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Auraiya News: मामूली विवाद में दो भाइयों को तीन-तीन साल की कैद, एक बरी
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औरैया। फफूंद कस्बा के मोतीपुर मोहल्ले में लकड़ी की फंटी निकालने को लेकर हुए विवाद और मारपीट के मामले में विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने फैसला सुनाया। न्यायालय ने दो सगे भाइयों मुसर्रत बेग उर्फ जाली और नुजहत बेग उर्फ कल्लू को दोषी ठहराया। उन्हें तीन-तीन साल की कैद और 27-27 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। तीसरा भाई निशरत बेग साक्ष्य के अभाव में बरी हो गया।
यह घटना 5 अप्रैल 2016 को हुई थी। वादी मुन्ना सिंह के बेटे ईलू ने अपनी दुकान का शटर उठाने के लिए पास पड़ी एक फंटी का उपयोग किया। काम के बाद उसने फंटी वापस रख दी थी। इसी बात से नाराज होकर मुसर्रत, नुजहत और निशरत बेग ने ईलू को रोका। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहे और गाली दी। विरोध करने पर फंटी से हमला किया, जिससे ईलू के दाहिने कंधे की हड्डी डिसलोकेट हो गई और गंभीर चोटें आईँ।
पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के बाद वादी ने प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की थी, जिसके आधार पर सुनवाई हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के गवाहों का परीक्षण कर मुसर्रत और नुजहत को दोषी पाया। बचाव पक्ष ने मुसर्रत के मुख कैंसर से पीड़ित होने की दलील दी थी। अदालत ने अपराध की गंभीरता और अभियुक्त की गंभीर बीमारी के बीच संतुलन बनाया। तीसरे आरोपी निशरत बेग को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
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यह घटना 5 अप्रैल 2016 को हुई थी। वादी मुन्ना सिंह के बेटे ईलू ने अपनी दुकान का शटर उठाने के लिए पास पड़ी एक फंटी का उपयोग किया। काम के बाद उसने फंटी वापस रख दी थी। इसी बात से नाराज होकर मुसर्रत, नुजहत और निशरत बेग ने ईलू को रोका। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहे और गाली दी। विरोध करने पर फंटी से हमला किया, जिससे ईलू के दाहिने कंधे की हड्डी डिसलोकेट हो गई और गंभीर चोटें आईँ।
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पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के बाद वादी ने प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की थी, जिसके आधार पर सुनवाई हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के गवाहों का परीक्षण कर मुसर्रत और नुजहत को दोषी पाया। बचाव पक्ष ने मुसर्रत के मुख कैंसर से पीड़ित होने की दलील दी थी। अदालत ने अपराध की गंभीरता और अभियुक्त की गंभीर बीमारी के बीच संतुलन बनाया। तीसरे आरोपी निशरत बेग को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
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