार रुपये में लोन का सेटलमेंट करवा दिया। इस दौरान जिला जज ने जिला कारागार की जैविक खेती से उत्पादित व हाथ से निर्मित वस्तुओं की लगाई गई प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया गया।उन्होंने एक गत्ता कुल्हड़ व एक बैग भी खरीदा।


इनसेट
बिजली बिल के मामलों में मायूस हुए वादकारी

राष्ट्रीय लोक अदालत में बिजली संबंधी समाधान के लिए दूरदराज से आए वादकारियों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। दिसंबर में आयोजित लोक अदालत में भी वादकारी वापस हुए थे, जिसे अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इस बार बिजली विभाग के कर्मचारी तो आए, लेकिन उनकी कोई तैयारी नहीं दिखी। इससे आक्रोशित होकर कई उपभोक्ता लौट गए। लोगों ने बताया कि बिजली बिल का भुगतान सुलह-समझौता के आधार पर होने की सूचना पर वह लोग आए थे, लेकिन शिविर न लगने से वापस जाना पड़ा।
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